कारोबार 2000 करोड़ का, अस्पताल में दस्ताने नहीं

 शुक्रवार, 14 सितंबर, 2012 को 17:30 IST तक के समाचार
सिवाकासी

डॉक्टरों का कहना है कि सिवकासी अस्पताल में सुविधाओं की भारी कमी है

ये बात समझ के बाहर है कि करीब 2,000 करोड़ के पटाखों की वार्षिक बिक्री करने वाले सिवकासी के मुख्य सरकारी अस्पताल का बर्न्स वॉर्ड इतना उपेक्षित क्यों है, और यहाँ सुविधाएँ तो छोड़िए, मॉरफीन तक उपलब्ध नहीं है?

बर्न्स वार्ड यानि अस्पताल का वो हिस्सा जहाँ किसी दुर्घटना में जले हुए लोगों की इलाज के लिए रखा जाता है. जले हुए लोगों के दर्द को कम करने के लिए मॉरफीन दवाई दी जाती है. सिवकासी सरकारी अस्पताल के बर्न्स वॉर्ड को 2004 में खोला गया था.

सिवकासी सरकारी अस्पताल के मुताबिक कस्बे में हर साल करीब 8-12 बड़े धमाकों की घटनाएँ होती हैं जिसमें करीब 25-30 लोग मारे जाते हैं और करीब 50 घायल होते है.

फैक्ट्रियों में काम कर रहे ज्यादातर मजदूर चोट या जलने की शिकायत लेकर अस्पताल आते हैं लेकिन कभी-कभी हड़्डी टूटने की भी दर्दनाक घटनाएँ होती हैं.

सख्त जरूरत

"सरकार मॉर्फीन की आपूर्ति नहीं करती. हम उन लोगों को मार्फीन की बहुत छोटी सी खुराक उपलब्ध करवाते हैं जिन्हें इसकी सख्त जरूरत होती है."

डॉक्टर एम कथिरेसन

सिवकासी के बर्न्स वॉर्ड में सुविधाएँ इतनी नाकाफी हैं कि कई बार लोगों को घायल अवस्था में ही 60 किलोमीटर दूर मदुराई शहर जाना पड़ा है, और इस दौरान कुछ लोगों की मौत भी हो गई है.

बर्न्स वॉर्ड अस्पताल का एक छोटा सा हिस्सा है जहाँ छोटे-छोटे कमरों के साथ लगा एक पतला सा गलियारा है. अस्पताल देखकर साफ लगता है कि अगर कोई बड़ा हादसा हो जाए तो ये जगह बहुत छोटी पड़ेगी.

जब भी सिवकासी में कोई दुर्घटना होती है, तो यहाँ के बर्न्स वार्ड को आधुनिक मल्टीस्पेशेलटी अस्पताल बनाने पर चर्चा शुरू हो जाती है.

आखिरकार वर्षों बाद इसी साल 19 मार्च को राज्य सरकार की प्रधान सचिव गिरिजा वैद्यनाथन के लिखे गए आदेश में इस आधुनिक अस्पताल की योजना को हरी झंडी दे दी गई, लेकिन अस्पताल के अधिकारी फिर भी निराश हैं. उनका कहना है कि अस्पताल को अनुमोदित की गई सुविधाएँ भी नाकाफी है.

दस्ताने तक नहीं, मॉर्फीन कहाँ मिलेगी

अस्पताल ने डॉयरेक्टर ऑफ मेडिकल औऱ रुरल हेल्थ सर्विसेज के माध्यम से भेजे गए अपने अनुरोध पत्र में 36 नए पद शुरू करने के अलावा नई मशीनों की मांग की थी.

अस्पताल ने सरकार को लिखा था कि उसे नए पुरुष, महिला और बच्चों के वॉर्ड शुरू करने की जरूरत है. इस पर कुल तीन करोड़ का खर्च आना था, लेकिन सरकार ने मात्र 60 लाख 17 हजार रुपए ही अनुमोदित किए हैं जिससे अस्पताल अधिकारी निराश हैं.

अस्पताल ने 40 किलोवॉट जेनरेटर, ऑपरेशन थिएटर, फिजियोथेरपी वार्ड, पुरुष, महिला औऱ बच्चों के वॉर्डों की दरख्वास्त की थी, लेकिन ये सभी अनुरोध नामंजूर हो गए. साथ ही कुल 36 की जगह मात्र 12 पदों पर मोहर लगी.

अस्पताल के मुताबिक उसे हड्डियों के डॉक्टर, जनरल सर्जन, एनेस्थेसिस्ट, जूनियर डॉक्टर, जैसी लोग चाहिए.

अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एम कथिरेसन

डॉक्टर एम कथिरेसन अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं से बेहद नाराज हैं

अस्पताल को एंटीबायोग्राम टेस्टिंग सुविधा चाहिए ताकि ताकि अलग-अलग बैक्टीरिया को पहचाना जा सके, औऱ ये पता लगाया जा सके कि उस बैक्टीरिया से लड़ने के लिए किन एंटीबॉयोटिक्स की जरूरत होगी.

अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एम कथिरेसन कहते हैं, “अगर एंटीबायोग्राम आ जाएगा तो हम मरीजों को सही एंटीबायोटिक्स दे पाएँगे, नहीं तो हम अनुमान से ही एंटीबायोटिक्स देंगे.”

अस्पताल को एक प्लास्टिक सर्जन की भी जरूरत है ताकि चोट के निशान को ठीक किया जा सके. अस्पताल में दस्ताने तक की कमी है.

अस्पताल में मॉर्फीन भी नहीं है.

डॉक्टर एम कथिरेसन बताते हैं, “सरकार मॉर्फीन की आपूर्ति नहीं करती. हम उन लोगों को मार्फीन की बहुत छोटी सी खुराक उपलब्ध करवाते हैं जिन्हें इसकी सख्त जरूरत होती है. हमें मार्फीन पाने के लिए सरकार से विशेष अनुमति की जरूरत होती है. अगर हम विशेष अनुमति के लिए लिखेंगे तो हमसे बहुत सारे सवाल पूछे जाएँगे और आपको जरूरत का एक छोटा हिस्सा ही दिया जाएगा. अगर वो मल्टी स्पेशेलेटी अस्पताल बनाते हैं लेकिन मार्फीन नहीं देते तो ये अस्पताल बेकार है.”

दरअसल सरकार को आशंका है कि मार्फीन की आसान उपलब्धता से इसका नशे के लिए दुरुपयोग हो सकता है लेकिन डॉक्टर कथिरेसन कहते हैं कि मॉर्फीन की कमी से मरीजों को बेहद मुश्किल दर्द झेलना पड़ता है, औऱ कोशिश होनी चाहिए की मॉर्फीन के गलत इस्तेमाल को रोका जाए.

अलग अलग पुरुष औऱ महिला वॉर्डों की जरूरत पर एक अधिकारी ने बताया कि सिवकासी की ताजा दुर्घटना में अस्पताल को चार घंटों के भीतर 57 मामले मिले और बर्न्स वॉ़र्ड में सिर्फ 12 बिस्तर हैं.

समस्या से निपटने के लिए मरीजों को सर्जिकल वॉर्ड भेज दिया गया और नए मरीजों के लिए जगह बनाई गई.

लेकिन सिवकासी सरकारी अस्पताल में चिंता ये है कि सरकारी आदेश तो आ गया लेकिन आधुनिक अस्पताल पर अभी भी काम शुरू नहीं हुआ है.

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