गहरी नींद ले गई अमृतसर से पाकिस्तान

  • 26 अक्तूबर 2012

मुंबई में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर भावेश परमार का कहना है कि वो वर्ष 2007 में अनजाने से समझौता एक्सप्रेस में बैठकर पाकिस्तान चले गए थे.

उनका कहना है कि इस दौरान वे अवसाद के शिकार रहे और उन्हें पाकिस्तान पहुंचने के बाद पांच साल के लिए जेल में डाल दिया गया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मुंबई के विले पार्ले निवासी 32 वर्ष के भावेश परमार जीरो लाइन से भारत लौटे जहां उनकी मां हंसा कांति और मुबंई के विधायक कृष्णा हेगडे इंतजार कर रहे थे.

विधायक कृष्णा हेगड़े ने भावेश के स्वदेश लौटने के लिए भारत और पाकिस्तान की सरकारों के सामने इस मुद्दे को उठाया था.

दोषी

लाहौर की कोट लखपत जेल में पांच साल बिताने के बाद भावेश को इस्लामाबाद में स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक आपात यात्रा दस्तावेज़ दिया था ताकि वे स्वदेश लौट सकें.

भावेश का कहना था, "मुझे अनिवार्य यात्रा दस्तावेज़ न होने का दोषी पाते हुए विदेशी क़ानून के तहत कोट लखपत जेल में रखा गया था."

उन्होंने अपना अनुभव बयान करते हुए बताया, "मेरे पिता की मौत के बाद मैं अवसाद का शिकार हो गया था. मेरे पिता की कैंसर से मौत हुई थी. मुझे नहीं पता मैं कैसे अमृतसर पहुंचा और फिर पाकिस्तान के लिए समझौता एक्सप्रेस में सवार हो गया और पाकिस्तान पहुंच गया."

भावेश ने कहा, "मुझे नहीं पता कि मैंने कब समझौता एक्सप्रेस पकड़ी और मैं गहरी नींद में सो गया. मैं उस समय जगा जब पाकिस्तान के अधिकारियों ने मुझे जगाया. तब जाकर में भांप पाया कि मैं गलत ट्रैन में बैठ गया था जो पाकिस्तान जाती थी."

सूचना

वर्ष 2008 तक भावेश के परिवारवालों को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी लेकिन मुंबई की स्पेशल ब्रांच के उन्हें अधिसूचित किया कि वो पाकिस्तान की जेल में बंद हैं.

भावेश की मां हंसा ने अटारी सीमा पर पत्रकारों से कहा, "वर्ष 2007 में भावेश के गायब होने के बाद से ही परिवार के किसी सदस्य की उनसे बातचीत नहीं हो पाई थी. जब मुझे पता चला की उसकी जेल से रिहाई हो रही है तो मुझे तसल्ली हुई. लेकिन मुझे अभी भी उसकी मानसिक स्थिति की चिंता है. मैं उम्मीद करती हूं वो जल्दी ठीक हो जाएगा."

हंसा ने बताया कि उनका बेटा भावेश पिता की मृत्यु के बाद अवसाद में था और परेशान होकर घर छोड़ दिया था.उन्होंने बताया कि उन्होंने ये पांच साल बहुत मुश्किल से काटे हैं.

भावेश की मां हंसा और विधायक कृष्णा हेगड़े ने मिलकर भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के सामने ये मामला रखा था और उनकी स्वदेश वापसी के लिए गुहार लगाई थी.

भावेश पाकिस्तान की जेल की अवधि इस साल जुलाई में ही पूरी कर चुके हैं.

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