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छाती ठोक कर हिंदुत्व का समर्थन करने वाले ठाकरे

 रविवार, 18 नवंबर, 2012 को 18:57 IST तक के समाचार

बाल ठाकरे एक कार्टूनिस्ट थे पर उन्होंने मराठी लोगों और फिर हिंदुत्व के समर्थक के तौर पर अपनी पहचान बनाई

बाल ठाकरे 80 और 90 के दशक में तेजी से उभरे क्योंकि उस समय हिंदुत्व का मुद्दा सिर चढ़ कर बोल रहा था और ठाकरे कट्टर हिंदुत्व के समर्थक थे.

बाल ठाकरे ने 1966 में शिवसेना का निर्माण किया और 'मराठी मानुस' का मुद्दा उठाया. उस समय नौकरियों का अभाव था और बाल ठाकरे का दावा था कि दक्षिण भारतीय लोग मराठियों की नौकरियां छीन रहे हैं.

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बाल ठाकरे का तर्क था कि जो महाराष्ट्र के लोग हैं उन्हें नौकरी मिलनी चाहिए. इस मुद्दे को मराठियों ने हाथों-हाथ लिया.

शिवसेना पर राजनीति में हिंसा और भय के इस्तेमाल का बार-बार आरोप लगा.

लेकिन बाल ठाकरे का कहना था, "मैं राजनीति में हिंसा और बल का प्रयोग करूंगा क्योंकि वामपंथियों को यही भाषा समझ आती है और ये कुछ लोगों को हिंसा का डर दिखाना चाहिए तब ही वो सबक़ सीखेंगे."

ठाकरे की 'नीति'

उन्होंने दक्षिण भारत के मुंबई में रहने वाले लोगों और उत्तर भारतीयों के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल किया. साल 1993 में भी मुसलमानों के खिलाफ मुंबई में सांप्रदायिक दंगे हुए जिसमें बाल ठाकरे का नाम बार-बार लिया गया गया.

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वर्ष 1992 में जब अयोध्या का विवादित ढांचा गिराया गया था तब भारतीय जनता पार्टी या राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने तो खुलकर जिम्मेदारी नहीं ली. सभी लोगों ने यहां तक कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवकों का इससे कोई लेना देना नहीं है.

लेकिन बाल ठाकरे से जब यही सवाल दोहराया गया तो उन्होंने कहा, "हमारे लोगों ने ये गिराया है और मुझे उसका अभिमान है."

उन्होंने एक समय यहां तक कह दिया था, "हिंदू अब मार नहीं खाएंगे, उनको हम अपनी भाषा में जवाब देंगे."

हिंदुत्व का मुद्दा

बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय इसकी ज़िम्मेदारी क़बूल करने वाले वो अकेले नेता थे.

उन्हें पता था कि इस तरह की भाषा से उन्हें लोगों का समर्थन मिल सकता है और अनेक टीकाकार मानते हैं कि इसी भाषा ने उनके राजनीतिक भविष्य को स्थापित करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई.

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यही वजह थी कि लोगों के बीच उनके बारे में दिलचस्पी बढ़ने लगी. उन्होंने कट्टर हिंदुत्व और पाकिस्तान के प्रति जो कट्टरवादी रवैया अपनाया उससे भी समाज के कुछ वर्गों में उन्हें समर्थन मिला.

उन्होंने मुसलमानों के विरोध में वकत्व्य दिए. कट्टर हिंदुत्व की बात की. भारत-पाक क्रिकेट पर भी कड़ा रुख अपनाया.

बाल ठाकरे के बाद कौन?

बाल ठाकरे के जाने के बाद शिवसेना की जिम्मेदारी किसकी होगी ये एक बड़ा मसला है.

शिवसेना की कमान किसे दी जाएगी और खुद शिवसैनिक क्या चाहते हैं? बाल ठाकरे के बेटे और भतीजे, दोनों के बीच उनके उत्तराधिकारी होने को लेकर संघर्ष जारी है.

हालांकि राज ठाकरे ने कुछ सालों पहले अपना अलग राजनीतिक दल खड़ा कर लिया था.

जहां तक बात शिवसेना के 'मूड' की है तो राज ठाकरे बाल ठाकरे से काफी मेल खाते हैं, वो शिवसेना की विचारधारा में फिट भी बैठते हैं. एक विकल्प ये भी हो सकता है कि दोनों भाई मिलकर पार्टी की कमान संभाले.

(वैभव पुरंदरे से बीबीसी संवाददाता समीर हाशमी की बातचीत पर आधारित)

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