गुटखे पर रोक, पान मसाला बे-रोकटोक

 गुरुवार, 13 सितंबर, 2012 को 20:27 IST तक के समाचार

दिल्ली में गुरुवार से गुटखा और उससे जुड़े उत्पादों पर रोक लगा दी गई है. ये रोक कितनी कारगर है इसे जांचने के लिए हम नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे.

जब हमने रेलवे स्टेशन के पास मौजूद पानवाले से गुटखा मांगा तो उन्होंने साफ़ कह दिया कि गुटखा नहीं हैं. जबकि पान मसाले को ना सिर्फ दुकान पर सजा रखा था, उसकी बिक्री भी बे-रोकटोक जारी थी.

गुटखा क्यों नहीं है तो इसका जवाब देते हुए पान के ठेले वाले ने बोला, “पीछे से ही नहीं आ रहा है वैसे भी 2 लाख रुपये जुर्माना कौन भरेगा.”

"रोक तो गुटके पर लगी हैं, पान मसाले पर नहीं"

दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पान मासाल बेचने वाला

हमने कहा कि ये पान मसाला क्यों उपलब्ध है, तो उन्होंने कहा, “रोक तो गुटखे पर लगी है, पान मसाले पर नहीं है.”

इसी तरह मैं नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास की पांच छह पान और तंबाकू बेचने वाली दुकानों पर गया और हर जगह यही हाल पाया.

गुटखा, पान मसाला में क्या फर्क?

इसके बाद मै जब क्नॉट प्लेस पहुंचा वहां ज़रुर एक दुकान पर सिर्फ पान मिलता दिखाई दिया. इसके बाद हम कस्तूरबा गांधी मार्ग पर पहुंचे तो वहां भी पान मसाले की बिक्री बे-रोकटोक जारी थी.

जिस तरह से सब गुटखे को छोड़ पान मसाला बेच रहे थे, हमारे मन में सवाल आया कि पान मासले और गुटखे में क्या फर्क है.

हमने मनीष से बात की जो काफी लंबे समय से गुटखा खा रहे हैं, फ़र्क पूछने पर मनीष ने कहा, “गुटखे और पान मसाले में कुछ खास फ़र्क नहीं हैं दोनों ही चीज़े एक बराबर है. बस ये है कि पान मसाला मंहगा है और उसमें जो सुपारी या और चीज़े इस्तेमाल की जाती है वो बेहतर होती है जबकि गुटखे में सस्ता सामान इस्तेमाल होता है.”

"ये तो वो ही बात हैं कि देसी दारू पिओगे तो 5 साल में मर जाओगे और अंग्रेज़ी दारू पिओगे तो 10 साल में मरोगे. गुटका देसी दारू है और पान मसाल अंग्रेज़ी दारु."

मनीष कुमार, गुटखा खाने वाले

मनीष कहते हैं, “ये तो वो ही बात है कि देसी दारू पिओगे तो पाँच साल में मर जाओगे और अंग्रेज़ी दारू पिओगे तो 10 साल में मरोगे. गुटखा देसी दारू है और पान मसाल अंग्रेज़ी दारु.”

दिल्ली सरकार के आदेश के अनुसार दिल्ली में गुरुवार से गुटखा, चबाने वाला तंबाकू और पान मसाला जैसे उत्पाद बनाने, बेचने, रखने और प्रदर्शित करने पर रोक लगा दी गई है.

इस रोक का उल्लंघन करने वाले को छह महीने तक की कैद और दो लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है.

दिल्ली के वित्त विभाग का कहना हैं कि इस रोक से दिल्ली सरकार को 40 करोड़ के राजस्व का नुक्सान होगा.

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