BBC navigation

असम पहुँचे पूर्वोत्तर के डरे-सहमे लोग

 शुक्रवार, 17 अगस्त, 2012 को 15:07 IST तक के समाचार
उत्तर-पूर्व के लोग

असम आने वाले लोगों का कहना है कि उनके साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई

बंगलौर और हैदराबाद से बृहस्पतिवार शाम तक करीब 1,000 लोग असम पहुंच चुके हैं.

ये लोग चेन्नई-गुवाहाटी साप्ताहिक एक्सप्रेस और यशवंतपुर-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस से असम पहुंचे हैं.

बंगलौर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाली पल्लवी बोरा ने स्टेशन पर बताया कि उनके साथ किसी तरह की कोई घटना नहीं घटी लेकिन उनके दोस्तों ने उन्हें बताया था कि 20 तारीख के बाद कोई भी घटना हो सकती है इसलिए निकल चलना ही बेहतर होगा.

यह पूछे जाने पर कि क्या आपने किसी ऐसे व्यक्ति को देखा या उसके बारे में सुना जिसके साथ कोई अप्रिय घटना हुई हो, पल्लवी ने इससे इनकार किया.

बंगलौर में ही एक प्रतिष्ठान में सिक्योरिटी गार्ड का काम करने वाले पूर्वी असम के जुनमणि डेका का कहना है कि 'थोड़े दिन घर पर परिवार के साथ रहूंगा और जब सब कुछ शांत हो जाएगा तो वापस चले जाएंगे.'

डेका के साथ उनके आधे दर्जन दोस्त भी आनन-फानन में बंगलौर से लौट आए हैं.

पलायन पर राजनीति

"जिन राज्यों में असम के लोगों पर हमला होगा, असम में काम करने वाली वहां की कंपनियों को यहां से खदेड़ दिया जाएगा"

अल्फा का एक धड़ा

जुनमणि को भी न तो सीधे कोई धमकी मिली और न ही कोई एसएमएस. उनका कहना है कि उन्होंने धमकी वाले एसएमएस के बारे में सुना भर है. किन लोगों ने धमकी दी होगी, ये पूछे जाने पर जुनमणि ने पहले इस तरह से देखा कि उन्हें और कुछ नहीं मालूम, फिर दबे स्वर में कहा - मुसलमानों ने.

गुरुवार को सुबह गुवाहाटी स्टेशन पहुंचने वाले लोगों में से बहुत से पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड के थे. ये लोग रात की बसों से अपने गृह राज्यों के लिए रवाना हो गए.

इधर सरकार के साथ वार्ता कर रहे अल्फा के एक गुट के नेताओं ने एक प्रेस वार्ता का आयोजन करके कहा है कि जिन राज्यों में असम के लोगों पर हमला होगा, असम में काम करने वाली वहां की कंपनियों को यहां से खदेड़ दिया जाएगा.

अल्फा गुट के नेता प्रबाल नेओग और जितेन दत्त ने तिनसुकिया में कहा कि निचले असम की हिंसा को देश में गलत ढंग से पेश किया जा रहा है और उसे सांप्रदायिक रूप दिया जा रहा है.

इधर राज्य के प्रभावशाली छात्र संगठन आसू ने कहा है कि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र से असमिया मूल के लोगों को भगाया जा रहा है और सरकार उचित कदम नहीं उठा रही है.

आसू नेता समुज्ज्वल भट्टाचार्य ने राज्य से सांसद बदरुद्दीन अजमल पर राज्य की घटनाओं को गलत रूप में राज्य के बाहर पेश करने का आरोप लगाया, हालांकि अजमल ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है.

अजमल ने भी अफवाहों के कारण राज्य के बाहर से लोगों के पलायन पर चिंता व्यक्त की है.

क्या राज्य के बाहर से हो रहे पलायन का राज्य की कानून और व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल असर पड़ सकता है? इस सवाल के जवाब में राज्य के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने कहा कि इसकी कोई संभावना नहीं है क्योंकि जो लोग बाहर से भागकर आए हैं उनके साथ कोई वारदात नहीं हुई है. ये लोग एहतियात के तौर पर भागकर आए हैं.

अत्याचार नहीं

असम

असम के कुछ इलाकों से अभी भी हिंसा की खबरें आ रही हैं

मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार बाहर से आने वाले लोग, जैसा कि अमूमन होता है, अपने साथ अत्याचार की कहानियां लेकर नहीं आ रहे हैं.

इधर मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने अपने दो मंत्रियों को हैदराबाद और दो को बेंगलुरु के लिए रवाना कर दिया है, जो वहाँ की सरकारों के साथ संपर्क कर स्थिति का जायजा लेंगे और असम के प्रवासियों में भरोसा पैदा करने का प्रयास करेंगे.

असम सरकार ने भी अपना हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।

दक्षिणी भारत के राज्यों से असमिया मूल के लोगों के पलायन की जड़ में जो बीटीएडी की हिंसा है वहां हालांकि इन दो दिनों में कोई बड़ी घटना नहीं हुई लेकिन तनाव अभी भी बरकरार है.

बृहस्पतिवार को कोकराझार जिले में आटो रिक्शा से अपने गांव लौट रहे एक परिवार पर तेजाब फेंकने की एक घटना सामने आई है जिसमें दस लोग जख्मी हो गए.

इधर गुवाहाटी से करीब 60 किलोमीटर दूर रंगिया शहर में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित कर रहे लोगों का एक समूह हिंसा पर उतर आया जिसके बाद वहां अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू जारी कर दिया गया.

ये लोग शहर के एक व्यक्ति के बीटीएडी इलाके में जाने के बाद लापता हो जाने की घटना का विरोध कर रहे थे.

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.