"न्याय मिल जाता तो आंसू नहीं बहाने पड़ते..."

 सोमवार, 16 जुलाई, 2012 को 04:18 IST तक के समाचार
नईमुद्दीन अंसारी

बिहार के बथानी टोला जनसंहार में नईमुद्दीन अंसारी के परिवार के छह सदस्य मारे गए थे.


"आज हम न्याय के लिए प्रैस कॉन्फ़्रेंस में जुटे हुए हैं. यदि हमें न्याय मिल जाता तो हम आज अपने बाल-बच्चों के साथ रहते......आंसू नहीं बहाना पड़ता..."

ये शब्द हैं नईमुद्दीन अंसारी के जिनके परिवार के छह सदस्य 16 साल पहले हुए बथानी टोला जनसंहार में मारे गए थे और वे अब तक न्याय मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं.

जुलाई 1996 में भोजपुर ज़िले के बथानी टोला गाँव में इक्कीस लोगों की हत्या कर दी गई थी. मारे गए लोगों में ग़रीब दलित और मुस्लिम परिवारों की औरतें और बच्चे भी शामिल थे.

उस समय 'रणवीर सेना' नाम के प्रतिबंधित संगठन से जुड़े उच्च जाति-वर्ग के लोगों को इस जनसंहार में शामिल माना गया था.

न्याय का इंतज़ार

मामले के 23 अभियुक्तों को वर्ष 2010 में निचली अदालत ने सज़ा सुनाई गई थी लेकिन इस साल अप्रैल में बिहार हाईकोर्ट ने इस फैसले को पूरी तरह पलटते हुए सारे अभियुक्तों को बरी कर दिया. इस फैसले के खिलाफ़ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है.

रविवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें इस मामले के दोषियों को सज़ा दिलाने की मांग की गई.

कई जाने-माने न्यायविद, बुद्धिजीवी, सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और साथ ही यहां मौजूद थे अब तक इंसाफ़ का इंतज़ार कर रहे नईमुद्दीन अंसारी और किशुन चौधरी भी.

ये दोंनो तो इस हमले में बच गए लेकिन अंसारी की ही तरह किशुन चौधरी के परिवार के तीन सदस्य भी हमलावरों की बर्बरता का शिकार हुए थे. किशुन चौधरी ने इस जनसंहार के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज कराया था और अब उन्होंने हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में भी अपील दायर की है.

'सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद'

इस हादसे को याद करते हुए आज भी नईमुद्दीन अंसारी की आंखे भर आती हैं. मारे गए उनके परिवारजनों में सबसे छोटी बच्ची की उम्र मात्र तीन महीना थी.

"आज हमारा सारा घर खुशहाली में है. लेकिन जब पीछे मुड़कर जाते हैं तो आंख से आंसू गिरते हैं और सारी घटना फिर से याद आ जाती हैं."

नईमुद्दीन अंसारी, बथानीटोला जनसंहार के पीड़ित

बीबीसी से बात करते हुए नईमुद्दीन ने बताया कि घटना वाले दिन गांव में पुलिस भी मौजूद थी. उन्होंने कहा, "दोपहर दो बजे रणवीर सेना के 50-60 लोगों ने गांव पर हमला बोला. उस समय गांव में पुलिस की पिकेट थी लेकिन हमले के वक्त कोई पुलिसवाला बाहर नहीं आया और रणवीर सेना लगभग तीन घंटे तक तांडव मचाती रही."

नईमुद्दीन आगे कहते हैं कि हाईकोर्ट द्वारा सभी अभियुक्तों को बरी किए जाने के बाद वे और बाकी पीड़ित अब दहशत में जी रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि रणवीर सेना के लोग किसी समय भी उन्हें मार सकते हैं.

लेकिन फिर भी उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है. वे कहते हैं, "हमें सुप्रीम कोर्ट से पूरी उम्मीद है कि न्याय ज़रूर होगा और निष्पक्ष होगा. हमें न्याय ज़रूर मिलेगा."

आज नईमुद्दीन इस दर्दनाक हादसे को पीछे छोड़कर अपने बाकी परिवार के साथ आगे बढ़ गए हैं. वे कहते हैं, "आज हमारा सारा घर खुशहाली में है. लेकिन जब पीछे मुड़कर जाते हैं तो आंख से आंसू गिरते हैं और सारी घटना फिर से याद आ जाती हैं."

राज्य सरकार और किशुन चौधरी की अपील की पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है.

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