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कार्टूनिस्ट की गिरफ़्तारी अपराध : काटजू

 सोमवार, 10 सितंबर, 2012 को 12:53 IST तक के समाचार
असीम त्रिवेदी

असीम त्रिवेदी के समर्थन में बहुत सारे लोग सामने आ रहें हैं.

प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया यानि पीसीआई के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू ने कथित 'देशद्रोह' के मामले में कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की गिरफ़्तारी का विरोध किया है.

भारतीय संविधान को नीचा दिखाने और अपनी वेबसाइट पर कथित तौर पर 'देशद्रोही' सामग्री छापने के अभियोग में गिरफ़्तार किए गए कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को 16 सितंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.

लेकिन इस बीच समाज के हर हिस्से से लोग असीम के समर्थन में आगे आने लगे हैं.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष जस्टिस(सेवानिवृत्त) मार्कण्डेय काटजू ने असीम का बचाव करते हुए कहा कि असीम त्रिवेदी ने कोई ग़लत काम नहीं किया है.

एक बयान जारी कर जस्टिस काटजू ने कहा, ''मेरे विचार से कार्टूनिस्‍ट ने कुछ भी ग़लत या अवैध नहीं किया है. लोकतंत्र में बहुत-सी बातें कही जाती हैं. कुछ सही होती हैं, बाकी ग़लत. जिसने कोई अपराध नहीं किया हो, उसे गिरफ़्तार करना भी एक अपराध है.''

नेता सबक़ लें

सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल को याद करते हुए जस्टिस काटजू ने कहा, ''मैं अक्सर कहता था कि लोग मुझे कोर्ट या कोर्ट के बाहर बेवक़ूफ़ या कुटिल कह सकते हैं, लेकिन मैं कभी भी अदालत की अवमानना का मामला शुरू करने का क़दम नहीं उठाऊंगा, क्योंकि आरोप सही होने पर मैं इसी लायक़ हूं और ग़लत होने पर मैं उन्हें नज़रअंदाज़ कर दूंगा.''

"मेरे विचार से कार्टूनिस्‍ट ने कुछ भी ग़लत या अवैध नहीं किया है. लोकतंत्र में बहुत सी बातें कहीं जाती हैं. कुछ सही होती हैं, बाकी ग़लत. जिसने कोई अपराध नहीं किया हो, उसे गिरफ़्तार करना भी एक अपराध है."

जस्टिस काटजू

उन्होंने कहा कि नेताओं को भी यह सबक़ सीख लेनी चाहिए. मुंबई के जाने-माने वकील माजिद मेमन ने भी असीम की गिरफ़्तारी को विरोध करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित क़रार दिया.

राजद्रोह के मामले को लेकर उनके ख़िलाफ़ दायर एफ़आईआर के आधार पर उन्हें शनिवार रात आठ बजे के क़रीब मुंबई में बांद्रा कुर्ला इलाक़े से गिरफ़्तार किया गया था.

बाद में बांद्रा की एक अदालत ने उन्हें 16 सितंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया.

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के सदस्य अमित कतरनयी ने त्रिवेदी के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की थी कि उन्होंने पिछले साल यानि कि 2011 में अन्ना हजारे की रैली के दौरान बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में ऐसे पर्चे लगाए थे जिसमें भारतीय संविधान का मज़ाक उड़ाया जा रहा था.

त्रिवेदी के ख़िलाफ़ ये आरोप भी लगाया गया था कि उन्होंने अपनी वेबसाइट पर आपत्तिजनक सामग्री डाली है.

असीम राजनीतिक विषयों पर कार्टून बनाते हैं और इंटरनेट पर सेंसरशिप के ख़िलाफ़ सक्रिय रहे हैं. अदालत ने पिछले महीने त्रिवेदी के ख़िलाफ़ एक ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया था.

गौरतलब है कि त्रिवेदी को कार्टूनिस्ट बनाने की कला से जुड़ा एक अवॉर्ड हासिल करने के लिए बुधवार को सीरिया के लिए रवाना होना था.

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