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समलैंगिकों की मदद के लिए आगे आया चर्च

 शुक्रवार, 2 नवंबर, 2012 को 16:05 IST तक के समाचार
समलैंगिकों

चेन्नई में हुई मुलाकात का मकसद समलैंगिकों की समस्याओं को जानने का था

समलैंगिकता के मुद्दे पर खुलकर सोचने और बहस करने से कतराते वाले भारतीय समाज में अब एक धार्मिक संगठन ने समलैंगिकों की समस्याओं को समझने और उन्हें मदद करने की पहल की है.

भारत में चर्चों की राष्ट्रीय परिषद (एनसीसीआई) से जुड़े प्रमुख पादरियों और धार्मिक नेताओं ने गुरुवार को चेन्नई में समलैंगिक समूहों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनकी दिक्कतों को सुना.

एनसीसीआई भारत में प्रोटेस्टेंट और रूढ़िवादी चर्च का प्रमुख संगठन है और यह देश भर में 13 लाख ईसाइयों का प्रतिनिधित्व करता है.

समलैंगिकता जैसे मुद्दे पर बातचीत की पहल से जुड़े सवाल के जवाब में संगठन के सचिव सुनील राज फिलिप ने बीबीसी से कहा, ''हम लोग उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं ताकि जिस भी तरीके से संभव हो पाए, चर्च उनकी मदद कर सके.''

उन्होंने कहा, ''चर्च में परंपरागत सोच रखने वालों का मानना है कि इन लोगों की गतिविधियाँ ईश्वर की मर्ज़ी के खिलाफ होती हैं. लेकिन चर्च में पादरियों सहित कई उदारवादी लोग भी हैं जिनका मानना है कि वे लोग भी ईश्वर के ही बनाए हुए हैं.''

"चर्च में परंपरागत सोच रखने वालों का मानना है कि इन लोगों की गतिविधियाँ ईश्वर की मर्ज़ी के खिलाफ होती हैं. लेकिन चर्च में पाधरियों सहित कई उदारवादी लोग भी हैं जिनका मानना है कि वे लोग भी ईश्वर के ही बनाए हुए हैं."

एनसीसीआई के सचिव सुनील राज फिलिप

सुनील कहते हैं, ''पुरुषों और महिलाओं के लिए हम इस तरह के सम्मेलन करते ही रहते हैं. इसी तर्ज पर इस चर्च में भी समलैंगिकों के लिए यह सम्मेलन किया गया.''

सोच में बदलाव

सुनील के मुताबिक चेन्नई में हुई मुलाकात का मकसद समलैंगिकों की समस्याओं को जानना था और यह एक शुरुआत है.

उनका कहना है, ''चर्च का मानना है कि इस तरह की समस्याओं का हल ढूँढना भी ईसाई धर्म के तहत चर्च का ही काम है.''

'वॉयसेज़ द चर्च मस्ट हियर' नाम के इस सम्मेलन में कई समलैंगिक संगठनों ने भाग लिया. इस कदम को एक बदलाव की तरह देखा जा रहा है.

इसमें भाग लेने वाले कई लोगों ने इस कदम की तारीफ करते हुए कहा कि चर्च उनके खिलाफ गलत या नकारात्मक धारणाएं रखने वाले लोगों की मानसिकता बदलने में मदद कर सकता है.

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