खिलाड़ी खेलें या राजनीति करें: विजेंदर

  • 6 नवंबर 2012
विजेंदर सिंह

ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता और एशियाड में स्वर्ण जीतने वाले विजेंदर सिंह भी खिलाड़ियों को नौकरी में मिलने वाले प्रमोशनों के तौर तरीकों से नाराज़ हैं.

हरियाणा पुलिस में डीएसपी के पद पर काम कर रहे विजेंदर का कहना है, "खिलाड़ी के मन में नकारात्मक भाव आते हैं. उसे लगता है कि राजनीति करें या खेल खेलें?"

उन्हें लगता है कि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की कोई नीति नहीं है और सरकारें अपनी मर्ज़ी से काम करती हैं.

भेदभाव

बीबीसी हिंदी के एक ख़ास बातचीत में विजेंदर ने कहा, "प्रमोशन उन लोगों को मिलता है जिन लोगों को सरकार चाहती है. मैरिकॉम को ओलंपिक में पदक जीतने के बाद प्रमोशन मिला और वो एसपी बना दी गईं. हमारे राज्य में ऐसा नहीं है. जो सरकार आएगी उसका मन करेगा तो प्रमोशन मिलेगा वरना नहीं मिलेगा."

विजेंदर ने कहा "अगर मैरिकॉम एक मैडल ला कर एसपी बन सकती है तो मैंने 2008 में मैडल जीता था. लगातर ला रहा हूँ, मुझे तो इस हिसाब से एसपी क्या आईजी बना देना चाहिए था."

विजेंदर 2012 ओलंपिक में रजत पदक लाने वाले विजय कुमार के प्रमोशन की मांग को भी जायज़ ठहराते हैं. विजय कुमार पिछले कुछ समय से प्रमोशन की मांग को लेकर सेना में लेने वालों के साथ संघर्ष कर रहे हैं. विजेंदर कहते हैं, "विजय के साथ भी यही हो रहा होगा उसके अधिकारी नहीं चाहते होंगे कि उसे प्रमोशन मिले."

'जी हुज़ूरी पर मौज'

उन लोगों से, जो यह कहते हैं कि खिलाड़ियों को खेल में प्रदर्शन के बाद पहले नौकरी देने के बाद प्रमोशन देना उचित नहीं है. उनके लिए विजेंदर का कहना है, "नौकरी दे कर कोई अहसान नहीं किया है. कई लोग कहते हैं कि हम आईएएस हैं आईपीएस तो मैं उन्हें कहता हूँ कि भैया अर्जुन अवार्ड लेकर दिखा दो. सबको सम्मान बराबर मिलना चाहिए. सरकार को कुछ बीच का रास्ता निकालना होगा."

खिलाड़ियों को हो रही परेशानी के बारे में विजेंदर सिंह ने कहा, "कई ऐसे खिलाड़ी जिनका प्रदर्शन बहुत अच्छा है उन्हें तो एएसआई, एसआई के पद पर भर्ती किया जाता है लेकिन कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो नेताओं की जी हुजूरी करते हैं और उन्हें सीधे डीएसपी के पद पर भर्ती कर लिया जाता है."

उदहारण देते हुए विजेंदर ने कहा, "ग्वांगजू एशियाई खेलों में मुक्केबाज़ी में रजत पदक जीतने वाले और अर्जुन अवार्ड विजेता दिनेश कुमार को इंस्पेक्टर के रूप में नौकरी करनी पड़ रही है जबकि कई ऐसे हैं जिन्हें अर्जुन अवार्ड नहीं मिला है और वो डीएसपी बन गए हैं. क्रिकेट खिलाड़ी जोगिंदर शर्मा को सीधे डीएसपी बना दिया गया है, क्यों?"

विजेंदर का कहना है, "यह सब देख कर खिलाड़ी को लगता है कि मैं स्पोर्ट्स में क्यों लगा रहूँ, अपनी नौकरी क्यों ना करूं. और भी कई ऐसे नाम हैं अब मैं किस किस का नाम लूं. अच्छी बात है कि खिलाड़ियों को नौकरी देते हैं लेकिन इसमें पारदर्शिता लानी चाहिए."

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