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तापमान बढ़ा तो बर्बाद हो जाएगी दुनिया: विश्व बैंक

 बुधवार, 21 नवंबर, 2012 को 07:58 IST तक के समाचार
गेहूं

तापमान बढ़ने से भारत जैसे देश में गेहूं खेती पर बुरा असर पड़ सकता है

विश्व बैंक की द्वारा जारी की गयी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर जल्द ही कुछ ना किया गया तो दुनिया का औसत तापमान साल 2060 तक चार डिग्री तक बढ़ सकता है.

दुनिया के तापमान में यह अभूतपूर्व इज़ाफा भारत सहित दुनिया के कई क्लिक करें विकासशील और गरीब देशों में रहने वाले करोड़ों लोगों की जिंदगियों को नर्क बना सकता है.

क्लिक करें विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट क्लिक करें 'टर्न डाउन द हीट' में कहा है कि अगर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो दुनिया का तापमान औद्योगिकीकरण के पूर्व के तापमान की तुलना में चार डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा. इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया का तापमान आज की तारीख में भी 0.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है.

भारत पर प्रभाव

तापमान में यह अभूतपूर्व इज़ाफा के कारण भारत जैसे देश में गेहूं खेती पर अत्यधिक बुरा असर पड़ सकता है.

"अगर विश्व बैंक जैसी संस्था ऐसा कह रही है, जो पर्यावरण में आ रही तमाम खामियों को नकारती आ रही हो तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए"

वंदना शिवा, पर्यावरण कार्यकर्ता

गेंहूं को बोने, फलने और काटने के लिए ख़ास किस्म के तापमान की ज़रुरत होती है जो कि साल में कुछ ख़ास समय पर ही उपलब्ध होता है. लेकिन यह पूरा तानाबाना छिन्न-भिन्न हो सकता है और साथ ही लाखों गरीबों की रोटियाँ भीं.

पर्यावरण के लिए काम करने वाली कार्यकर्ता वंदना शिवा कहती हैं, "अगर विश्व बैंक जैसी संस्था ऐसा कह रही है, जो पर्यावरण में आ रही तमाम खामियों को नकारती आ रही हो तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए."

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर तापमान इस तरह से बढ़ा तो मौसम के चक्र बिखर जायेगें और और उनके बारे में कुछ भी आकलन या भविष्यवाणी करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा.

मौसम के पूर्वानुमामों पर खेती ही नहीं नागरिक विमानन, पर्यटन जैसी कई और भी व्यावसायिक गतिविधियाँ निर्भर रहती हैं.

ख़तरे में गंगा

गंगा

गंगा के अस्तित्व पर भी ख़तरा मंडरा रहा है

इस रिपोर्ट में क्लिक करें गंगा घाटी का ज़िक्र ख़ास तौर पर किया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार गड़बड़ मौसम के कारण गंगा नदी में कुछ समय अत्याधिक पानी रहेगा और कुछ समय बहुत कम. पानी की इस समस्या से निपटने के लिए बड़े बाँध बनाने होंगे जो कि अत्याधिक खर्चीले होंगे.

वंदना शिवा कहती हैं गंगा के हालात बेहद खराब होते जा रहे हैं अगर जल्द ही कुछ ना किया गया तो गंगा एक मौसमी नदी बन जायेगी. वंदना जोर देकर कहती हैं "अगर यह नदी मरी तो भारत भी मर जाएगा, क्योंकि इसके इसके पानी में पहाड़ों से आने वाली मिट्टी से भारत की थाली में अन्ना आता है."

रिपोर्ट में बड़े बांधों के ज़िक्र पर वंदना आरोप लगती हैं, "विश्व बैंक बड़े बांधो की बात करके अपना हित साध रहा है. बड़े बाँध बनेंगे तो बैंक क़र्ज़ देगा और एक के तीन ब्याज में वसूलेगा."

नदियों में कम पानी के कारण कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र भी प्रभावित होंगे क्योंकि उन्हें ठंडा करने के लिए पर्याप्त पानी नहीं होगा.

इसके अलावा समुद् के पानी में एसिड की मात्रा इतनी बढ़ जायेगी कि लाखों लाख मछुआरों की रोजी रोटी खतरे में पड़ जाएगी.

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