अदालतें रीतियाँ नहीं बदल सकतीं: खाप नेता

 मंगलवार, 6 नवंबर, 2012 को 16:44 IST तक के समाचार
खाप पंचायत

खाप पंचायतों का कहना है कि परंपराओं को कोई भी अदालत नहीं बदल सकती

हरियाणा के खाप नेताओं ने दोबारा कहा है कि उन पर प्रतिबंध लगाने और उनके सदस्यों पर केस चलाने की बातें बेमानी हैं.

दरअसल दिल्ली स्थित गैर-सरकारी संगठन ‘शक्तिवाहिनी’ ने दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डालकर मांग की थी कि गाँव-देहात में इज्जत के नाम पर की जा रही हत्याओं पर रोक लगे और खापों की कथित मनमानी और फिजूल के आदेश बंद हों.

जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन से कहा था कि वो राज्यों की प्रतिक्रियाएँ लें कि उन्होंने खापों की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाए हैं, और उन प्रतिक्रियाओं को अदालत के सामने रखें.

समाचार एजेंसी यूएनआई के मुताबिक अदालत ने रामचंद्रन की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया हैं और वो इन सिफारिशों पर अपना फैसला 22 नवंबर को सुनाएगी.

इस पर खाप नेता सूबे सिंह ने बीबीसी से कहा कि परंपराओं को सुप्रीम कोर्ट भी नहीं बदल सकता है.

उन्होंने कहा, “शादियों और दूसरी बातों पर हमारी रीतियों को ना तो सुप्रीम कोर्ट बदल सकता है ना ही संसद बदल सकती है.”

गौरतलब है कि पूर्व में हरियाणा और आसपास के कुछ इलाकों में इज्जत के नाम पर कई नवयुवकों और नवयुवतियों की हत्याएँ हुई हैं और इन घटनाओं में खापों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है.

सिफारिशें

ऱाजू रामचंद्रन की सिफारिशें

खापें गैर-संवाधानिक निकाइयाँ
समाज में जागरुकता फैले
प्रभावित इलाकों पर नजर ऱखना
दोषी खाप नेताओं गिरफ्तार हों
दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हों

राजू रामचंद्रन ने अपनी सिफारिशों में अदालत से कहा है कि वो प्रशासन को आदेश दे कि वो इस मुद्दे पर कड़ी कार्रवाई करे.

रामचंद्रन ने अपनी सिफारिशों में कहा कि स्थानीय अधिकारियों से ऐसे इलाकों की पहचान करने को कहा जाए जहाँ पिछले एक साल में इज्जत के नाम पर हत्याएँ हुई हैं, खतरे का सामना कर रहे दंपत्तियों को सुरक्षा दी जाए, खाप नेताओं को समझाने की कोशिश की जाए, और अगर खापें कोई भड़काऊ फैसला लेती हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए.

रामचंद्रन ने अपनी सिफारिशों में खापों को गैर-संवैधानिक निकाइयाँ बताया है.

रामचंद्रन ने सिफारिशों में कोई कदम नहीं उठाने पर स्थानीय पुलिस कर्मियों पर भी कार्रवाई करने की बात कही है.

रामचंद्रन ने कहा है कि राज्य और केंद्र सरकारों को लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए कार्यक्रम चलाने चाहिए.

उन्होंने हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश पुलिस कर्मियों में भी जागरुकता फैलाने के लिए कार्यक्रम चलाने की बात कही है.

प्रतिबंध?

उधर बीबीसी से बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट में शक्तिवाहिनी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील रविकांत ने कहा कि वो खापों के विरुद्ध नहीं हैं लेकिन राजनीतिक नेताओं और प्रशासन को लोगों को जागरुक बनाने के लिए कदम उठाने जाहिए.

उन्होंने महिला और बाल कल्याण मंत्रालय जैसी संस्थाओं पर आरोप लगाया कि वो हाथ पर हाथ रखकर बैठे हुए हैं और उन्होंने अपनी भूमिका नहीं निभाई है.

रविकांत ने राजू रामचंद्रन की सिफारिशों को लेकर थोड़ा मतभेद भी व्यक्त किया.

उन्होंने कहा, “इतने बड़े तबके में आप किस-किसको गिरफ्तार करेंगे? सरकारों को महिलाओं के अधिकारों को लेकर काम करना चाहिए.”

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