दिल्ली मेट्रो का एक ऐसा भी चेहरा

 बुधवार, 6 जून, 2012 को 14:15 IST तक के समाचार
दिल्ली में मेट्रो

दिल्ली में मेट्रो को दुनिया की बेहतरीन यातायात सेवाओं में गिना जाता है.

27 अप्रैल, 2012: आठ बज कर 27 मिनट पर एक 17 वर्षीय मुसाफिर प्लेटफार्म से नीचे सड़क पर छलांग लगाने की कोशिश कर रहा था. उसे एक स्टेशन अधिकारी ने बचाया.

25मार्च, 2012: सुबह 11:27 पर एक महिला ने मेट्रो ट्रेन के आगे छलांग लगा दी. मृतक का नाम मधु है और उनकी उम्र 22 वर्ष है. 11 बजकर 55 मिनट पर सेवाएं सामान्य हो गईं. मौके पर खुदकुशी का नोट बरामद किया गया है.

19 फरवरी, 2012: शाम के 4:43 पर 42 वर्षीय एक पुरुष ने ट्रेन के सामने छलांग लगाई. उसके सिर पर गंभीर चोट आई और बहुत खून बह रहा था लेकिन उसका शरीर ठीक था. 4:44 पर कैट्स (सेन्ट्रलाईस्ड एक्सीडेंट एंड ट्रौमा सर्विस) और पीसीआर (पुलिस कंट्रोल रूम) को बुलाया गया लेकिन कोई वक्त पर नहीं पहुंचा. उन्हें फोर्टिस में भेजा गया है जहाँ इलाज जारी है.

14दिसंबर, 2011: एक 49 वर्षीय महिला मनिंदर कौर ने ट्रेन के सामने छलांग लगाई. आपात ब्रेक लगायी गयी लेकिन ट्रेन ने उन्हें टक्कर मार दी. एम्बुलेंस स्टाफ ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. उनके पास से स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की पासबुक मिली और एक नोट भी, जिसमे लिखा था कि उनकी सारी जमाराशि बंगला साहब गुरूद्वारे को दान कर दी जाए.

जिस मेट्रो की वजह से दिल्ली शहर का नाम दुनिया के बड़े शहरों में शुमार हुआ है उसी मेट्रो का एक सियाह पक्ष ये है कि इसकी आड़ में आए दिन लोग खुदकुशी करने की कोशिश करते रहते हैं.

ये जानकारी दिल्ली में मेट्रो गाडी चलाने वाली दिल्ली मेट्रो रेल निगम की नई और पुरानी फाइलों के पन्नों से प्राप्त की गई है.

"अखबारों में तो केवल आत्महत्या के मामले छपते हैं, उनका जिक्र नहीं होता जिनकी जिंदगी बचा ली जाती है."

अनुज दयाल, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, डीएमआरसी

दिल्ली की मेट्रो स्टेशनों पर आत्महत्या की कोशिश करने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है.

यह कहना गलत नहीं होगा कि कठिनाइयों से हार मान चुके लोग अपने जीवन का अंत करने के लिए मेट्रो को एक आसान जरिया मान कर उसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.

बहुत सारे मामले ऐसे भी हैं जिनमें मेट्रो स्टाफ की मुस्तैदी से जिंदगियाँ बचा ली गईं.

खुदकुशी करने की कोशिश करने वालों में हर उम्र के लोग हैं लेकिन मेट्रो से जो दस्तावेज हमने देखे उनमें ऐसा लगा कि युवकों की संख्या दूसरो के मुकाबले अधिक है.

डीएमआरसी के मुख्य जनसंपर्क अफसर अनुज दयाल से बीबीसी ने पूछा कि कितने लोगों ने मेट्रो स्टशनों पर ख़ुदकुशी की है या इसका प्रयास किया है तो उन्होंने कहा कि 'उनका विभाग इस तरह के आंकड़े नहीं रखता'.

उनका कहना था, "अखबारों में तो केवल आत्महत्या के मामले छपते हैं, उनका जिक्र नहीं होता जिनकी जिंदगी बचा ली जाती है."

उन्होंने कहा, ''जो कुछ भी किया जा सकता है वो हम करते हैं.''

अनुज दयाल का कहना था कि, "अगर दुनिया के सारे मेट्रो स्टशनों के आंकड़े देखे तभी सही तुलना की जा सकती है. इसके लिए पहले लंदन से शुरुआत करें.''

दरअसल बीबीसी ने मेट्रो अधिकारीयों से आरटीआई यानी सूचना अधिकार 2005 के तहत खुदकुशी और अन्य आंकड़े मांगे थे लेकिन अधिकारियों ने कहा उनके पास ये आंकड़े नहीं है और इतनी सारी जानकारी जुटाई नहीं जा सकती.

लेकिन आखिरकार अधिकारियों ने बीबीसी को मेट्रो की वह फाइलें देखने की इजाज़त दे दी जिससे पता चला कि दिल्ली शहर में कितने लोग आए दिन अपने जीवन का अंत करने की कोशिश करते हैं.

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