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कैसा है नरेंद्र मोदी का मीडिया 'मैनेजमेंट'?

 शनिवार, 1 सितंबर, 2012 को 12:00 IST तक के समाचार
नरेंद्र मोदी

मोदी पर वॉल स्ट्रीट जर्नल के लेख का शीर्षक था ‘धीमें होते भारत का उभरता सितारा'

गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि वो राज्य की एक खूबसूरत तस्वीर पेश करके लोगों को बेवकूफ बना रही है और 2002 के गुजरात दंगों की खौफनाक तस्वीर को छिपा रही है.

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आलोचक कहते हैं कि ये नरेंद्र मोदी की मीडिया मशीनरी का ही कमाल है कि दुनिया की बड़ी-बड़ी पत्रिकाएँ राज्य की कथित आर्थिक प्रगति का गुणगान कर रही हैं.

मोदी पर वॉल स्ट्रीट जर्नल के लेख का शीर्षक था ‘धीमे होते भारत का उभरता सितारा.’ 'टाइम' मैगज़ीन ने नरेंद्र मोदी को अपनी मुख्य कहानी बनाया और कहा 'मोदी मतलब व्यापार'.

आलोचक इसे मोदी के मीडिया प्रबंधन का कमाल बताते हैं लेकिन मोदी के समर्थकों के अनुसार गुजरात की सफलताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकारा जा रहा है और ये लेख इसका सबूत हैं.

अहमदाबाद में हिंदुस्तान टाइम्स से जुड़े महेश लांगा के मुताबिक मोदी की मुख्य मीडिया टीम में के कैलाशनाथन, वी थीरुप्पुगाझ, भरत लाल, जगदीश ठक्कर, संजय भवसार, काकूभाई और मौलिक भगत प्रमुख नाम हैं.

ट्विटर पर मोदी को करीब नौ लाख लोग ‘फॉलो’ करते हैं यानि उनकी हर ट्वीट पर नज़र रखते हैं, और उनके फेसबुक पन्ने पर करीब सात लाख ‘लाइक्स’ हैं. मोदी की अपनी वेबसाइट और ब्लॉग है. दो पब्लिक रिलेशंस कंपनियाँ, 'म्युचुअल पीआर' और 'ऐप्को वर्ल्डवाइड', राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में गुजरात की कवरेज का ख्याल रखती हैं.

ऐप्को ने गुजरात की 'आकृति मीडिया' से साझेदारी भी की है. आकृति के पंकज मुधोलकर भी मोदी के मीडिया अभियान का मुख्य हिस्सा हैं.

ऐप्को एक अमरीकी कंपनी है.

'झूठ नहीं'

अहो भाग्य!

"आजतक मैं नरेंद्र मोदी से नहीं मिली हूँ. मुझे अभी तक ये सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ कि मैं सीएम साहब से मुलाकात कर पाऊँ"

कविता दत्ता, म्युचुअल पीआर

कविता दत्ता म्युचुअल पीआर में मैनेजिंग पार्टनर हैं और उनकी 18 लोगों की टीम पिछले तीन सालों से भारतीय मीडिया में गुजरात की कवरेज का ध्यान रखती है.

कविता कहती हैं कि उनकी कोशिश होती है कि वो गुजरात सरकार की सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारियाँ लोगों तक पहुँचाएँ.

लेकिन वो इस आरोप पर क्या कहेंगी कि गुजरात के उज्जवल विकास की तस्वीर झूठ से भरी है?

कविता थोड़ा हँसकर जवाब देती हैं, “हम सभी एक ही बिरादरी के लोग हैं. कुछ थोड़ा नाराज़, कुछ थोड़ा निष्पक्ष. ये तो खेल का हिस्सा है.”

वो एक अंग्रेजी कहावत दोहराती हैं कि आप सभी लोगों को हमेशा बेवकूफ नहीं बना सकते.

गुजरात पर सकारात्मक कहानी लिखने पर पत्रकारों पर भी पक्षपातपूर्ण होने के आरोप लगे हैं.

जब कविता से ये पूछा गया कि क्या वो नरेंद्र मोदी से मिली हैं, तो कविता कहती हैं, “आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि आजतक मैं नरेंद्र मोदी से नहीं मिली हूँ. मुझे अभी तक ये सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ कि मैं सीएम साहब से मुलाकात कर पाऊँ.”

कविता आगे कहती हैं कि अधिकांश लोग गुजरात के बारे में कई बातें लिखते या कहते है, लेकिन “जब आप गुजरात आएँगे, तब आपको बदलाव के बारे में पता चलेगा. बाकी सब हवा में बातें हैं, वो होती हैं और होती रहेंगी.”

गुजरात सरकार के साथ काम करने के अपने अनुभव के बारे में कविता कहती हैं, “किसी भी गुजराती अफसर से जानकारी मिलने में कोई समस्या नहीं होती. हम कुछ औऱ सरकारों के लिए भी काम करते हैं, हमें इतना अच्छा काम दूसरी सरकारों के साथ महसूस नहीं होता.”

नए स्वरूप

नरेंद्र मोदी और ओसामू सुजूकी

मीडिया के एक हिस्से में गुजरात को ऐसे राज्य के तौर पर पेश किया जाता है जहाँ व्यापार करना आसान है

उधर ऐप्को वर्ल्डवाइड के किसी भी व्यक्ति ने इस लेख पर कुछ भी कहने से मना कर दिया.

मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक ऐप्को वर्ल्डवाइड को मुख्य रूप से विदेशों में, खासकर अमरीका में, नरेंद्र मोदी की छवि को सुधारने के लिए रखा गया, लेकिन ऐप्को ने आधिकारिक तौर पर हमेशा कहा है कि मोदी सरकार से उसका लेना-देना गुजरात में निवेश बढ़ाने के लिए किए जाने वाले आयोजन ‘वाइब्रेंट गुजरात’ और राज्य के लिए व्यापार बढ़ाने तक ही है.

गौरतलब है कि अमरीका नरेंद्र मोदी को वीज़ा देने से मना कर चुका है.

ऐप्को ने ‘वाइब्रेंट गुजरात’ के पिछले दो आयोजनों का काम संभाला है.

ऐप्को वर्ल्डवाइड में अमरीका के राजनीतिक, वरिष्ठ पत्रकार, राजनयिक शामिल हैं. ऐप्को की वेबसाइट के अनुसार कंपनी के दिल्ली और मुंबई के प्रमुख सदस्यों की सूची में अमरीका में भारत के राजदूत रह चुके टिमथी रोमर भी शामिल हैं.

ऐप्को के वरिष्ठ निदेशक ने अखबार मेल टुडे को एक साक्षात्कार में बताया था कि ऐप्को का काम है दुनिया भर में गुजरात का एक फायदे वाली जगह के तौर पर प्रचार करना.

कुछ लोगों के मुताबिक मोदी मीडिया के नए स्वरूपों को बहुत बेहतर तरीके से समझते हैं.

छवि बनाने वाली 'पब्लिक रिलेशंस कंपनी परफेक्ट रिलेशन' के दिलीप चेरियन कहते हैं, “उनके चारों ओर एक ऐसी टीम है जो सूचना प्रौद्योगिकी को समझती है. उनके टीम सदस्य उनकी सिद्धांतो का अनुकरण करते हैं. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ये है कि नरेंद्र मोदी कुछ भी कहते हैं वो साफ होता है और उसमें कुछ भी अस्पष्ट नहीं होता.”

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