भारतीय बाज़ार पर फ़िदा विलायती संगीतकार

 बुधवार, 12 दिसंबर, 2012 को 00:44 IST तक के समाचार

तालिया बेंट्सन लॉस एंजिल्स से मुंबई नई संभावनाएं तलाशने आई हैं.

मेटालिका, एनरिक इग्लेसियस, डेविड गुएटा और ब्रायन एडम्स के बीच मिलती जुलती बात क्या है?

ये सभी वो अंतरराष्ट्रीय कलाकार हैं जिनके भारत में काफी प्रशंसक हैं और भारत में अंग्रेजी संगीत की बढ़ती हुई लोकप्रियता छोटे विदेशी कलाकारों को भी आकर्षित कर रही है.

भारत में संगीत के बदलते माहौल में संगीत करियर को आगे बढ़ाने में आसानी होगी.ऐसा उन विदेशी कलाकारों ने भी महसूस किया है जो यहाँ संगीत के क्षेत्र में अपनी किस्मत आजमाने आए हैं.

"यहाँ विदेशी संगीत का दायरा काफी छोटा है, इसलिए यहाँ पहचान बनाना आसान है. मुझे यहाँ लगता है कि आप पश्चिमी देशों की तुलना में किसी को जानते हैं तो थोड़ी देर के लिए ही सही शोहरत ज़रूर मिल जाती है"

तालिया बेंट्सन, मॉडल और संगीतकार

27 वर्षीय तालिया बेंट्सन का उदाहरण लीजिये, जो लॉस एंजिल्स से मुंबई आई हैं. आधी स्कैंडेनेवियाई और आधी भारतीय. तालिया कैलिफोर्निया में पली बढ़ीं, लेकिन दिल्ली में कई वर्षों तक रही हैं.

वो चार साल पहले संगीत और मॉडलिंग के क्षेत्र में करियर बनाने भारत आईं. वो कहती हैं, "यहाँ विदेशी संगीत का दायरा काफी छोटा है, इसलिए यहाँ पहचान बनाना आसान है."

वो आगे कहती हैं, "मुझे यहाँ लगता है कि आप पश्चिमी देशों की तुलना में किसी को जानते हैं तो थोड़ी देर के लिए ही सही शोहरत ज़रूर मिल जाती है."

तेज़ी से बढ़ता बाज़ार

बेंट्सन के लिए भारत आने की वजह केवल गाने का मौका हासिल करना ही नहीं था, बल्कि उस देश के साथ जुड़ने का एक अवसर भी था जहाँ उनकी माँ पैदा हुई थीं.

वो कहती हैं, "मैं वास्तव में यहाँ वो सब कर सकती हूँ जो लॉस एंजिल्स में संभव नहीं था. यहाँ इतने रंग है, इतने चरित्र है."

संगीत प्रमोटर विजय नायर कहते हैं कि भारत में बढ़ रहे पश्चिमीकरण के कारण पिछले दशक में विदेशी कलाकारों की संख्या भी बढ़ी है. इनकी संख्या अब भी कम है लेकिन वो यहाँ संगीत में अपना करियर बनाने आए हैं.

विजय नायर कहते हैं कि भारत में विदेशी संगीत का बाज़ार अब भी काफी छोटा है जिसके कारण विदेशी कलाकारों को मौक़ा मिलता है क्योंकि वो अलग हैं और नए चेहरे हैं.

भारतीय संगीत

ब्रिटेन में रहने वाले डीजे अनिल चावला कुछ साल पहले ही मुंबई आए हैं

उनका कहना है कि देश के विशाल आकार का मतलब है विदेशी कलाकार अपने देशों के मुकाबले बड़े दर्शकों के सामने अपनी कला का प्रदर्शन कर सकते हैं और इन्हें यहाँ अधिक प्रेस कवरेज मिलने की संभावना है.

लेकिन वो कहते हैं, "अगर मैं अमेरिका में रह रहा होता तो मैं यहाँ अपना सब कुछ छोड़ कर नहीं आता, ये सोच कर कि यहाँ करियर बनाना आसान है."

वैकल्पिक संगीत माहौल

भारत में पश्चिमी संगीत के चाहने वालों का दायरा अहम ज़रूर है लेकिन ये अब भी सीमित है.

बॉलीवुड का बाज़ार अब भी सबसे बड़ा है. धीरे-धीरे पश्चिमी संगीत की लोकप्रियता बढ़ रही है.

ब्रिटेन से कुछ साल पहले भारत आए डीजे अनिल चावला कहते हैं, "यहाँ एक अरब से अधिक लोगों की आबादी है और पैसे खर्च करने वालों की अच्छी-खासी संख्या है. जब उनकी कमाई अधिक है तो वो पार्टी इत्यादि में जाना चाहेंगे और इसका सीधा असर होता है उस काम पर जो मैं करता हूँ."

भारतीय संगीत

लेडी गागा ने पिछले साल भारत में अपना कार्यक्रम पेश किया था

डीजे चावला लंदन में नियमित रूप से डीजे का काम किया करते थे लेकिन आर्थिक मंदी की वजह से उन्हें काम कम मिलने लगा और यहाँ काम बढ़ने लगा तो वो यहाँ आ गए.

वो कहते हैं, "यहाँ संगीत में स्पॉन्सरशिप बढ़ी है जो मेरे लिए अच्छा है."

उनका कहना है कि अब कई शराब और सिगरेट कंपनियों ने संगीत समारोह और कॉन्सर्ट में बड़ा पैसा लगाना शुरू कर दिया है.

डीजे चावला भारत के बढ़ते और फलते-फूलते इलेक्ट्रॉनिक डांस संगीत का हिस्सा हैं. विदेशी डीजे डेविड गुएटा और स्वीडन के हाउस माफिया के शो इतने लोकप्रिय हैं कि इनके लिए टिकटें 60 डॉलर तक में बिकती हैं.

विजय नायर का कहना है कि भारतीय संगीत बाजार हाल के वर्षों में काफी बढ़ा है और केवल तालिया बेंट्सन और अनिल चावला जैसे छोटे कलाकार ही नहीं हैं, बल्कि बड़े विदेशी कलाकार भी इसका हिस्सा बनना चाहते हैं.

लेडी गागा ने पिछले साल पहली बार भारत की यात्रा की. इन दिनों पेरिस हिल्टन (जो शायद डीजे की हैसियत से नहीं जानी जाती हैं) गोवा में एक नाइट क्लब में डीजे का काम कर रही हैं.

विजय नायर कहते हैं, "कुछ ही वर्षों में जो कोई भी संगीत में एक लम्बा अंतरराष्ट्रीय करियर चाहेगा, वो भारत को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता.”

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