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वनस्थली विद्यापीठ से सैकड़ों छात्राओं ने किनारा किया

 मंगलवार, 23 अक्तूबर, 2012 को 14:46 IST तक के समाचार
एक बच्ची (फ़ाइल फ़ोटो)

वनस्थली के मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग की भी रिपार्ट आने वाली है

भारत में महिलाओं की तालीम का अलख जगाने वाले वनस्थली विद्यापीठ में छात्राओं के साथ सलूक और उनकी हिफाज़त के इंतज़ामों पर राजस्थान के महिला आयोग ने चिंता व्यक्त की है.

आयोग का कहना है कि पिछले तीन माह में दो सौ से ज़्यादा छात्राओं ने विद्यापीठ से किनारा कर लिया है.

पिछले महीने इस विद्यापीठ की कई हज़ार छात्राएँ वहां यौन उत्पीड़न का आरोप लगते हुए सड़क पर उतर आईं थीं.

हालांकि विद्यापीठ ने ऐसी किसी भी घटना से इनकार किया है. मगर आयोग की जांच कमेटी से कुछ लड़कियों ने उनके साथ छेड़छाड़ और दुर्व्यहार की शिकायत की है.

आयोग ने अपनी जांच में परिसर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लघन को भी गंभीरता से लिया है.

आयोग ने अपनी 380 पृष्ठों की रिपोर्ट राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सौंप दी है.

आयोग ने जांच का फैसला उस समय किया था जब पिछले माह इस विद्यापीठ ने हजारों छात्राएँ सड़कों पर निकलीं और एक छात्रा के साथ कथित रूप से बलात्कार की शिकायत की.

लेकिन अब तक कोई छात्रा सामने नहीं आई है.

आयोग की जाँच

"हमें ये गंभीर लगा कि आख़िर ऐसा क्या हुआ कि दो सौ से ज़्यादा लड़कियों ने इस विद्यापीठ से नाता तोड़ लिया. हमें इस मामले की तह तक जाना होगा और हम ऐसा करेंगे"

लाड कुमारी जैन, आयोग की अध्यक्ष

आयोग के चार सदस्यों ने विद्यापीठ का दौरा किया, छात्राओं से बात की, प्रबंधन को सुना और कोई 55 दस्तावेज़ों का अध्यन किया.

आयोग के सूत्रों के मुताबिक़ बारहवी की एक छात्रा ने उसके साथ छेड़छाड़ की शिकायत की है. कुछ और भी छात्राओं ने माहौल और दुर्व्यवहार की शिकायत की.

आयोग की अध्यक्ष लाड कुमारी जैन ने कहा, "ये गंभीर बात है कि जहाँ दस हजार बालिकाएँ पढ़ रही हों, वहाँ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यौन उत्पीड़न की शिकायत सुनने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी. आयोग ने कोई 25 लड़कियों के बयान लिए और पूरे हालात का जायज़ा लिया."

उनका कहना है, ''हमें ये गंभीर लगा कि आख़िर ऐसा क्या हुआ कि दो सौ से ज़्यादा लड़कियों ने इस विद्यापीठ से नाता तोड़ लिया. हमें इस मामले की तह तक जाना होगा और हम ऐसा करेंगे."

इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग की इस बारे रिपोर्ट आना अभी बाक़ी है.

चमकदार इतिहास

पिछले चार अक्टूबर को जब वनस्थली विद्यापीठ की छात्राएँ इस संस्था के ख़िलाफ़ नारे बुलंद करती हुईं सड़कों पर निकलीं तो लोग चौंक गए थे.

इसकी वजह ये है कि इस संस्था की बुनियाद तब रखी थी जब देश आज़ादी की लड़ाई लड़ रहा था.

उसी माहौल में विद्यापीठ ने पंचमुखी शिक्षा और खादी को अपनाया.

गाँधी और नेहरु दोनों ने इस संस्था के शैक्षिक मूल्यों की तारीफ़ की थी.

मगर अब जब उसी परिसर में प्रबंधन के ख़िलाफ़ के विरुद्ध नारों का शोर गूंजा तो आयोग ने जांच की पहल की.

राज्य महिला आयोग की इस रिपोर्ट पर सरकार क्या कार्रवाई करेगी, ये अभी स्पष्ट नहीं है.

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