किंगफिशर: एतिहाद एयरवेज़ पर टिकी आस

 बुधवार, 12 दिसंबर, 2012 को 16:54 IST तक के समाचार
किंगफिशर

किंगफिशर एअरलाइंस अपनी शुरुआत से ही घाटे में चल रही है

भारत की किंगफिशर एयरलाइंस ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि वो संयुक्त अरब एमिरात की एतिहाद एयरवेज़ और कुछ दूसरे निवेशकों से हिस्सेदारी खरीदने के बारे में बातचीत कर रही है.

इससे पहले स्थानीय मीडिया ने खबर दी थी कि किंगफिशर अपनी 48 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है, हालांकि किंगफिशर ने इन दावों की पुष्टि नहीं की थी.

किंगफिशर पर करीब एक अरब चालीस करोड़ डॉलर का कर्ज़ है. उसे कर्जदाताओं ने आगे कर्ज देने को मना कर दिया है, जिसके चलते वो धन जुटाने के लिए हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रहा है.

"हम इस बात की पुष्टि करना चाहते हैं कि कंपनी हिस्सेदारी खरीदने के लिए कई निवेशकों से बातचीत कर रही है, जिनमें एतिहाद एअरवेज भी शामिल है."

किंगफिशर एअरलाइंस

किंगफिशर की वित्तीय समस्याएं उस वक्त बढ़ गईं जब उसके कर्मचारी तनख्वाह न मिलने के कारण लंबी हड़ताल पर चले गए.

इसकी वजह से अधिकारियों को हवाई जहाजों की उड़ानें बंद करनी पड़ीं.

इनसे कहा गया कि वो एअरलाइन को बचाने के लिए कोई नई योजना तैयार करें ताकि उड़ानों को दोबारा शुरू किया जा सके.

किंगफिशर ने एक बयान में कहा, “हम इस बात की पुष्टि करना चाहते हैं कि कंपनी हिस्सेदारी खरीदने के लिए कई निवेशकों से बातचीत कर रही है, जिनमें एतिहाद एयरवेज़ भी शामिल है.”

हालांकि कंपनी ने ये साफ नहीं किया है कि वो कितनी हिस्सेदारी बेच रही है.

शुरू से घाटे में

वहीं मुंबई स्थित एक अखबार, मुंबई मिरर ने खबर दी थी कि किंगफिशर करीब तीस अरब रुपए में अपनी 48 फीसदी हिस्सेदारी एतिहाद एयरवेज़ को बेचने जा रही है.

किंगफिशर एअरलाइंस की शुरुआत साल 2005 में हुई थी और वो कभी भी लाभ में नहीं रही.

कंपनी का ऋणसंकट लगातार बढ़ता ही गया और स्थिति ये हो गई कि वो अपने कर्मचारियों की तनख्वाह और उनका बकाया भी चुकाने की स्थिति में नहीं है.

इस बीच कई बैंकों ने भी कंपनी को ऋण देने से मना कर दिया और चिंता जताई कि कंपनी आगे खुद को कैसे बचाएगी.

बैंकों का कहना है कि वो कंपनी को उसी स्थिति में आगे ऋण दे सकते हैं जबकि उसमें नए सिरे से पूँजी निवेश होता हो.

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