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'पूरे साल भर बाद मिठाई खाई है मैंने'

 मंगलवार, 28 अगस्त, 2012 को 16:06 IST तक के समाचार

नोएडा एक्सटेंशन के लिए मास्टर प्लान को मंजूरी दिए जाने की खबर हम सबके लिए दीवाली के तोहफे की तरह है.

पिछले तीन दिन से बहुत खुश हूँ. सिर्फ मैं ही नही वो सारे लोग खुश हैं जिन्होंने नोएडा एक्सटेंशन में फ्लैट बुक कराए थे .

आपको बता नही सकता कि पिछले साल भर से किस तरह की जिंदगी हम जी रहे थे. आँखों से नींद तो लगभग गायब ही हो चुकी थी.

रात-रात भर मैं और मेरी पत्नी सिर्फ ये ही सोचा करते थे कि अब आगे क्या होगा. पर अब पिछले दो दिनों से फिर से सुकून की नींद आ रही है.

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स्याह रातें

जब अदालत ने गाँवों के भूमि अधिग्रहण को रद्द कर दिया था , तो उस आदेश के बाद तो माडिया ने इस मामले पर काफी रिपोर्टिंग की, गाँव वालों के आंदोलन होते रहे , लेकिन चिंता तब ज्यादा बढ़ गई जब कुछ महीनों बाद उन्होंने नोएड़ा एक्सटेंशन की खबरें देना ही बंद कर दिया. न तो बिल्डर की ओर से, न गाँव से और न ही अदालत की ओर से कोई समाचार आ रहा था.

"मुझे याद है कि पिछले साल 19 जुलाई को एक ऐसा फ़ैसला आया था जिसने मेरे पूरे परिवार की नींद उड़ाकर रख दी. फ़ैसले के बाद मैं और मेरी पत्नी दोनो फफक कर रो पड़े थे. क्योंकि हमने अपनी पूरी ज़िंदगी की कमाई को इसमें लगा दी थी और मैं बैक लोन समेत 15 लाख दे चुका था .उस समय लगा कि सारे सपने टूट गए. "

कुछ पता ही नही लग रहा था कि एक साल लगेगा, दो साल लगेगा या फिर होगा ही नही.

पिछले साल भर के दौरान हमारे साथ जो कुछ भी हुआ उसे बयाँ कर पाना कतई आसान नही है .

मुझे याद है कि पिछले साल 19 जुलाई को एक ऐसा फ़ैसला आया था जिसने मेरे पूरे परिवार की नींद उड़ाकर रख दी.

आप जानते ही हैं एक के बाद एक आते अदालती फैसलों ने शाहबेरी, पटवारी समेत तमाम गाँवों के अधिग्रहण को रद्द कर दिया था. इन फैसलों के बाद नोएडा एक्सटेंशन में घर की तलाश में लाखों निवेशकों के भविष्य पर भी तलवार लटक गई थी.

फ़ैसले के बाद मैं और मेरी पत्नी दोनो फफक कर रो पड़े थे. क्योंकि हमने अपनी पूरी ज़िंदगी की कमाई को इसमें लगा दी थी और मैं बैक लोन समेत 15 लाख दे चुका था .उस समय लगा कि सारे सपने टूट गए.

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दोहरी मार

एक तरफ़ तो मेरी सारी जमा पूँजी निकल गई, दूसरी तरफ़ मई से लोन की क़िस्त कटने लगी. साल भर से मैं ईएमआई चुकाता रहा क्योंकि अगर नही चुकाता तो मैं डिफ़ॉल्टर लिस्ट में आता. और सिविल का केस बन जाता.

हम किस्त दे जरुर रहे थे लेकिन लगता था कि हमारा सारा पैसा नाले में जा रहा है.

लेकिन जब 28 जून को टेक्निकल कमेटी की रिपोर्ट आई तो इसे मंजूरी मिली.उस दिन मैं एनसीआर बोर्ड के दफ्तर में ही था, उस समय लगा कि समस्या का कुछ समाधान होने ही वाला है.

अब जब पूरी तरह से अनुमति मिल गई है तो संतोष हुआ है और अब फिर से लगने लगा है कि मेरा मकान देर से ही सही पर मिलेगा जरुर.

आप विश्वास नही करेंगे कि साल भर से मैंने मिठाई नही आई थी. लेकिन इस फैसले के बाद न सिर्फ मैंने मिठाई खाई, बल्कि बाँटी भी.

(राम लाल केशरी की आपबीती बीबीसी संवाददाता मोहन लाल शर्मा से की गई बातचीत पर आधारित है.)

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