संसद भंग कर जनता का सामना करे सरकार: वीके सिंह

  • 29 अक्तूबर 2012
अन्ना हज़ारे और वीके सिंह 30 जनवरी से भारत भ्रमण करेंगे

सामाजिक कार्यकर्ता और मज़बूत जनलोकपाल कानून के लिए आंदोलन चला रहे अन्ना हज़ारे ने पूर्व सेनाध्यक्ष रिटायर्ड जनरल वीके सिंह के साथ एक संवाददाता सम्मेलन कर देश की संसद को भंग करने की मांग की.

संवाददाता सम्मेलन में पहले जनरल वीके सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मौजूदा संसद ने लोगों का विश्वास खो दिया है इसलिए उसे भंग किया जाना चाहिए और सत्ता और विपक्ष दोनों को जनता का सामना करना चाहिए.

विदेशों में जमा काला धन के बारे में उन्होंने कहा कि हमारी संसद राष्ट्र के लिए इस गंभीर मसले पर खामोश बैठी है. देश को नहीं पता कि किन-किन लोगों का कितना धन विदेशों में जमा है.

वीके सिंह ने कहा कि यूपीए की सरकार ने हाल में जितने फैसले लिए हैं, उनमें से ज्यादातर में सरकार अल्पमत में है चाहे वो रिटेल में एफडीआई का मुद्दा हो या डीज़ल और एलपीजी की कीमत में बढ़ोतरी. यहां तक कि गठबंधन में शामिल पार्टियां भी सरकार के साथ नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि एलपीजी की कीमत मनमाने ढंग से बढ़ाने और उसका वार्षिक कोटा तय करने के पक्ष में सरकार ने ये तर्क दिया है कि पेट्रोलियम कंपनियों को नुकसान हो रहा है. सरकार का ये तर्क गले से नहीं उतरता.

बाज़ार सरकार पर हावी

उन्होंने कहा कि देश की सरकार संविधान के मुताबिक न बनाकर देश की नीति बाज़ार के मुताबिक बना रही है. जबकि ज़रूरत इस बात की है कि गांधी जी के आदर्शों पर नीतियां बनाई जाएं और देश का विकास किया जाए.

उन्होंने कहा कि देश के जल, जंगल और जमीन को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है. इससे देश आगे नहीं बढ़ेगा.

जनरल सिंह ने ये भी कहा कि, ''देश की जनता के लिए सोचने का समय आ गया है. जनता अगर आज नहीं सोचेगी तो आनेवाली पीढ़ियां खतरे में पड़ जाएंगी क्योंकि सब मिलकर देश को लूट रहे हैं और ये लूट अंग्रेजों की लूट से भी ज्यादा है. अंग्रेजों ने जितना अपने पूरे शासन काल में नहीं लूटा उससे ज्यादा पिछले 65 साल में लूट हुई है.''

उन्होंने कहा कि संसद में बैठे लोग और सत्ता में शामिल लोगों को जनता की कोई चिंता नहीं है.

हक़ीक़त ये है कि ये सब संविधान के अंतर्गत जनता के सेवक हैं लेकिन वो जनता की भलाई का काम नहीं कर रहे इसलिए उन्हें हटाया जाना अब ज़रूरी हो गया है.

उन्होंने कहा कि नई संसद बनानी है. जनता नए प्रतिनिधि चुनेगी. अब देश को चरित्रशील, सेवाभावी और राष्ट्रीय दृष्टिकोण वाले नेता की जरूरत है.

'वापस बुलाने की शक्ति'

अब चुनाव लड़नेवालों को ऐसा हलफनामा देना चाहिए जिसका पालन न करने पर जनता के पास उन्हें वापस बुलाने की शक्ति हो.

आज ऐसा कोई प्रावधान नहीं क्योंकि आज की व्यवस्था में चुने गए लोग पांच साल के लिए राजा बन जाते हैं.

उन्होंने कहा कि जनता की संसद बनेगी तो जनलोकपाल आएगा और अंग्रेजों के सड़ेगले कानून बदले जाएंगे.

इस मौके पर अन्ना हजारे ने भी अपनी बात मीडिया के सामने रखी. उन्होंने कहा कि देश में गरीब और अमीर का फासला बढ़ रहा है. कहीं लोग क्या-क्या खाऊं इसके लिए जी रहे हैं और कहीं लोग क्या खाएं इसी चिंता में लगे हैं. ये व्यवस्था बदलनी होगी.

उन्होंने कहा कि संविधान का पालन नहीं हो रहा है. नदियों का निजीकरण हो रहा है. 12 महीने बहने वाली नदियां सूख रही हैं.

अन्ना हजारे ने ये भी कहा कि, "संसद को भंग कर वो कोई रिमोट कंट्रोल नहीं करना चाहते. हम बाहर रहकर लोगों को जगाएंगे. 30 जनवरी तक सरकार को बताएंगे और 30 जनवरी से एक साल तक देश में घूमेंगे. देश की सेवा करने के लिए घूमेंगे"

उन्होंने कहा कि देश को बर्बाद करने वाले दुश्मन हमारे देश में ही छुपे हैं उनके खिलाफ लड़ाई लड़ने की जरूरत है.