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अस्सी फीसद हिस्सों में बिजली बहाल:शिंदे

 सोमवार, 30 जुलाई, 2012 को 08:07 IST तक के समाचार
बिजली

रविवार की रात लगभग दो बजे से ही उत्तर भारत अंधरे में डूब गया. एक फाइल तस्वीर

उत्तरी ग्रिड में खराबी के चलते उत्तर भारत के कई इलाकों में रविवार देर रात ठप हुई बिजली की आपूर्ति की काफी हद तक बहाल हो गई है. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने दावा किया है कि उत्तरी भारत के सभी राज्यों में करीब अस्सी प्रतिशत बिजली की आपूर्ति दोबारा बहाल कर दी गई है.

बीबीसी के साथ खास बातचीत में उन्होंने कहा, "इसी तरह का बिजली संकट साल 2001 में भी हुआ था, लेकिन तब इसे ठीक करने में करीब 18 घंटे लग गए थे. लेकिन इस बार इस समस्या को महज 4-5 घंटे में सुलझा लिया गया."

"करीब ढाई बजे रात को ये खराबी आई और सुबह आठ बजे तक सभी मेट्रो और रेल समेत सभी आवश्यक सेवाएं बहाल कर ली गईं. उत्तरी भारत के राज्यों में अस्सी प्रतिशत बिजली आपूर्ति फिर से बहाल कर दी गई है"

सुशील कुमार शिंदे, ऊर्जा मंत्री, भारत सरकार

उन्होंने बताया, "करीब ढाई बजे रात को ये खराबी आई और सुबह आठ बजे तक सभी मेट्रो और रेल समेत सभी आवश्यक सेवाएं बहाल कर ली गईं. उत्तरी भारत के राज्यों में अस्सी प्रतिशत बिजली आपूर्ति फिर से बहाल कर दी गई है"

उत्तरी ग्रिड में खराबी के चलते दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में बिजली की आपूर्ति प्रभावित हुई.

इससे पहले एक संवाददाता सम्मेलन में सुशील कुमार शिंदे ने कहा, ''इसके कारणों का पता लगाने के लिए तीन सदस्यों की कमेटी गठित की गई है.''

उन्होंने ये भी कहा कि कई राज्यों ने अपने हिस्से से अधिक बिजली ली, जिसकी वजह से फ्रिक्वेंसी बढ़ गई.

ट्रेनें प्रभावित

बिजली आपूर्ति ठप होने की वजह से कई ट्रेनें प्रभावित हुई. कई ट्रेनों को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा था.

स्टेशनों पर लोग परेशान दिखे. नई दिल्ली स्टेशन पर पांच-छह घंटे की देरी से ट्रेनें आ रही थीं. ट्रेनों से उतरने वाले यात्रियों के चेहरे पर थकान देखी जा सकती थी. इस दौरान यात्रियों को कई तरह की दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा.

जम्मू तवी ट्रेन से आ रहे यात्री प्रमेंद्र कुमार ने बीबीसी को बताया, "मैं जम्मू तवी से नई दिल्ली आ रहा था. रात में तीन बजे के करीब ट्रेन पूरी तरह से बंद हो गई थी. सुबह साढ़े चार बजे इसे नई दिल्ली पहुंचना था और आई है सवा ग्यारह बजे. काफी देर तक तो पता ही नहीं चला कि क्या हुआ. क्योंकि जहां रुकी थी वहां कुछ भी नहीं था, कोई कुछ बताने वाला भी नहीं था. पांच छह घंटे बहुत परेशानी हुई."

"मैं राजधानी से आ रहा हूं. पांच घंटे से ज्यादा लेट थी. देरी के बारे में बताया गया लेकिन काफी देर से. ये अच्छा था कि एसी चल रहा था इसलिए बहुत दिक्कत नहीं हुई. लेकिन छह-सात घंटे तक पानी-चाय कुछ भी नहीं मिला और लोग परेशान थे. पानीपत के बाद जब ट्रेन चली भी तो बहुत धीरे-धीरे चली."

डीके राजदान, यात्री

जम्मू राजधानी से आ रहे एक अन्य यात्री डीके राजदान ने बीबीसी को बताया, "मैं राजधानी से आ रहा हूं. पांच घंटे से ज्यादा लेट थी. देरी के बारे में बताया गया लेकिन काफी देर से. ये अच्छा था कि एसी चल रहा था इसलिए बहुत दिक्कत नहीं हुई. लेकिन छह-सात घंटे तक पानी-चाय कुछ भी नहीं मिला और लोग परेशान थे. पानीपत के बाद जब ट्रेन चली भी तो बहुत धीरे-धीरे चली."

मेट्रो का हाल

इसके अलावा राजधानी दिल्ली में मेट्रो सेवा प्रभावित हुई. सुबह से ही मेट्रो स्टेशनों पर लोग परेशान दिखे. मेट्रो ट्रेनें न चलने की वजह से लोग अपने दफ्तरों पर समय से नहीं पहुंच पाए.

मेट्रो में आमतौर पर जहां तक पहुंचने में 35 मिनट लगते हैं वहां आज करीब एक घंटा लग गया.

लोग इस इंतजार में थे कि शायद जल्दी ही सप्लाई दोबारा से शुरु हो जाएगी और वे अपने काम पर जा सकेंगे.

सुबह आठ या नौ बजे से मेट्रो का चलना ही शुरू हुआ, जबकि आम दिनों में मेट्रो का परिचालन सुबह छह बजे से ही शुरू हो जाताह है.

सुबह 11 बजे के बाद मेट्रो का परिचालन काफी कुछ ठीक हो गया.

रविवार की रात लगभग दो बजे से ही उत्तर भारत अंधरे में डूब गया.

इससे पहले नॉर्दन ग्रिड के अधिकारियों ने कहा था कि सप्लाई किस वजह से बंद हुई है इसके कारणों का पता लगाया जा रहा है और इसे फिर से चालू करने के प्रयास जारी हैं.

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