महाकुंभ के लिए धर्म ध्वजा की स्थापना हुई

  • 7 दिसंबर 2012

हजारों साधू संतों ने गुरुवार की दोपहर प्रयाग के संगम क्षेत्र में पारंपरिक भूमि पूजन के साथ अगले महाकुंभ के लिए धर्म ध्वजा की स्थापना कर दी. धर्म ध्वजा अखाड़ों की धार्मिक पहचान है, जो दूर से दिखाई देती है.

इसके साथ ही अखाड़ो ने महाकुंभ क्षेत्र में अपनी पारंपरिक मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है. मेला प्रशासन ने लगभग 75 एकड़ जमीन साधू – संतों के अखाड़ों के लिए आबंटित की है.

इसी जमीन पर अखाड़ो ने पंच मेवा और दूध से नहलाई ईंटो को महाकुंभ क्षेत्र में स्थापित किया. जूना अखाड़े के सचिव स्वामी हरि गिरि ने बताया कि भैरव अष्टमी का दिन होने से ध्वजारोपण के लिए शुभ दिन था.

महाकुंभ की तैयारियाँ

इस अवसर पर जूना के अलावा ,अग्नि और आवाहान अखाड़ो ने भी धर्म ध्वजा रोपण और भूमि का पूजन सम्पन्न कराया.इसके बाद धीरे धीरे सनातन धर्म के तेरह अखाडे बारी बारी से अपने अखाड़ों का भूमि पूजन और धर्म ध्वजा की स्थापना करेंगे.

माना जाता है कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए आदि शंकराचार्य ने इन अखाड़ों की स्थापना की थी.

स्वामी हरि गिरि ने कहा, “भूमि पूजन और धर्म ध्वजा कुम्भ की भूमि में स्थापित करने के पीछे हमारी पुरानी मान्यता है.कुम्भ क्षेत्र में जाने के बाद हम सबसे पहले भूमि पूजन करके धर्म ध्वजा लगाते है.ध्वजा का जो दंड होता है वो बावन हाथ का होता है जिसमे जनेऊ की बावन गांठे होती है जो प्रतीक होती है अखाड़ों की बावन मडियों की.”

नगा साधुओं का शाही स्नान कुम्भ का मुख्य आकर्षण होता है. इस महाकुंभ में पहला शाही स्नान 14 जनवरी 2013 को है, जिसके बाद मार्च तक मेला चलेगा.