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प्रणब मुखर्जी के लिए 'लकी' 13 नंबर

 रविवार, 22 जुलाई, 2012 को 16:35 IST तक के समाचार

अगर प्रणब मुखर्जी के जीवन पर नज़र डालें, तो पाएंगे कि उनके लिए 13 अंक काफ़ी हद तक शुभ साबित हुआ है.

बहुत से लोग 13 नंबर को अशुभ मानते हैं. वे मानते हैं कि ये अंक दुर्भाग्य का प्रतीक है और वे इससे डरते हैं.

लेकिन भारत के नए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी उन लोगों में शामिल नहीं हैं.

भारतीय मीडिया उनके नामांकन के समय से कह रहा है कि राष्ट्रपति भवन के नए निवासी के लिए 13 अंक लंबे समय से 'शुभ' है.

हाल ही में इंडियन एक्प्रेस अख़बार को दिए एक इंटरव्यू में प्रणब मुखर्जी ने कहा था, "मैं अंधविश्वास में यकीन नहीं करता."

हालांकि एक तरह के विरोधाभास में उन्होंने ये भी कहा कि "13 एक शुभ अंक है. इसका मतलब पवित्र होता है. 13 अंक भगवान होता है."

तो इन चर्चाओं की आखिर वजह क्या है? किस तरह से 13 अंक प्रणब मुखर्जी के लिए शुभ है?

नंबर 13 का कमाल

प्रणब मुखर्जी की आधिकारिक जीवनियों और अख़बारों में छपे लेखों के मुताबिक उनकी शादी 13 जुलाई 1957 को हुई थी.

कैबिनट में शामिल होने के बाद, जुलाई 1996 से वे नई दिल्ली के तालकटोरा मार्ग स्थित 13 नंबर के बंगले में रह रहे हैं.

हालांकि अपने ओहदे के हिसाब से प्रणब मुखर्जी इससे बढ़िया और बेहतर बंगले के हक़दार हैं, लेकिन उन्होंने इसे छोड़ने से इनकार कर दिया.

संसद भवन में प्रणब मुखर्जी के कमरे का नंबर 13 है और कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रपति पद के लिए उनके नाम की घोषणा 13 जून को की गई थी.

राष्ट्रपति का पद ग्रहण करने वाले प्रणब मुखर्जी 12वें व्यक्ति हैं. हालांकि वे देश के 13वें राष्ट्रपति हैं लेकिन राजेंद्र प्रसाद के दो बार पद पर रहने से वे राष्ट्रपति बनने वाले 12वें व्यक्ति हैं.

"अंकशास्त्र या टैरोट में 13 शुभ अंक नहीं माना जाता. ये एक आध्यात्मिक अंक नहीं है और सिर्फ़ कुछ ही लोगों के लिए ही शुभ हो सकता है."

संजय जुमानी, अंकशास्त्री

प्रणब मुखर्जी की पत्नी सुर्वा मुखर्जी ने हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार को बताया था, "हिंदू शास्त्रों में असल में 13 अंक का मतलब त्रयोदशी है जोकि हिंदू तिथि के अनुसार शुभ दिन माना जाता है. अगर आप उस दिन कुछ करते हैं तो उसके अच्छे और सकारात्मक नतीजे होते हैं."

सुर्वा मुखर्जी की इस बात से अमरीका का कोलगेट विश्वविद्यालय भी सहमत लगता है.

यूनिवर्सटी में फ्राइडे द थर्टीन्थ यानी जब भी शुक्रवार को 13 तारीख पड़ती है, उस दिन को कोलगेट दिवस के रूप में मनाया जाता है.

इसकी वजह ये है कि इस यूनिवर्सिटी को 13 लोगों ने शुरु किया था, हर व्यक्ति ने इसके लिए 13 डॉलर दिए थे और 13 प्रार्थनाएं की थीं.

वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपे लेख के मुताबिक भारतीय राजनीति और व्यापार में अंधविश्वास और धार्मिक संकेतों के आधार पर काम करना आम बात है.

शुभ या अशुभ?

बहुत लोग 13 अंक को अशुभ मानते हैं.

प्रचार अभियानों की शुरुआत शुभ दिन की जाती है, बड़े फैसलों की घोषणा सही मुहुर्त पर की जाती है और चुनावों से पहले नेता धार्मिक स्थलों में दान देते हैं और धार्मिक नेताओं से आशीर्वाद लेते हैं.

दुनिया की कई इमारतों की ही तरह मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में भी 13वीं मंज़िल नहीं है.

वर्ष 2003 में ब्रिटेन की हर्टफोर्डशायर यूनिवर्सिटी में रिचर्ड वाइसमैन के एक अध्ययन में पाया गया कि शोध में हिस्सा लेने वाले तीन-चौथाई से ज़्यादा लोग थोड़ा बहुत और आधे से कम लोग कुछ हद तक या फिर बहुत ज़्यादा अंधविश्वासी थे.

अध्ययन में ये भी सामने आया कि 25 प्रतिशत लोगों को 13 नंबर से डर लगता था.

मुंबई में रहने वाले जाने-माने अंकशास्त्री संजय जुमानी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया, "अंकशास्त्र या टैरोट में 13 शुभ अंक नहीं माना जाता. ये एक आध्यात्मिक अंक नहीं है और सिर्फ़ कुछ ही लोगों के लिए ही शुभ हो सकता है."

बहरहाल, सब लोगों के लिए न सही, लेकिन लगता तो यही है कि प्रणब मुखर्जी का 13 नंबर से संयोगवश ही सही बड़ा गहरा नाता है.

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