जगन मोहन रेड्डी का राजनीतिक सफर

 सोमवार, 28 मई, 2012 को 04:29 IST तक के समाचार
जगन मोहन रेड्डी

जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस सत्ताधारी कांग्रेस के लिए चुनौती बन गई है

छोटे-मोटे व्यवसायी से एक राजनेता तक का सफर वाईएस जगनमोहन रेड्डी के लिए शुरू में तो अच्छा रहा, लेकिन फिर ऐसा लड़खड़ाया कि आज वे सीबीआई की हिरासत में हैं.

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के एकमात्र बेटे जगन मोहन रेड्डी ने अपना बिजनेस करियर 1999-2000 में शुरू किया, जब उन्होंने कर्नाटक के संदूर में एक छोटी पावर कंपनी खोली. बाद में उन्होंने इसका विस्तार पूर्वोत्तर राज्यों में किया.

वर्ष 2004 में उनके पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका बिजनेस ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा. जगन मोहन ने अन्य क्षेत्रों में निवेश शुरू किया, जिनमें सीमेंट प्लांट, बुनियादी सेवा के क्षेत्र और मीडिया शामिल है.

चालीस वर्षीय जगन की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पहली बार 2004 के आखिर में दिखी, जब उन्होंने कड़प्पा से सांसद बनने की इच्छा जताई, लेकिन कांग्रेस हाई कमान ने उन्हें घास नहीं डाली.

राजनीति

अपना सपना पूरा करने के लिए उन्हें 2009 तक का इंतजार करना पड़ा. जब उन्होंने कड़प्पा लोकसभा सीट जीतकर राजनीति में कदम रखा.

लेकिन उसी साल सितंबर में उनके पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत ने जगन मोहन के लिए सब कुछ बदल कर रख दिया.

जगन मोहन रेड्डी अपने पिता के बाद आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन ज्यादातर विधायकों की रजमांदी के बावजूद कांग्रेस हाई कमान उन्हें यह पद देने के पक्ष में नहीं थी.

धीरे-धीरे पार्टी को लेकर जगन मोहन का भ्रम टूटने लगा और उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की अनदेखी शुरू की और फिर अलग अपना रास्ता तलाशने लगे.

सत्ताधारी पार्टी से अलग उन्होंने स्वतंत्र रूप से अपने राजनीतिक करियर के लिए ओडारपू यात्रा की. उन्होंने कई गाँवों और जिलों की यात्रा की.

राज्य में जगन की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से बढ़ा. कांग्रेस ने उनकी यात्रा पर आपत्ति की, तो जगन ने पार्टी ने नाता तोड़ने का फैसला किया.

पार्टी और जगन मोहन के बीच टकराव नवंबर 2010 में और बढ़ा, जब कांग्रेस ने के रोसैया की जगह एन किरण कुमार रेड्डी को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाया.

29 नवंबर 2010 को जगन ने आखिरकार पार्टी छोड़ने का फैसला किया और लोकसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया. मार्च, 2011 में जगन मोहन रेड्डी ने वाईएसआर कांग्रेस के गठन की घोषणा की.

मई 2011 में हुए कड़प्पा उप चुनाव में जगन मोहन रेड्डी रिकॉर्ड अंतर से जीते. जबकि उनकी माँ वाईएस विजया ने पुलिवेन्दुला विधानसभा सीट से शानदार जीत हासिल की.

मुश्किल

वाईएस राजशेखर रेड्डी

वाईएस राजशेखर रेड्डी की एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी

उस समय से ही वाईएसआर कांग्रेस आंध्र-रायलसीमा क्षेत्र में कांग्रेस के लिए मुश्किल बनी हुई है.

कांग्रेस की राज्य सरकार पिछले साल दिसंबर में उस समय एक बड़े संकट के दौर से गुजरी जब उसके 16 विधायकों ने जगन मोहन का समर्थन करते हुए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान दिया. लेकिन प्रजा राज्यम और मजलिस पार्टियों ने सरकार को बचाने में अहम भूमिका निभाई.

मार्च में हुए उपचुनाव में कांग्रेस सभी सात सीटें हार गई. इनमें से छह सीटें तेलंगाना और एक सीट तटीय आंध्र में थी. तटीय आंध्र में एकमात्र सीट जीतकर वाईएसआर कांग्रेस ने कांग्रेस और तेलुगूदेसम पार्टी को चौंका दिया.

जगन की नजर राज्य के मुख्यमंत्री पद पर है और उन्हें उम्मीद है कि अगले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी अच्छा करेगी. लेकिन इस बीच आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है.

अब देखना ये है कि उनकी गिरफ्तारी का उन्हें राजनीतिक रूप से फायदा मिलता है या उन्हें नुकसान होता है.

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