अल्टीमेटम के बाद क्या फ़ैसला लेंगी ममता?

  • 18 सितंबर 2012
तृणमूल कांग्रेस के संसदीय बोर्ड की आज बैठक हो रही है जिसमें सरकार के साथ संबंधों पर फैसला हो सकता है

खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति और डीजल मूल्य में बढ़ोत्तरी को लेकर केंद्र की यूपीए सरकार के घटक दलों और बाहर से समर्थन दे रहे सहयोगियों के बीच जुबानी जंग जारी है.

सबकी निगाहें मंगलवार दोपहर बाद खत्म हो रहे ममता बनर्जी के 72 घंटे के अल्टीमेटम पर टिकी हैं. इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई गई है जिसमें तय होना है कि पार्टी का अगला कदम क्या होगा.

वहीं दूसरी ओर सरकार ने ममता बनर्जी के अल्टीमेटम की अनदेखी करते हुए फिलहाल रिटेल एफडीआई और डीजल मूल्य में वृद्धि का फैसला वापस लेने से इनकार कर दिया है.

तो ममता बनर्जी ने एक बार फिर संकेत दिए हैं कि यूपीए सरकार ने उनकी बातें नहीं मानीं तो तृणमूल सरकार से अपने मंत्रियों को हटाने का फैसला लेने जैसा कदम उठा सकती है.

पार्टी सूत्रों की मानें तो मंगलवार को होने वाली संसदीय बोर्ड की बैठक में पार्टी कुछ न कुछ फैसला ले सकती है.

तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेता और केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री सुल्तान अहमद का कहना है कि पार्टी तीन विकल्पों पर विचार कर सकती है जिनमें समर्थन वापसी का विकल्प भी शामिल है, 'यूपीए सरकार से तृणमूल अपने मंत्रियों को हटा सकती है या यूपीए सरकार से समर्थन वापसी का फैसला किया जा सकता है. तीसरा विकल्प यह है कि तृणमूल के मंत्री अपने दफ्तर नहीं जाएं.'

वहीं राजनीतिक हलकों में ये भी चर्चा है कि ममता बनर्जी को ऐसे कोई कदम उठाने से रोकने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से कोशिशें तेज कर दी गई हैं.

इसके तहत हो सकता है कि आंशिक रूप से सरकार इन फैसलों में नरमी बरत दे. यानी सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या सरकार बढ़ा सकती है और डीजल के बढ़े दामों में एक-दो रुपये की कमी भी कर सकती है.

लेकिन ममता बनर्जी के अल्टीमेटम की मियाद खत्म होने वाली है और सरकार की ओर से लगातार उनकी अनदेखी के चलते इन कवायदों को भी बल मिल रहा है कि फिलहाल मनमोहन सिंह सरकार को ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल कांग्रेस पार्टी से कोई खतरा नहीं है.

असमंजस

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो खुद ममता बनर्जी फिलहाल यूपीए से रिश्ता नहीं तोड़ना चाहतीं क्योंकि पश्चिम बंगाल को मिलने वाले भारी-भरकम आर्थिक पैकेज पर बातचीत अंतिम दौर में है.

कांग्रेस पार्टी की ओर से भले ही ममता बनर्जी को मनाने की कोशिशें हो रही हों लेकिन यूपीए सरकार ने साफतौर पर कह दिया है कि वो सुधारों को लेकर किसी दबाव में नहीं झुकेगी.

सोमवार को वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इस बात को खुले तौर पर दोहराते हुए कहा कि आर्थिक सुधारों के बढ़े कदमों को पीछे नहीं धकेला जाएगा.

चिदंबरम ने हालांकि ये भी कहा कि सरकार अपने सहयोगियों को समझाने का पूरा प्रयास करेगी, लेकिन ये कहकर एक तरह से विरोध करने वाले सहयोगियों को चुनौती भी दे दी कि आने वाले दिनों में आर्थिक सुधारों के और भी कई फैसले लिए जाएंगे.

चिदंबरम ने ये भी दावा किया कि सरकार को कोई खतरा नहीं है.

बहरहाल इस बारे में तस्वीर तभी साफ हो सकती है जब 72 घंटे के अल्टीमेटम के बाद तृणमूल कांग्रेस इस बारे में कोई फैसला लेती है या फिर सरकार समझौते का संकेत देते हुए अपने फैसलों में कुछ नरमी लाती है, जिसका असर निश्चित रूप तृणमूल कांग्रेस के फैसलों पर होगा.