भाजपा: निर्णयों की जगह 'अंतरद्वंद्व' की चर्चा छाई

 शुक्रवार, 25 मई, 2012 को 18:08 IST तक के समाचार
आडवाणी सुषमा

आडवाणी सुषमा के रैली में मौजूद न होने पर मीडिया में उनके नाराज होने के कयास लगाए जा रहे हैं

मुंबई में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के दूसरे दिन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री यदियुरप्पा की मौजूदगी के बावजूद पार्टी के भीतर की अंतरकलह की झलकियाँ नजर आने लगी हैं.

हालाँकि पार्टी ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार पर तीखे प्रहार करने की कोशिश की है लेकिन मीडिया का ध्यान भाजपा के अंतरद्वंद्व पर ही केंद्रित रहा है.

कार्यकारिणी के बाद होने वाली रैली में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की अनुपस्थिति की बात सार्वजनिक होते ही ये कयास लगाए जाने लगे कि क्या ये नेता पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी और उनकी मोदी के संदर्भ में तुष्टीकरण की नीति अपनाने से नाराज हैं?

लेकिन भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमन का कहना था, ''आडवाणी का कार्यक्रम पहले से तय था, इसलिए वे रैली में नहीं जा रहे. सुषमा स्वराज को शनिवार सुबह गाजियाबाद में एक कार्यक्रम में शामिल होना है, इसलिए वे भी रैली में शामिल नहीं हो पाएंगी.''

गौरतलब है कि रैली के मुख्य वक्ता पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ही हैं जिन्हें पार्टी के संविधान में संशोधन की बदौलत अध्यक्ष का लगातार दूसरा कार्यकाल मिला है.

रैली में नरेंद्र मोदी होंगे जिनके दबाव के कारण कार्यकारिणी के सदस्य और राष्ट्रीय सवयंसेवक संघ के चहेते संजय जोशी को कार्यकारिणी से बाहर जाना पड़ा है.

गैर-मौजूदगी के मायने

"आडवाणी का कार्यक्रम पहले से तय था, इसलिए वे रैली में नहीं जा रहे. सुषमा स्वराज को शनिवार की सुबह गाजियाबाद में एक कार्यक्रम में शामिल होना है, इसलिए वे भी रैली में शामिल नहीं हो पाएंगी"

निर्मला सीतारमण

लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज की गैर-मौजूदगी के कई मायने लगाए जा रहे हैं.

आडवाणी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के पहले दिन उस वक्त भी मौजूद नहीं थे जब पार्टी के संविधान में गडकरी को दूसरी बार अध्यक्ष बनाने से संबंधित संशोधन किया गया था.

पार्टी की रणनीति तय करने में लालकृष्ण आडवाणी हमेशा से अहम भूमिका निभाते रहे हैं और ये शायद पहला मौका होगा जब वे पार्टी की कार्यकारिणी के बाद होने वाली रैली में शामिल नहीं होंगे.

पार्टी के कुछ नेताओं का ये भी कहना है कि आडवाणी कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से साथ मंच साझा नहीं करना चाहते जिन्होंने उनकी खुलेआम आलोचना की थी.

वैसे कहा जा रहा है कि येदियुरप्पा भी कार्यकारिणी में नहीं आना चाहते थे लेकिन ऐसा लगता है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई आने के फैसले की वजह से उन्होंने भी अपना फैसला बदल दिया.

राजनीतिक प्रस्ताव: पुराने आरोप

राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पारित राजनीतिक प्रस्ताव में भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि केंद्र की यूपीए सरकार में न केवल दोहरा नेतृत्व है बल्कि सात-रेसकोर्स रोड और दस-जनपथ के बीच की दूरी भी बढ़ती जा रही है.

भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि दोनों के बीच नीतिगत मतभेद भी हैं और गठबंधन के घटक दलों में भी तालमेल नहीं है. प्रस्ताव में कहा गया है कि यूपीए सरकार नीतिगत फैसले नहीं ले रही है.

भाजपा का कहना है कि देश में निवेश घट रहा है और माहौल उद्योग-धंधों के माकूल नहीं है. रोजमर्रा की चीजें खासतौर पर खाने-पीने की चीजों के दाम एक बार फिर आसमान छू रहे हैं.

पार्टी ने अपना आरोप दोहराया है कि मनमोहन सिंह की सरकार आजाद भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार है. कांग्रेस इन आरोपों को कई बार खारिज कर चुकी है.

भाजपा का ये भी कहना है कि केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार राज्य सरकारों के अधिकार-क्षेत्र में दखल देकर संघीय ढांचे को नुकसान पहुँचा रही है.

'पाक से सामान्य संबंध संभव नहीं'

पाकिस्तान के साथ संबंधों के मुद्दे पर भाजपा के प्रस्ताव में कहा गया है कि पाकिस्तान की जमीन से भारत से खिलाफ सक्रिय चरमपंथी ताकतों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई किए बिना पड़ोसी देश के साथ संबंधों को सामान्य बनाना मुमकिन नहीं है.

प्रस्ताव में ये भी कहा गया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों खासतौर पर हिंदुओं की दशा बहुत खराब है. भाजपा के अनुसार पाकिस्तान में कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं जब पुलिस ही नहीं न्यायपालिका भी उनके साथ इंसाफ नहीं कर पाई है.

प्रस्ताव में भारत सरकार से कहा गया है कि वो पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक स्तर पर कदम उठाए.

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