सीएजी मुनीम नहीं, संवैधानिक संस्था: सुप्रीम कोर्ट

 सोमवार, 1 अक्तूबर, 2012 को 15:29 IST तक के समाचार
सुप्रीम  कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानी सीएजी कोई 'मुनीम' नहीं है, बल्कि वो एक संवैधानिक संस्था है जिसे अर्थव्यवस्था से जुड़े पहलुओं का मूल्यांकन करने का अधिकार है.

सुप्रीम कोर्ट ने ये बात एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कही, जिसमें कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ी सीएजी की रिपोर्ट और उसके आकंड़ों को चुनौती दी गई है.

अगस्त में आई पिछले महीने आई सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 25 निजी कंपनियों को 57 कोयला ब्लॉकों का मनमाने ढंग से आवंटन किया गया जिससे सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.

'संसद का काम'

वैसे सरकार सीएजी की रिपोर्ट पर अपनी आपत्ति जता चुकी है. लेकिन विपक्ष इसे लेकर सरकार पर बराबर तीखे वार कर रहा है.

सीएजी की इस रिपोर्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर जस्टिस आरएम लोढ़ा और जस्टिस आरए दवे की खंडपीठ ने कहा, “सीएजी कोई मुनीम नहीं है, बल्कि ये एक संवैधानिक संस्था है जो राजस्व आवंटन और अर्थव्यवस्था से जुड़े मामलों का हिसाब किताब कर सकती है.”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट को स्वीकार करना या खारिज करना संसद का काम है.

संविधान के विभिन्न प्रावधानों का हवाला देते हुए खंडपीठ ने कहा कि सीएजी एक संवैधानिक संस्था है जो अपनी रिपोर्ट संसद या राज्य विधानसभाओं के पटल पर रखता है, इसलिए उसकी रिपोर्ट पर उन्हें ही कोई कदम उठाने का हक है.

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