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सबसे बड़ा किला निकला कांग्रेस के हाथ से

 शुक्रवार, 15 जून, 2012 को 14:57 IST तक के समाचार

उपचुनाव में जीत के बाद जगनमोहन रेड्डी की तस्वीर के सामने जश्न मनाते उनके समर्थक

कांग्रेस का सब से बड़ा किला समझे जाने वाला राज्य आंध्र प्रदेश उसके हाथ से निकल गया है.

लोकसभा की एक और विधानसभा की 18 सीटों के लिए हुए उपचुनाव में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने कांग्रेस का सूपड़ा पूरी तरह से साफ़ कर दिया है.

इन उप चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस और उसके अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी के पक्ष में ऐसी लहर चली है कि कांग्रेस को मुश्किल से दो विधान सभा सीटें मिल सकी हैं जबकि 15 विधान सभा सीटों और एक लोक सभा सीट पर जगन की पार्टी का कब्ज़ा हो गया है.

तेलंगाना क्षेत्र की एकमात्र सीट पर तेलंगाना राष्ट्र समिति और वाईएसआर कांग्रेस के बीच टक्कर का मुकबला चल रहा है.

कांग्रेस को इस बात से भी बड़ा धक्का लगा है की नौ विधान सभा क्षेत्रों में उसे तीसरा स्थान मिला है और दो स्थानों पर उस की ज़मानत भी ज़ब्त हो गई है.

उसके लिए यह भी एक तगड़ा झटका है कि वो तिरुपति सीट भी हार गई है जहाँ से 2009 में फ़िल्म अभिनेता चिरंजीवी जीते थे.

बाद में चिरंजीवी ने अपनी प्रजा राज्यम पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था.

लेकिन कांग्रेस जगन से मुक़ाबले के लिए चिरंजीवी को अपने साथ लाने की चाल में विफल हो गई है.

महत्वपूर्ण चुनाव

जगनमोहन रेड्डी को चुनाव प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया था

इन उपचुनाव को कांग्रेस और जगनमोहन रेड्डी दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था.

चुनाव हुए इसलिए थे कि कांग्रेस में जगन समर्थकों ने बगावत कर दी थी.

17 विधायकों और एक सांसद ने या तो इस्तीफा दिया या फिर उनको अयोग्य घोषित कर दिया.

चुनाव अभियान के दौरान ही जगनमोहन रेड्डी को सीबीआई ने भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार किया था.

उसके बाद से वाईएसआर कांग्रेस का अभियान भावनात्मक हो गया था.

जगन की माँ विजयलक्ष्मी और बहन ने यह कहते हुए लोगों से समर्थन माँगा था कि कांग्रेस पार्टी उनके बेटे और परिवार को केवल इस लिए परेशान कर रही है कि वो दिवंगत मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी की कल्याण योजनाओं को जारी रखना चाहते हैं.

मतभेद

असल में इस स्थिति के बीज उसी दिन बो दिए गए थे जब सितंबर 2009 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में वाईएसआर की मौत के बाद ही जगन को मुख्यमंत्री बनाने की माँग उठी थी और इस पर पार्टी के लगभग सभी विधायकों ने हस्ताक्षर कर दिए थे.

लेकिन कांग्रेस आला कमान ने इस मांग को नहीं माना.

उसके बाद से लगातार कांग्रेस से दूर होने वाले जगन ने अपनी अलग पार्टी बना ली.

तबसे अब तक उनकी शक्ति में लगातार वृद्धि हुई है.

सबसे पहले वो कडप्पा से लोकसभा के लिए चुने गए और उन की माँ पुलिवेंदुला से विधानसभा के लिए चुनी गईं.

हाल ही में वाईएसआर कांग्रेस का एक और विधायक कोव्वुर से चुना गया था.

विधानसभा की स्थिति

तेलुगु देसम पार्टी उपचुनाव में तीसरे नंबर पर रही

आज के परिणामों के बाद विधानसभा में वाईएसआर कांग्रेस के विधायकों की संख्या बढ़कर 17 हो जाएगी.

हालाँकि राज्य में कांग्रेस सरका के तुरंत गिरने का खतरा नहीं है क्योंकि 294 सदस्यों वाली विधान सभा में उसके सदस्यों की संख्या 151 थी और इन उप चुनावों के बाद वह बढ़कर 153 हो गई है.

उसके अलावा उसे मजलिस-इ-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के 7 विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है.

जबकि बहमत के लिए 148 सदस्य काफी हैं.

लेकिन अगर उपचुनाव की सफलता के बाद जगन कांग्रेस के कुछ और सदस्यों को आकर्षित करने में सफल होते हैं तो फिर कांग्रेस सरकार मुश्किल में पड़ सकती है.

टीडीपी

यह उपचुनाव राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी तेलुगु देसम पार्टी के लिए भी एक बड़ा धक्का है क्योंकि वो ना केवल एक भी सीट नहीं जीत सकी बल्कि कई स्थानों पर वो तीसरे नंबर पर पहुँच गई.

तेलंगाना की एकमात्र सीट पर कांग्रेस को पाँचवां स्थान मिला है जिससे स्पष्ट है कि वहाँ के लोग अलग तेलंगाना राज्य की माँग पर कांग्रेस के नकारात्मक रुख से बहुत नाराज़ हैं.

जहाँ उसे आंध्र और रायलसीमा में जगन से खतरा है वहीं तेलंगाना में भी उस का सफाया होता जा रहा है.

ऐसा लगता है कि अब कम से कम तेलंगाना के विषय पर उसे जल्द ही कोई न कोई फैसला करने पर मजबूर होना पड़ेगा.

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