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रिश्वत का आरोप:सीबीआई जज निलंबित

 शुक्रवार, 1 जून, 2012 को 21:45 IST तक के समाचार

कच्चे लोहे के अवैध खनन के मामले के मुख्य आरोपी और कर्नाटक के पूर्व मंत्री गाली जनार्धन रेड्डी के विरुद्ध केन्द्रिय जांच ब्यूरो की छानबीन ने एक सनसनीखेज मोड़ ले लिया है.

सीबीआई के विशेष अदालत के जज पर ही यह आरोप लगे है की उन्होंने दस करोड़ रुपये की घूस लेकर गाली को जमानत दी थी.

सीबीआई की इस शिकायत के बाद आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मदन लाल लोकुर ने सीबीआई अदालत के अतरिक्त जज पट्टाभिराम राव को निलंबित कर दिया है और सीबीआई अब उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी कर रही है.

सीबीआई जज के साथ साथ उनके बेटे और कुछ अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी छानबीन कर रही है.

रुपए बरामद

अब तक की छानबीन में सीबीआई ने जज के पुत्र के बैंक लॉकर से तीन करोड़ रूपए जब्त किये हैं.

सीबीआई का कहना है कि गाली जनार्धन रेड्डी के आदमियों ने जज को दो किस्तों में दस करोड़ रुपये अदा किए.

पहले तीन करोड़ रुपये दिए गए और जब जज ने गाली जनार्धन रेड्डी को 12 मई को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए तो उसके बाद बाक़ी रक़म भी अदा कर दी गई है.

सीबीआई सूत्रों का कहना है कि इस मामले में एक और पूर्व जज और आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र के एक मंत्री ने बिचौलियों की भूमिका निभाई.

लेकिन जज की ओर से ज़मानत दिए जाने के बाद भी गाली जनार्धन रेड्डी रिहा नही हो सके क्योंकि उन्हें अवैध खनन के एक और मामले में बेंगलुरु जेल को भेज दिया गया.

कच्चे लोहे का अवैध खनन

गाली जनार्धन रेड्डी को गत 12 सितम्बर को सीबीआई ने बेल्लारी से गिरफ्तार किया था और तबसे वो हैदराबाद की चंचलगुडा जेल में थे.

उनकी कम्पनी पर आरोप है कि उसने आन्ध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में और कर्नाटक के बेल्लारी जिले में कच्चे लोहे का अवैध रूप से खनन किय और उसे विदेशों में बेचा जिससे सरकारी खजाने को कई हजार करोड़ रूपए का नुक्सान हुआ.

गाली की ओर से एक जज को रिश्वत देने के यह आरोप एक ऐसे समय सामने आये हैं जब विशेष सीबीआई अदालत उनके मित्र और वाई एस आर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी की ज़मानत याचिका खारिज कर दी है.

इधर, आंध्र प्रदेश सरकार ने एक स्टील प्लांट की स्थापना के लिए पूर्व वाई एस आर सरकार और गाली जनार्धन रेड्डी के बीच हुए एक समझौते को भी रद्द कर दिया है.

वाई एस आर ने गाली जनार्धन रेड्डी को कडपा में स्टील प्लांट की स्थापना के लिए एक हज़ार एकड़ भूमि आवंटित की थी और साथ ही कच्चे लोहे के खनन का लाइसेंस भी दिया था.

हालाँकि यह कच्चा लोहा केवल इसी प्लांट में इस्तेमाल होना था लेकिन गाली की कंपनी ने आंध्र प्रदेश के कुछ अधिकारियों की मिली भगत से उस लोहे का दूसरे देशों को निर्यात किया था.

इस सम्बन्ध में सीबीआई आंध्र प्रदेश की एक आईएएस अधिकारी श्रीलक्ष्मी और खनन विभाग के अधिकारी वी डी राजगोपाल को भी गिरफ्तार कर लिया है और वो भी चंचलगुडा जेल में ही हैं.

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