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यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास फिर किसान आंदोलन

 शुक्रवार, 10 अगस्त, 2012 को 19:10 IST तक के समाचार
उत्तर प्रदेश के किसान (फाइल)

यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास के किसान पहले भी इस मुद्दे पर आंदोलन करते रहे हैं

यमुना एक्सप्रेस वे पर आवागमन शुरू ही हुआ था कि आगरा से ग्रेटर नोएडा के बीच रहने वाले और खेती करने वाले किसानों ने अधिग्रहीत जमीन वापस पाने के लिए सड़कों के किनारे आंदोलन शुरु कर दिया है.

ये किसान प्रस्तावित नए नगरों और बाजारों के लिए अधिग्रहीत जमीन वापस पाना चाहते हैं.

आगरा में किसान संघर्ष समिति के नेता मनोज शर्मा के अनुसार, "शुक्रवार को इस जमीन पर हल और ट्रैक्टर चलाकर उन्होंने प्रशासन को संदेश दे दिया है कि वे जमीन पर अपना कब्जा छोड़ने के तैयार नहीं हैं."

किसानों का कहना है कि वे अपनी उपजाऊ जमीन पर खेती करना चाहते हैं.

उदघाटन के समय भी प्रदर्शन

"शुक्रवार को इस जमीन पर हल और ट्रैक्टर चलाकर उन्होंने प्रशासन को संदेश दे दिया है कि वे जमीन पर अपना कब्जा छोड़ने के तैयार नहीं हैं...अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव किसानों से अपना वादा भूलकर कॉरपोरेट समाजवाद ला रहें हैं"

किसान संघर्ष समिति के मनोज शर्मा

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जब गुरुवार को लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए इस सड़क का औपचारिक उदघाटन कर रहें थे, तब आगरा की एत्मादपुर तहसील के करीब 300 किसान यमुना एक्सप्रेस वे पर काले झंडों के साथ प्रदर्शन कर रहें थे.

इससे पहले की मायावती सरकार ने आगरा में किसानों की 510 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर उसे जेपी इन्फ्राटेक ग्रुप को विशटाउन नाम से एक नया शहर बनाने के लिए दिया था.

इसी तरह चार अन्य स्थानों पर भी किसानों की जमीनें जेपी ग्रुप को दी गई हैं. किसानों का कहना है कि एक तो मुआवजा कम है दूसरे वे अपनी पुश्तैनी जमीन नहीं देना चाहते.

अलीगढ़, मथुरा और गौतमबुद्धनगर के किसानों ने भी सांकेतिक प्रदर्शन करके यह मांग दोहराई कि उनकी जमीनें वापस की जाएँ.

पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के नेताओं ने किसानों को न्याय दिलाने और उनकी जमीनें वापस दिलाने का वादा किया था.

अखिलेश यादव से नाराज

किसान नेता मनोज शर्मा का कहना है, "अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव किसानों से अपना वादा भूलकर कॉरपोरेट समाजवाद ला रहें हैं.”

शर्मा का कहना है कि सड़क खोलने से पहले उत्तर प्रदेश सरकार को किसानों से बातकर उनकी समस्या हल करनी चाहिए.

माना जाता है कि जेपी ग्रुप सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी से भी करीब है, इसीलिए उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बावजूद उनकी योजनाओं पर प्रतिकूल असर नही पड़ा है.

दिल्ली से आगरा के लिए बनी इस नई, भुगतान आधारित और तेज रफ़्तार सड़क से विदेशी पर्यटकों के लिए ताजमहल देखना आसान हो जाएगा.

लेकिन अनेक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस सड़क के इस्तेमाल के लिए जितना अधिक शुल्क रखा गया है, उसके कारण बहुत से स्थानीय लोग पुरानी सड़क से ही आगरा जाना बेहतर समझेंगे.

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