चार मीनार के पास बने मंदिर पर विवाद

  • 5 नवंबर 2012

हैदराबाद की मशहूर ऐतिहासिक इमारत चार मीनार से सटे मंदिर के निर्माण पर हुए विवाद के बाद आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंदिर में किसी तरह के परिवर्तन या निर्माण पर रोक लगा दी है.

उच्च न्यायालय की दो जजों की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि मंदिर में 31 अक्टूबर की यथास्थिति बरकरार रखी जाए.

अदालत ने आंध्र प्रेदश सरकार, भारत सरकार, पुरात्तव विभाग, हैदराबाद पुलिस और भाग्य लक्ष्मी मंदिर की प्रबंधक समिति को भी नोटिस जारी किए हैं.

इस मामले में विभिन्न जनहित याचिकाएं दर्ज की गई थीं जिनमें कुछ ने चार मीनार के आसपास निर्माण पर रोक लगाने की मांग की थी जबकि कुछ जनहित याचिकाओं में निर्माण की अनुमति देने की मांग की गई थी. अब उस मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद की जाएगी.

तनाव

ये याचिकाएं ऐसे समय में दायर की गई थी जबकि हैदराबाद के पुराने शहर में इस विषय पर एक सप्ताह से सांप्रदायिक तनाव बहुत बढ़ा हुआ है.

रविवार रात को भी इस वजह से दो गुटों के बीच झड़पें हुई थी और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े थे.

ये विवाद बुधवार की रात शुरु हुआ जब मंदिर के विस्तार के लिए लकड़ी के खंभे गाडे जा रहे थे जिसमें चार मीनार की एक खिड़की की जाली टूट गई.

पुलिस ने दोनों गुटों को अलग- अलग रखने के लिए कड़े इंतज़ाम किए हैं लेकिन प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस मंदिर समिति का सहयोग कर रही है.

पुलिस आयुक्त अनुराग शर्मा ने कहा है कि पुलिस ने कड़ी कारवाई करते हुए निर्माण को रोक दिया है और पंद्रह लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिनमें मंदिर समिति की प्रमुख शशि कला, भारतीय जनता पार्टी औऱ बजरंग दल के कार्यकर्ता शामिल हैं.

मजलिस-इ-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमईएम) के विधायक अहमद पाशा कुंदरी की अगुवाई में ये विरोध उस समय ख़त्म हुआ जबकि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें लिखित रूप से ये आश्वासन दिया कि निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी.

इस बीच पुरात्तव विभाग के अधिकारी जो इस स्मारक के संरक्षण के लिए जिम्मेवार हैं इस मामले में चुप्पी साधे हैं और उन्होंने इस विषय पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है.

संबंधित समाचार