ठाकरे के करिश्मे पर टिकी है शिव सेना

 गुरुवार, 15 नवंबर, 2012 को 13:35 IST तक के समाचार
बाल ठाकरे

हर आदमी आज बाल ठाकरे की बात कर रहा है कोई भविष्य की तो कोई बीते कल की. जायज़ बात है, क्योंकि शिवसेना ही एक ऐसी पार्टी है जो अपने जन्म के बाद से आज तक केवल एक ही आदमी के करिश्मे से बंधी रही.

बाल ठाकरे अकेले नेता हैं जो अपने निजी करिश्मे के बल पर मुंबई जैसे दिन रात चलते रहने वाले शहर के पहियों को आज भी ठहराने की ताकत रखते हैं.

हालाँकि ये भी सच है कि पश्चिम महाराष्ट्र में, विदर्भ में उनकी कोई खास अपील नहीं. उनका शक्ति केंद्र मुंबई है. वो शहरी मराठियों के नेता माने जाते हैं. यही कारण है कि आज मुंबई की सांसे रुकी हुई हैं.

साल 1966 में अपने जन्म के बाद से आज तक ना जाने महाराष्ट्र में कितने मुख्यमंत्री आए और चले गए दूसरे दलों में कितने नेता बदल गए लेकिन महाराष्ट्र में एक चीज़ नहीं बदली वो थे बाल ठाकरे.

"वो पाकिस्तान की टीम के भारत में खेलने के खिलाफ अटल बिहारी वाजपेयी से लड़ गए और चंद रोज़ बाद उन्होंने जावेद मियाँदाद को अपने यहाँ खाने पर बुला लिया. पत्रकारों ने पूछा क्यों बुलाया तो बोले जावेद मियाँदाद से भारतीय खिलाड़ियों को सीखना चाहिए इसलिए बुलाया. कोई और नेता यह कह कर नहीं निकल सकता था बाल ठाकरे निकले"

कुमार केतकर

इस दौर में शिवसेना में बग़ावतें भी हुईं. छगन भुजबल गए, नारायण राणे गए, राज ठाकरे चले गए लेकिन शिव सेना में उस तरह का कोई विभाजन नहीं हुआ जैसा डीएमके और अकाली दल में हुआ था.

पर ठाकरे की ताकत इतनी बढ़ी कैसे? कैसे शिव सेना उनके चारों ओर बँधी रहती है?

केवल एक करिश्मा

मेरे विचार में शिव सेना के पास कोई विचारधारा नहीं थी, कोई कार्यक्रम नहीं था. केवल एक करिश्मा है और वो है बाल ठाकरे.

बाल ठाकरे अपने आपको एक हिन्दू की तरह पेश करते आए हैं लेकिन वो भाजपा के खिलाफ लड़ चुके हैं. वो पाकिस्तान की टीम के भारत में खेलने के खिलाफ अटल बिहारी वाजपेयी से लड़ गए और चंद रोज़ बाद उन्होंने जावेद मियाँदाद को अपने यहाँ खाने पर बुला लिया. पत्रकारों ने पूछा क्यों बुलाया तो बोले जावेद मियाँदाद से भारतीय खिलाड़ियों को सीखना चाहिए इसलिए बुलाया.

कोई और नेता यह कह कर नहीं निकल सकता था.

बाल ठाकरे 'मराठी माणूस' की बात करते रहे हैं लेकिन यह कोई विचारधारा नहीं हो सकती. यह एक स्वत:स्फूर्त भावना है जिसके वो प्रतिनिधि हैं. मराठियों के लिए उनके पास कोई कार्यक्रम नहीं रहा है.

उन्होंने महाराष्ट्र के लिए कोई नई दृष्टि दी हो ऐसा भी नहीं है. महाराष्ट्र या मराठी भाषा के लिए उन्होंने कोई विचार रखा हो ऐसा भी नहीं है. बस करिश्मा है.

चाहे उद्धव हो या राज या कोई और कोई भी नेता, युवाओं को कोई इस तरह से नहीं आकर्षित कर सका जिस तरह से बाल ठाकरे करते आए हैं. इसके पीछे कई कारण थे.

बाल ठाकरे को कभी सत्ता नहीं चाहिए. उनको इस बात की कोई फ़िक्र नहीं रही है कि दिल्ली में उनकी पार्टी सत्ता में भागीदारी पाती है की नहीं.

कोई लाग लपेट नहीं

" वो बनावटी नहीं हो सकती थी. वो लोकप्रिय नेता थे, उग्र भीड़ को जगा सकते थे उनके तौर तरीकों को राजनीती के मापदंडों पर नहीं परखा जा सकता. बाल ठाकरे में एक किस्म की ईमानदारी थी कोई लाग लपेट नहीं था और यह राजनीति में देखने को नहीं मिलता."

कुमार केतकर

यह बड़ा कारण है बाल ठाकरे के करिश्मे के पीछे. दूसरा उनकी राजनीति स्वत:स्फूर्त है. वो लोकप्रिय नेता हैं थे, उग्र भीड़ को जगा सकते हैं.

उनके तौर तरीकों को राजनीति के मापदंडों पर नहीं परखा जा सकता. बाल ठाकरे में एक किस्म की ईमानदारी है और उनके तौर तरीकों में कोई लाग लपेट नहीं कभी नहीं रहा. राजनीति में ऐसा कम देखने को मिलता है.

उनको मुख्यमंत्री नहीं बनना था, प्रधानमंत्री नहीं बनना था उनको राजनीति के फलों में कोई रूचि नहीं है उनकी एक ही इच्छा है, वो है लोगों के साथ रहना.

शिव सेना की नींव में बाल ठाकरे का करिश्मा है. पर अब अगर वो करिश्मा ही चला जाता है तो क्या होगा?

इसके बाद मुझे नहीं लगता कि शिव सेना इसके बाद एक रह पाएगी. राजनीतिक कार्यकर्ता कल के बारे में सोचते हैं वो अब अपने लिए जगह तलाशने लगेगे.

रही बात उनके बेटे उद्धव और भतीजे राज के राजनीतिक मिलन की, तो यह मुश्किल लगता है क्योंकि उनके बीच अहंकार की लड़ाई है और वो साथ आ भी गए तो भी बाल ठाकरे का करिश्मा कहाँ से आयेगा?

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.