अपनों को ही 'विवादों में उलझाते रहे हैं' जेठमलानी

 सोमवार, 26 नवंबर, 2012 को 11:27 IST तक के समाचार
राम जेठमलानी

कई बार कहा जाता है कि भारत के बड़े वकीलों में एक से 10 तक राम जेठमलानी और तब दूसरों का नंबर आता है.

भारतीय जनता पार्टी से अनुशासनहीनता के लिए निलंबित किए गए मशहूर वकील राम जेठमलानी और विवाद कभी भी दूर-दूर नहीं रहे.

चाहे जेसिका लाल मर्डर मामले में आरोपी मनु शर्मा का केस लड़ने का मामला हो या पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने की बात, राम जेठमलानी हमेशा कुछ न कुछ ऐसा कहते या करते रहे हैं जिससे विवाद और उनका चोली दामन का साथ दिखता है.

मगर इन विवादों में भी ख़ास ये है कि अक़सर वो अपनी ही पार्टी के ख़िलाफ़ खड़े दिखे हैं.

'सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति सही'

राम जेठमलानी ने नितिन गडकरी को चिट्ठी लिखकर कहा कि वो रंजीत सिन्हा की सीबीआई डायरेक्टर के तौर पर नियुक्ति को लेकर पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री और कांग्रेस पार्टी पर किए जा रहे प्रहारों को लेकर चकित हैं.

चिट्ठी में लिखा गया था, "मुझे बहुत अफ़सोस है कि ये निंदा पूरे सच को जाने बिना की जा रही है और इसे उस अनुपयुक्त व्यक्ति ने भड़काया है जो खुद ये पद पाना चाहता था और अब पद पर नियुक्त हो जाने के बाद उसने अपनी शिकायत वापस ली है."

ये ख़त तब भेजा गया जब पार्टी नेता सुषमा स्वराज और अरूण जेटली प्रधानमंत्री से रंजीत सिन्हा की नियुक्त रद्द करने की मांग कर रहे थे.

'राम बेहद बुरे पति थे'

राम के नाम पर सत्ता की सीढ़ी चढ़ी भारतीय जनता पार्टी में रहते हुए जेठमलानी ने उन्हीं राम को निशाना बनाया.

नवंबर के दूसरे सप्ताह में दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान राम जेठमलानी ने कहा कि वो राम को ज़रा भी पसंद नहीं करते क्योंकि उन्होंने 'एक मछुआरे की बात सुनकर बेचारी महिला (सीता) को निर्वासन में भेज दिया था.'

वयोवृद्ध वकील ने कहा, "राम बेहद बुरे पति थे. मैं उन्हें बिल्कुल ...बिल्कुल पसंद नहीं करता. कोई मछुआरों के कहने पर अपनी पत्नी को वनवास कैसे दे सकता है?"

राम जेठमलानी ने ये कहते हुए राम के भाई लक्ष्मण को भी बुरा बताया था कि सीता का अपहरण उन्हीं की निगरानी के दौरान हुआ था और जब उनसे सीता को ढूंढने के लिए कहा गया तो उन्होंने यह कहते हुए बहाना बना दिया कि उन्होंने तो कभी भाभी का चेहरा ही नहीं देखा था तो वो उन्हें पहचानेंगे कैसे?

नितिन गडकरी के इस्तीफ़े की मांग

जिस समय भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी की कथित फ़र्ज़ी कंपनियों पर ख़बरें तेज़ हो रही थीं, राजस्थान से पार्टी के राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी ने बयान दे दिया कि विवादों में घिरे होने की वजह से नितिन गडकरी को पार्टी अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

इसी समय जेठमलानी के बेटे महेश जेठमलानी ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से इसी मामले पर इस्तीफ़ा दे दिया था.

नितिन गडकरी की कंपनी पर हाल में रिपोर्टे आती रही हैं कि उनके पूर्ति ग्रुप में फ़र्ज़ी कंपनियों का पैसा लगा है. आरोप तो ये भी लगे हैं कि बांध के विस्थापतों की भूमि उनकी कंपनी के हवाले कर दी गई है.

'चीन भारत-पाकिस्तान दोनों का दुश्मन है'

साल 2011 में पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर की भारत यात्रा के दौरान एक कार्यक्रम में राम जेठमलानी ने खड़े होकर कहा कि भारत और पाकिस्तान तो एक हैं लेकिन दोनों का असली दुश्मन चीन है.

पाकिस्तानी दूतावास द्वारा दिए गए इस भोज में चीन के राजूदत भी मौजूद थे. राजनयिक स्तर पर दिए गए इस तरह के बयान के मद्देनज़र पाकिस्तान के दूत को खड़े होकर सफाई देनी पड़ी कि ये राम जेठमलानी का व्यक्तिगत नज़िरया है पाकिस्तान का नहीं.

अफ़ज़ल गुरू, विनायक सेन की वकालत

राम जेठमलानी संसद पर हमले में अब मुजरिम क़रार दिए गए अफ़ज़ल गुरू के वकील रहे हैं. ये हमला अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में हुआ था और न सिर्फ बीजेपी बल्कि मुल्क की अन्य राजनीतिक पार्टियां भी इस मामले में सरकार के पीछे खड़ी थीं.

राम जेठमलानी ने माओवादी के क़रीबी और उनके साथ साठ-गांठ रखने के नाम पर गिरफ़्तार किए गए डाक्टर बिनायक सेन का केस भी लड़ा है.

बिनायक सेन छत्तीसगढ़ में चिकित्सा के क्षेत्र में लंबे समय से काम करते रहे हैं. उनकी गिरफ़्तारी राज्य में मौजूद बीजेपी की रमन सिंह सरकार के समय की गई थी.

अटल बिहारी वाजपेयी के ख़िलाफ़ चुनाव

कुछ समय पहले तक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में शामिल रहे राम जेठमलानी साल 2004 के आम चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ आज़ाद उम्मीदवार के तौर पर खड़े हो गए थे.

हालांकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने राम जेठमलानी के ख़िलाफ़ कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा किया था लेकिन मशहूर वकील फिर भी चुनाव नहीं जीत पाए.

मुख्य न्यायाधीश के मामले पर मतभेद

साल 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में क़ानून मंत्री बनाए गए राम जेठमलानी का सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एएस आनंद और अटार्नी जनरल सोली सोराबजी से मतभेद हो गया.

मामला मुख्य न्यायाधीश के परिवार को कथित ग़लत मुआवज़ा मिलने का था. इससे संबंधित काग़जात मंत्रालय से गायब हो रहे थे.

राम जेठमलानी के हाथों दिए गए ये क़ाग़जा़त वेवसाइट और मीडिया में आने लगे.

बाद में क़ानून मंत्री को पद से त्याग पत्र देना पड़ा.

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