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राजकपूर की फ़िल्मों जैसी लव स्टोरी

 गुरुवार, 9 अगस्त, 2012 को 11:58 IST तक के समाचार
जावेद

मुंबईया फिल्म जैसी है क्रिस्टिना और जावेद की प्रेम कहानी

यह प्रेम कहानी बहुत ज्यादा मुंबइया है. लेकिन सच्ची है. सड़कों पर आवारगी भरा बचपन गंवा चुके जावेद और दुनिया के सबसे संपन्न देश की क्रिस्टीना का मिलना और फिर हमेशा के लिए एक हो जाना एक सुकून देने वाली लव स्टोरी है.

पहले प्रेम और फिर शादी के बाद अब दोनों 'हैपी एंडिंग' की कोशिशों में लगे हैं.

क्रिस्टीना मैरी कामिएका अटलांटा से फोन पर बताती हैं, “हम चीजों को संभालने की कोशिश कर रहे हैं. जावेद आज भी वही जावेद है. वह आज भी एक भारतीय ही है.”

अटलांटा के अपार्टमेंट के बेडरूम में बगल में सोए जावेद का नींद में अंग्रेजी में कुछ बुदबुदाना क्रिस्टीना के लिए पति की उनके और करीब आने की कोशिश की तरह है.

वह खुश है कि जावेद कोशिश कर रहे हैं लेकिन इस सब के बीच जावेद भूले नहीं है कि आखिर उनका वजूद क्या है.

जावेद ने कहा, “मैं अपनी भाषा नहीं भूल सकता क्योंकि मैं अब जहाँ हूँ, इसलिए मैं अंग्रेजी को अपनाने की कोशिश कर रहा हूँ.”

" हम चीजों को संभालने की कोशिश कर रहे हैं. जावेद आज भी वही जावेद है. वह आज भी एक भारतीय ही है"

क्रिस्टिना

जावेद और क्रिस्टीना की प्रेमी से पति-पत्नि बनने की यात्रा राजकपूर की ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों के काफी करीब है.

बुरा बचपन

जावेद आठ साल के थे जब उन्होंने दबे कदमों से बिहार के मुंगेर जिले के छोटे से गांव कल्याणपुर को छोड़ा था. घर से भाग कर पहले मुंबई और फिर दिल्ली पहुँचे. पुरानी दिल्ली में शीला और गोलचा सिनेमा थियेटरों पर बॉलीवुड की फिल्में देखते-देखते कब नशे और जुए की लत जावेद के जीवन का हिस्सा हो गई, उन्हें पता ही नहीं लगा.

एक दिन सलाम बालक ट्रस्ट ने जावेद को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से बचाया. यहीं रहते हुए 2006 में उनकी मुलाकात क्रिस्टीना से हुई. नामी फिल्म निर्माता मीरा नायर द्वारा बनाए गए ट्रस्ट ने दिल्ली शहर का टूर आयोजित किया था. जावेद क्रिस्टीना के गाइड थे.

बाकी की कहानी प्रेम और फिर एक शादी में बदल गई.

दोनों की शादी को करीब दो साल हो चुके हैं. जावेद फार्मेसी के कोर्स में प्रवेश लेने की कोशिश के अलावा अपनी अंग्रेजी ठीक करने में लगे हैं.

जावेद

बाकी की उम्र साथ गुजारने का इरादा

अंग्रेजी के कारण जावेद को दिक्कतें हैं लेकिन ऐसे मौकों पर क्रिस्टीना हमेशा उनकी बगल में खड़ी नजर आती हैं. इसमें जावेद के एकाएक खामोश होने या कोई बात समझ न आने पर क्रिस्टीना का अनुवाद से समझाने की कोशिश भी करना शामिल है.

क्रिस्टीना बताती हैं, “मैं नहीं चाहती कि वह मेरे परिवार से अलग नजर आए. कई बार जावेद अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं. इस पर गर्मागर्म बहस भी होती है. उदहारण के लिए गर्भपात ऐसा मुद्दा है.”

सड़क से उठ कर एक अमरीकी लड़की से प्रेम और फिर शादी सलाम बालक ट्रस्ट से जुड़े लोगों के लिए आज बाकियों को सुनाने लायक कहानी है.

ट्रस्ट में काम करने वाले एके तिवारी बताते हैं, “जावेद खुश रहने वाला बच्चा था. वह अपने घर नहीं जाना चाहता था. उसने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए किया और 2004 में समाज सेवा का काम शुरू कर दिया. इस दौरान उसकी मुलाकात क्रिस्टीना से हुई.”

कहानी सड़क की

" मैं अपनी भाषा नहीं भूल सकता लेकिन क्योंकि मैं अब जहां हूं, इसलिए मैं अंग्रेजी का अपनाने की कोशिश कर रहा हूं"

जावेद

जावेद की इस कहानी की शुरुआत पहाड़गज की चांदीवाली गली से शुरु हुई. वह और उनके साथ रेलवे स्टेशन से बचाए गए शेखर ट्रस्ट के साथ पर्यटकों को सड़कों पर जिंदगी बिता रहे बच्चों के बारे में बताने के लिए गाइड का काम करते थे. इस दौरान वह पर्यटकों को अपनी खुद की भी कहानी बताते थे.

2006 में ब्रिटिश कार्यकर्ता जॉन थॉमसन एक दल को लेकर दिल्ली लेकर आए थे. जावेद की तरह क्रिस्टीना की जिंदगी से भी प्यार छोटी उम्र में ही अलविदा कह चुका था. माता-पिता के तलाक के कारण क्रिस्टीना ने बचपन में ही टूटा घर देख लिया था.

जावेद ने कहा, “क्रिस्टीना मेरी कहानी सुन कर दंग रह गईं क्योंकि उन्होंने अमरीका में मेरी जैसी कहानी कभी नहीं सुनी थी.”

क्रिस्टीना जावेद की मुस्कुराहट की कायल थी. जावेद जब ट्रस्ट में बच्चों के साथ होते तो उनकी आंखों की चमक खूब भाती थी क्रिस्टीना को.

एक मेल से मेल

"मैं बताना चाहती हूं कि मेरे अंदर आपको लेकर भावनाएं बहुत मजबूत हैं. मुझे पूरी दुनिया में आप जैसा शख्स नहीं मिला"

क्रिस्टीना की मेल

घर लौटने के एक साल बाद क्रिस्टीना ने जावेद को ई-मेल लिखी. यह मेल जावेद को उनके लिए क्रिस्टीना के धड़कते दिल का एहसास करवाने के लिए काफी थी.

क्रिस्टीना ने लिखा, “यह कुछ ऐसा है कि मुझे लगा कि जो आपको जानना चाहिए. मै आपसे दूर हूँ, इसलिए चाहूंगी कि आप इस मेल को पढ़ें. मैं बताना चाहती हूं कि मेरे अंदर आपको लेकर भावनाएं बहुत मजबूत हैं. मुझे पूरी दुनिया में आप जैसा शख्स नहीं मिला. ”

जावेद के लिए वह मेल दिल धड़का देने वाली थी, इसलिए उन्होंने इसे न जाने कितनी बार पढ़ा. यकीनन छँटे हुए बालों और उम्दा मुस्कान के कारण उन्हें क्रिस्टीना याद थी.

अपनी हैसियत और हालात का कई बार आकलन करने के बाद जावेद ने जवाब भेजा, “आप मेरा सब कुछ हैं.” शायद जावेद क्रिस्टीना का दिल नहीं तोड़ना चाहते थे.

इसके बाद जावेद के साथ समय बिताने के लिए क्रिस्टीना तीन साल में नौ बार भारत आईं. फिर एक दिन दोनों ने गांव में जाकर शादी कर ली. हाथों पर मेंहदी माथे पर बिंदी और कढ़ाई वाली साड़ी पहने क्रिस्टीना उस दिन बहुत खूबसूरत लग रही थी.

क्रिस्टीना के पिता डेल्टा एयरलाइंस में पायलट हैं. वह भी जावेद से मिलने दो बार भारत आए.

क्रिस्टीना और जावेद ने शादी के बाद सोचा कि एक बार अमरीका में किस्मत आजमाएंगे. नाकाम रहे तो भारत लौट आएंगे.

क्रिस्टीना ने कहा, “सब कुछ सही हुआ. हमारी प्रेम कहानी सनक भरी है. कई लोग कहते हैं कि हमें इस पर किताब लिखनी चाहिए.”

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