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पवार पर गंभीर आरोप, केजरीवाल से सवाल

 गुरुवार, 18 अक्तूबर, 2012 को 19:02 IST तक के समाचार
वाईपी सिंह

वाईपी सिंह ने केजरीवाल पर राजनीति करने का आरोप लगाए हैं

पूर्व आईपीएस अधिकारी वाईपी सिंह ने गुरुवार आरोप लगाया है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने लवासा परियोजना के लिए ज़मीन अवैध रुप से दिलवाने में मदद की थी.

महाराष्ट्र में लवासा पूर्व नियोजित शहरी परियोजना है और वाईपी सिंह का आरोप है कि इस घोटाले से पवार के परिवार और उनके दोस्तों को फ़ायदा मिला है.

साथ ही उन्होंने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र के सिंचाई घोटाले और किसानों की ज़मीन हड़पने की नितिन गडकरी के मामले का ज़िक्र करते हुए अरविंद केजरीवाल ने बहुत सी जानकारियाँ छिपा लीं.

वाईपी सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि वे इस मामले में कुछ नहीं कहना चाहते क्योंकि ये मामला अदालत में है. लेकिन उन्होंने माना कि शुरुआती दौर में लवासा परियोजना से जुडी़ कंपनी में उनकी बेटी के शेयर थे.

दावा

"केजरीवाल ने गडकरी के मामले में क़ानूनी रुप से गलत संदर्भ निकाला और सनसनी बनाने की कोशिश की है. मुझे लगता है कि केजरीवाल ने सोचा होगा कि दिल्ली में चुनाव होने वाले हैं और यहां कांग्रेस और भाजपा मजबूत है. ऐसे में वो कांग्रेस को कलंकित कर चुके थे फिर उन्होंने भाजपा को किया ये सोचकर काफी कुछ वोट उनके पास आ सकेंगें नहीं तो वो गडकरी का छोटा मामला उछाल कर पहाड़ जैसा मामला कैसे छोड़ सकते थे"

वाईपी सिंह

वाईपी सिंह ने दावा किया कि इस घोटाले के बारे में इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्य अरविंद केजरीवाल को अस्सी फीसदी जानकारी थी लेकिन उन्होंने पूरे तथ्यों को इस संबंध में उजागर नहीं किया.

सिंह ने कहा कि वो भाजपा के अध्यक्ष नितिन गडकरी पर छोटा मामला उठा रहे है और शरद पवार पर इतना बड़ा मामला होने के बावजूद वो कुछ नहीं बोले.

उन्होंने कहा, ''केजरीवाल ने गडकरी के मामले में क़ानूनी रुप से गलत संदर्भ निकाला और सनसनी बनाने की कोशिश की है. मुझे लगता है कि केजरीवाल ने सोचा होगा कि दिल्ली में चुनाव होने वाले हैं और यहां कांग्रेस और भाजपा मजबूत है. ऐसे में वो कांग्रेस को कलंकित कर चुके थे फिर उन्होंने भाजपा को किया ये सोचकर काफी कुछ वोट उनके पास आ सकेंगें नहीं तो वो गडकरी का छोटा मामला उछाल कर पहाड़ जैसा मामला कैसे छोड़ सकते थे.''

अधिकारी का कहना था कि लवासा परियोजना की शुरुवात उस समय हुई थी जब शरद पवार राज्य के मुख्यमंत्री हुआ करते थे और इसके लिए अवैध रुप से ज़मीन को अधिग्रहित किया गया और उस पर काम शुरु किया गया था.

उन्होंने दावा किया कि 348 एकड़ ज़मीन को बिना नीलामी के अधिग्रहित किया गया जो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशो का उल्लंघन था.

उन्होंने आरोप लगाया है कि इसमें से 348 एकड़ ज़मीन पवार के भतीजे और तत्कालीन सिंचाई मंत्री अजित पवार, उनकी चचेरी बहन सुप्रिया सुले और उनके पति को लगभग मुफ्त दे दी गई.

उनका कहना था कि शरद पवार के केंद्रीय कृषि मंत्री होने के बावजूद महाराष्ट्र में ज़मीन अधिग्रहण से लेना-देना नहीं था उसके बावजूद उन्होंने अपने भतीजे अजित पवार से मिलकर लवासा शहरी परियोजना के लिए नियमों और निर्माण से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन किया.

पवार की सफाई

"ये क्योंकि उनके ग्रह ज़िले से जुड़ा मामला था इसलिए मुख्यमंत्री होने के नाते वो बैठक में शामिल थे और वो एक हिल स्टेशन बनाने में मदद करना चाहते थे.ये ज़मीन हिल नीति के तहत दी गई थी इसमें उनकी बेटी की भी हिस्सेदारी थी लेकिन बाद में वो शेयर बेच दिए गए थे.''"

शरद पवार

वाईपी सिंह का आरोप था कि इस सिलसिले में पवार ने महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों से लवासा कॉप्लेक्स के अतिथि गृह में बैठक भी की थी.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता और कृषि मंत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वो इस मामले मे कुछ नहीं बोलेंगे क्योंकि लवासा का मामला अभी अदालत में है.

उनका कहना था, ''ये क्योंकि उनके गृह ज़िले से जुड़ा मामला था इसलिए मुख्यमंत्री होने के नाते वो बैठक में शामिल थे और वो एक हिल स्टेशन बनाने में मदद करना चाहते थे. ये ज़मीन हिल नीति के तहत दी गई थी इसमें उनकी बेटी की भी हिस्सेदारी थी लेकिन बाद में वो शेयर बेच दिए गए थे.''

वाईपी सिंह ने दावा किया कि महाराष्ट्र में राजस्व विभाग के आईएएस अधिकारी रमेश कुमार ने उन्हें बताया था कि जो ज़मीन लवासा शहरी परियोजना के लिए ली गई थी वो सरकार ने बांध के निर्माण के लिए ली थी और इसका निर्माण महाराष्ट्र कृष्णा कॉर्पोरेशन को करना था.

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