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सिर्फ नेपाल निवासी ही नेपाली नहीं

 शनिवार, 11 अगस्त, 2012 को 00:34 IST तक के समाचार
भारत में नेपाली भाषी लोग

नेपाली के आदि कवि भानु भक्त आचार्य की जयंती पर हुए कार्यक्रम में उनकी कविताओं का पाठ किया गया.

भाषा और संस्कृति के लिहाज से अपार विविधता समेटे भारत में नेपाली बोलने वाले भारतीयों की संख्या लगभग एक करोड़ है. नेपाली भाषी से इन भारतीयों का लगाव बराबर बना हुआ है.

वे नियमित तौर पर भारत के अलग अलग हिस्सों में नेपाली साहित्य और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन कराते रहते हैं.

इसी कड़ी में पिछले दिनों नेपाल के पहले कवि यानी आदि कवि भानु भक्त आचार्य की जयंती पर दिल्ली में एक कार्यक्रम हुआ.

भानु ने अपने साहित्य से नेपाली भाषा को लोकप्रिय बनाया. साथ ही उन्होंने रामायण जैसे हिंदू महाकाव्य का नेपाली भाषा में अनुवाद भी किया.

नई दिल्ली में भानु की जयंती पर हुए कार्यक्रम में न सिर्फ उनकी कविताओं का पाठ किया गया बल्कि उनके साहित्य पर चर्चा भी हुई.

नेपाली भाषी भारतीय समुदाय का मानना है कि इस भाषा को सिर्फ भौगोलिक और राजनीतिक पहचान तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए.

"नेपाली शब्द के दायरे में वे सभी लोग आने चाहिए जो नेपाली भाषा बोलते हैं और नेपाली संस्कृति को मानते हैं. ऐसा व्यक्ति नेपाल या भारत या अमरीका, कहीं का भी नागरिक हो सकता है."

बिष्णु बहादुर गुरुंग, नेपाली सम्मेलन के पूर्व महासचिव

भारत में रहने वाले नेपाली भाषी लोगों के सबसे बड़े संगठनों में से एक नेपाली सम्मेलन के पूर्व महासचिव बिष्णु बहादुर गुरुंग का कहना है, “नेपाली शब्द के दायरे में वे सभी लोग आने चाहिए जो नेपाली भाषा बोलते हैं और नेपाली संस्कृति को मानते हैं. ऐसा व्यक्ति नेपाल या भारत या अमरीका, कहीं का भी नागरिक हो सकता है.”

मान्यता

नेपाली भी उन भाषाओं में शामिल है जिन्हें भारतीय संविधान में मान्यता दी गई है. वो संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में से एक है.

गुरुंग कहते हैं, “इस भाषा को भारतीय संविधान में मान्यता दिए जाने का मतलब है कि यहां इस भाषा का समृद्ध साहित्यिक अस्तित्व मौजूद है.”

नेपाली साहित्य खास कर दार्जीलिंग और सिक्किम समेत उत्तर भारत में फल फूल रहा है.

गुरुंग बताते हैं, “नेपाली में बहुत सारे प्रकाशन हैं. सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग खुद नेपाली भाषा के एक जाने माने लेखक हैं. वो निर्माण प्रकाशन भी चलाते हैं जो नेपाली साहित्य प्रकाशित करता है.”

नेपाल में विरोध

नेपाल इन दिनों भाषा और जातीयता के आधार पर कई तरह के मतभेदों का शिकार है.

हर साल भारत की साहित्य अकादमी जिन कई भारतीय भाषाओं में अमूल्य साहित्यिक योगदान देने वाले लेखकों को सम्मानित करती है, उनमें नेपाली भी शामिल है.

ऑल इंडिया रेडियो दिन में तीन बार नेपाली में एक-एक घंटे का कार्यक्रम प्रसारित करता है. गुरुंग बताते हैं कि इन कार्यक्रमों में नेपाली भाषा में समाचार, गीत और नाटक प्रसारित होते हैं. गुरुंग भी इन कार्यक्रम के निर्माण से जुड़े हुए हैं.

चिंता

हाल के समय में, खुद नेपाल में भाषा और जातीयता को लेकर तनाव रहा है. नेपाल में बहुत से समुदायों की शिकायत है कि उनकी अपनी स्थानीय मातृ भाषा पर नेपाली भाषा का दबदबा कायम होता जा रहा है.

नेपाल में जारी इन हालात पर भारत में रहने वाला नेपाली भाषी समुदाय भी चिंतित है.

गुरुंग कहते हैं, “ये भाषा पहले ही मान्यता पा चुकी है. हालांकि कुछ समुदायों का इसके दबदबे से चिंतित होना स्वाभाविक है, लेकिन इसकी वजह से एकता को तोड़ना समझदारी नहीं होगी.”

"नेपाली भाषा, साहित्य और संस्कृति दुनिया भर में रहने वाले नेपाली लोगों को जोड़ते हैं. इसे बचाने और विकसित करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए."

सानु लामा, नेपाली लेखक

नेपाली भाषी समुदाय महसूस करता है कि नेपाली साहित्य और साहित्य के संरक्षण और विकास के लिए कदम उठाए जाने चाहिए.

सिक्किम के लेखक और पद्म श्री पा चुके सानु लामा कहते हैं, “नेपाली भाषा, साहित्य और संस्कृति दुनिया भर में रहने वाले नेपाली लोगों को जोड़ते हैं. इसे बचाने और विकसित करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. ”

नेपाली समुदाय

भारत में दो तरह के नेपाली भाषी समुदाय हैं. पहले वे जो भारतीय नागरिक हैं और देश के उत्तरी और पूर्वोत्तर इलाके में रहते हैं. इनकी संख्या एक करोड़ के आसपास बताई जाती है.

दूसरा समुदाय उन लोगों का है जो नेपाली नागरिक हैं और काम की तलाश में भारत आ गए हैं. ऐसे लोगों की संख्या 20 लाख से 50 लाख के आसपास बताई जाती है.

ये दोनों समुदाय भौगोलिक और राजनीतिक पहचान के लिहाज से बंटे हुए हैं लेकिन उनकी भाषा और संस्कृति उन्हें एक बनाती है.

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