सोशल मीडिया पर नियंत्रण के लिए कितना तैयार है भारत?

 सोमवार, 20 अगस्त, 2012 को 15:26 IST तक के समाचार
फेसबुक

बैंगलोर की घटना के बाद मांग उठ रही है कि सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों को नियंत्रित किया जाए

"सोशल मीडिया वेबसाइटों से मिल रही चुनौतियों से निपटने के लिए भारत तैयार नहीं है.

भारत की पुलिस और सरकार के लिए साइबर सिक्योरिटी अभी तक प्राथमिकता का विषय नहीं है इसलिए साइबर सिक्योरिटी पर ना तो ध्यान दिया जाता है, ना ही इसे लेकर कोई राष्ट्रीय नीति है.

क्लिक करें सोशल मीडिया पर प्रतिबंध ग़लत होगा

भारत के पास बजट तो है लेकिन इसे कैसे खर्च किया जाए इसका अधिकारियों को पता नहीं है. भारत साइबर खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं.

पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर जो अफ़वाह उड़ी उसने साबित कर दिया है कि जब आक्रमण हुआ तो भारत की साइबर सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार लोग सो रहे थे.

हम सोशल मीडिया पर नियंत्रण की बात नहीं कर रहे हैं. हम इन वेबसाइटों से कह रहे हैं कि अगर आपके नेटवर्क पर कोई ऐसी जानकारी आती है जो भारत की सुरक्षा, प्रभुता और अखंडता के विरुद्ध है या फिर उसे नकारात्मक तौर पर प्रभावित करती है तो आप या तो उसे हटा दें या फिर उसे बेकार कर दें.

ऐसा करना इन वेबसाइटों का कानूनी दायित्व है.

अगर आप वर्ष 2000 के टेक्नॉलजी कानून पर नजर डालें तो पता चलेगा कि ये कानून इन वेवसाइटों पर कानूनी जिम्मेदारी डालते है कि वो अपनी सही सोच का इस्तेमाल करें.

समस्या ये है कि भारत सरकार इन कानूनों को प्रभावशाली तौर पर कार्यान्वित नहीं करती, इसलिए हर व्यक्ति धौंस जमाकर चला जाता है.

हर वेबसाइट कहती है कि हम भारत के बाहर हैं, हम आपके कानून के अंतर्गत बाध्य नहीं हैं, लिहाजा आपको जो करना है आप कीजिए, हमें जो ठीक लगेगा, हम वो करेंगे.

चीन से सहमत

लेट-लतीफ?

"ट्विटर और फेसबुक के लिए भारत एक महत्वपूर्ण बाज़ार है. वो कभी भी नहीं चाहेंगे कि ये बाजार कभी ख़त्म हो या फिर लुप्त हो जाए. लिहाजा जो भारत ने ब्लैकबेरी के साथ किया है अगर उसे इन वेबसाइटों के साथ भी किया जाए तो भारतीय प्रभुता और अखंडता सुरक्षित रह पाएगी"

पवन दुग्गल

मुझे लगता है कि ये तरीका बिल्कुल गलत है. कुछ हद तक मैं चीन की कार्यनीति से सहमत हूँ.

चीन ने इन कंपनियों को स्पष्ट बोल रखा है कि अगर आपको चीन में आना है तो आपको स्थानीय कानूनों का अनुसरण करना पड़ेगा.

भारत को भी यही करना होगा. जब तक भारत ऐसा कड़ा रवैया इख्तियार नहीं करेगा और सोशल मीडिया के खिलाफ़ कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक इस परिस्थिति में बदलाव नहीं आएगा.

ट्विटर और फेसबुक के लिए भारत एक महत्वपूर्ण बाज़ार है. वो कभी भी नहीं चाहेंगे कि ये बाजार कभी ख़त्म हो या फिर लुप्त हो जाए. लिहाजा जो भारत ने ब्लैकबेरी के साथ किया है अगर उसे इन वेबसाइटों के साथ भी किया जाए तो भारतीय प्रभुता और अखंडता सुरक्षित रह पाएगी.

पहले तो सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, उसके बाद उसने सरकार और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों को हिदायत दी.

सरकार को बोलने के अलावा कार्रवाई करनी चाहिए थी. जब तक सरकार कानूनी प्रावधानों को कड़ा नहीं करेगी, लोग उनका लगातार उल्लंघन करते रहेंगे.

स्वतंत्र भारत के इतिहास में ये पहला साइबर अटैक है.

यह 26/11 के मुंबई हमले से एकदम अलग है. यहाँ किसी व्यक्ति या कुछ व्यक्तियों ने बिना कोई गोली चलाए, बिना कुछ किए भारत के एक भाग में दहशत फैलाने की कोशिश की और दहशत फैली भी.

अगर आप फोरेंसिक विश्लेषणों पर निगाह डालें, तो गतिविधियाँ 13 जुलाई को ही शुरू हो गई थीं. इसका असर हमारे स्वतंत्रता दिवस के आसपास नजर आया. भड़काउ जानकारियाँ तो सोशल मीडिया वेबसाइटों पर पहले से थीं.

ये सरकार की नाकामी है, ये एजेंसियों की नाकामी है. ये सोशल मीडिया वेबसाइटों की भी नाकामी है. सरकार को सोशल मीडिया वेबसाइटों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ेगी.

साइबर आर्मी की ज़रुरत

ट्विटर

सरकार ने कई वेबसाइटों के खिलाफ कार्रवाई की है

मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि सरकार इन वेबसाइटों को बंद करें, लेकिन सरकार को इन्हें जरूर विवश करना चाहिए कि अगर इन्हें भारत में रहना है तो उन्हें भारतीय कानूनों का पालन करना पड़ेगा.

अफ़वाह के मामले में अगर ये वेबसाइटें जल्दी कार्रवाई करतीं तो बहुत नुकसान होने से बच जाता.

भारत में एक साइबर आर्मी के गठन की आवश्यकता है. अगला युद्ध जब भी होगा वो साइबर स्पेस में होगा.

उपभोक्ताओं को भी खुद को जागरुक होना होगा. लोगों को समझना होगा कि उनके हाथ में जो मोबाइल है जिसके ज़रिए वो सोशल मी़डिया वेबसाइट पर जाते हैं, वो एक बम है और इसे भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है.

ये दायित्व हर व्यक्ति की है कि उसे अगर कोई गलत जानकारी दिखती है तो वो खुद कदम उठाए.

वो उस वेबसाइट को कदम उठाने के लिए लिखें, या फिर किसी नजदीक के थाने को सूचित करें. वो कंप्यूटर नेटवर्क रिस्पांस टीम को भी लिख सकते हैं. अगर आपके साथी किसी गलत हरकत में शामिल हैं तो उन्हें रोकें."

(बीबीसी संवाददाता विनीत खरे से बातचीत पर आधारित)

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