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आंध्र का हर तीसरा कांग्रेसी सांसद मंत्री

 रविवार, 28 अक्तूबर, 2012 को 19:46 IST तक के समाचार

मनमोहन सिंह सरकार में शामिल हुए नए मंत्री

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कैबिनेट में रविवार को हुए विस्तार की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें आंध्र प्रदेश से पांच नए चेहरे लिए गए हैं. इसके बाद कैबिनेट में इस राज्य के प्रतिनिधियों की संख्या दस हो गई है.

राज्य के इतिहास में अब तक कभी भी केन्द्रीय मंत्रिमंडल में इतने मंत्रियों को नहीं लिया गया था.

जब आंध्र प्रदेश से संबंध रखने वाले पी वी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे तब भी राज्य से केवल सात लोगों को मंत्री बनाया गया था.

रविवार को जिन पांच नए लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है उनमें फिल्म अभिनेता से राजनेता बनने वाले चिरंजीवी हैं जिन्होंने कुछ महीने पहले ही अपनी प्रजा राज्यम पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था.

नए चेहरों में एक दलित, एक जनजाति , एक पिछड़ी जाति की महिला और एक रेड्डी सांसद शामिल हैं.

राजनीतिक हालात

केंद्र में इतना बड़ा प्रतिनिधित्व दिए जाने को आंध्र प्रदेश की मौजूदा राजनैतिक परस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

कुछ लोगों का कहना है कि यह सही कदम है जो बहुत देर से उठाया गया है. उनका कहना है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश ने कांग्रेस को किसी भी दुसरे राज्य से ज्यादा यानी 33 लोकसभा सीटें देकर केंद्र में दूसरी बार सत्ता में आने में एक निर्णायक भूमिका निभाई थी.

लेकिन अभी तक इस राज्य को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में नज़रअंदाज़ ही किया जाता रहा और उसके केवल पांच ही मंत्रियों को शामिल किया गया था.

प्रेक्षक मानते हैं कि आंध्र प्रदेश के ज्यादा मंत्रियों को शामिल कर के कांग्रेस एक तीर से कई शिकार करना चाहती है.

वाईएसआर कांग्रेस के जगनमोहन रेड्डी कांग्रेस बड़ी चुनौती दे रहे हैं

सबसे पहले उसे उम्मीद है कि 2014 के चुनाव में एक बार फिर उसे आंध्र प्रदेश में वैसा ही समर्थन मिलेगा.

दूसरे, तेलंगाना क्षेत्र से दो और मंत्री लेकर कांग्रेस अलग तेलंगाना राज्य के आंदोलन को भी ठंडा करने की कोशिश कर रही है.

जगनमोहन रेड्डी

आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र में उसे जगनमोहन रेड्डी की वाई एस आर कांग्रेस से जिस कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है उसका सामना करने के लिए उसने अब इन दो क्षेत्रों से कुल सात मंत्रियों को लिया है.

आंध्र प्रदेश में कांग्रेस इस समय एक मुश्किल दौर से गुज़र रही है, जहाँ उसकी रीढ़ की हड्डी समझी जाने वाली रेड्डी जाति उसका साथ छोड़कर जगनमोहन रेड्डी के साथ जा रही है और तेलंगाना के लोग अलग राज्य से कम कोई चीज़ स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं.

ऐसे में केवल मंत्रिमंडल में ज्यादा लोगों को लेने से ज़मीनी सच्चाई बदलने की उम्मीद कम ही है क्योंकि केवल मंत्रियों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह होगी कि ये मंत्री काम कैसा करते हैं और उसका आंध्र की आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ता है.

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