एफ़डीआई:मायावती करेंगी सरकार के पक्ष में मतदान

 गुरुवार, 6 दिसंबर, 2012 को 16:13 IST तक के समाचार

अरुण जेटली सरकार के बहुमत पर सवाल उठाए हैं.

राज्यसभा में यूपीए सराकर को उस वक्त बड़ी राहत मिली जब बसपा प्रमुख मायावती ने एफ़डीआई के मुद्दे पर बहस के दौरान कहा कि बसपा सरकार के समर्थन में मतदान करेगी.

मायावती ने कहा, “इस नीति की सबसे अच्छी बात ये है कि यहां राज्य सरकारों के पास अधिकार है कि वे इसे लागू करें या ना करें. यदि विपक्ष का प्रस्ताव पास हो जाता है तो उन्हें एक राजनीतिक मौका मिल जाएगा और सदन की कार्रवाई नहीं चलेगी और बहुत से महत्वपूर्ण काम रुक जाएंगे. इसे ध्यान में रखते हुए हम राज्यसभा में मतदान के दौरान सरकार के समर्थन में मतदान करेंगे.”

एफ़डीआई पर संसद में बहस के दौरान बहुजन समाज पार्टी के रुख़ पर सीबीआई के असर से जुड़े आरोपों पर पार्टी प्रमुख मायावती ने स्पष्टीकरण दिया है.

गौरतलब है कि लोकसभा में नेता विपक्ष सुषमा स्वराज ने आरोप लगाया था कि बसपा ने सीबीआई के दबाव में मतदान के पहले लोकसभा से वॉक आउट किया.

इस आरोप का जवाब देने के लिए मायावती ने राज्यसभा का मंच चुना. मायावती ने कहा, "जब हमने भाजपा का साथ नहीं दिया तो वो ऐसे आरोप लगा रहे हैं. अंगूर खट्टे हैं की कहावत भाजपा पर लागू होती है."

इसके बाद उन्होंने भाजपा के साथ उनके अनुभवों को सुनाना शुरु किया जिस पर भाजपा सांसदों ने आपत्ति जताई. इसके बाद सदन की कार्यवाही को कुछ देर के लिए स्थगित करना पड़ा.

उनसे पहले राज्य सभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली ने कहा है कि लोकसभा में हुए मतदान ने साबित कर दिया है कि मौजूदा सरकार के पास बहुमत नहीं है.

अरुण जेटली ने कहा कि सरकार के बहुमत की कीमत संवैधानिक संस्थाओं को चुकानी पड़ रही है. अरुण जेटली ने ये बयान खुदरा कारोबार में विदेशी निवेश पर चर्चा के दौरान दिया.

'सरकार अल्पमत में'

राज्यसभा में चर्चा के दौरान अरुण जेटली ने कहा,"बुधवार को लोकसभा में हुए मतदान के बाद इस सरकार की रहबरी पर चिंताएँ बढ़ गई हैं. सरकार बहुमत का 272 का जादुई आंकड़ा नहीं छू पाई. सरकार सिर्फ 253 के आंकड़े तक ही पहुँच पाई है."

"लोकसभा में हुए मतदान में यूपीए की राजनैतिक जीत नहीं हुई है. इस मतदान ने साबित किया है कि आप बिना बहुमत की निकम्मी सरकार चला रहे हैं."

अरुण जेटली, नेता विपक्ष, राज्यसभा

अरुण जेटली ने कहा, "लोकसभा में हुए मतदान में यूपीए की राजनैतिक जीत नहीं हुई है. इस मतदान ने साबित किया है कि आप बिना बहुमत की निकम्मी सरकार चला रहे हैं."

जेटली का हमला यहीं नहीं रुका, अरुण जेटली ने कहा कि सरकार को 253 के आंकड़े से 272 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए समझौते करने पड़ रहे है.

जेटली के अनुसार, “सरकार के बहुमत के लिए संवैधानिक संस्थाएं और जांच संस्थाएं इसकी कीमत चुका रही हैं.”

उन्होंने कहा कि सरकार के बहुमत की कीमत का असर देश के शासन पर कितना पडे़गा, ये आने वाले समय में पता चलेगा.

अरुण जेटली के मुताबिक़, “सरकार के साथी रीटेल एफडीआई का खुलकर विरोध करते हैं, लेकिन राजनैतिक मजबूरी की वजह से हमारा समर्थन नहीं कर रहे हैं.”

डीएमके पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि आपके सहयोगी भारत बंद में शामिल होते हैं और इसका विरोध करते हैं लेकिन मतदान आपके साथ करते हैं.

अरुण जेटली ने कपिल सिब्बल को खुली चुनौती देते हुए कहा, “अगर आप जनता की राय जानना चाहते हैं तो अपने चुनाव क्षेत्र में रिटेल स्टोर खोलें और अपना चुनाव वहाँ से करवाएं. आपको जनता का जवाब मिलेगा.”

अरुण जेटली ने रिटेल व्यापार में विदेशी निवेश के विरोध में तर्क भी दिए.

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