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भारत के पीयूष पांडे क्लियो अवार्ड से सम्मानित

 रविवार, 20 मई, 2012 को 03:53 IST तक के समाचार
पीयूष पांडे

इस सम्मान से भारत में विज्ञापन के क्षेत्र में काम करने वालों को बहुत प्रोत्साहन मिलेगा.

भारत के पीयूष पांडे को अमरीका में विज्ञापन की दुनिया के प्रतिष्ठित क्लियो अवार्ड से सम्मानित किया गया है.

विज्ञापन बनाने के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए पीयूष पांडे को वर्ष 2012 के क्लियो लाइफटाइम अवार्ड से नवाजा गया है.

पीयूष पांडे विज्ञापन बनाने वाली मशहूर अमरीकी कंपनी 'ओगिल्वी एंड मेथर' के दक्षिण एशिया के प्रमुख हैं.

पीयूष पांडे पहले दक्षिण एशियाई हैं जिन्हे यह पुरस्कार मिला है.

लाइफटाइम अवार्ड हासिल करने के बाद पीयूष पांडे ने खुशी जताते हुए कहा, “मुझे बहुत खुशी है कि जो काम मैंने भारत में सीखा और भारत में ही किया, उसको इतने बड़े पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. तो यह पुरस्कार मैंने अपने लिए नहीं बल्कि एक अरब से अधिक भारतीयों की ओर से लिया है.”

पीयूष पांडे पिछले 35 सालों से भारत में ही 'ओगिल्वी एंड मेथर' से जुड़े रहे हैं. उनको भारत में विज्ञापन की दुनिया का गॉडफ़ादर भी कहा जाता है.

जाने माने विज्ञापन

विज्ञापन की दुनिया में तीन दशकों से अधिक लंबे करियर के दौरान पीयूष पांडे ने भारत में कई चर्चित विज्ञापन बनाए जिनमें कैडबरीज़ के कई विज्ञापन, फेवीकोल का वह विज्ञापन जिसमें - जोर लगाके हैइसा- काफी चर्चित रहें हैं.

"मुझे बहुत खुशी है कि जो काम मैंने भारत में सीखा और भारत में ही किया, उसको इतने बड़े पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. तो यह पुरस्कार मैंने अपने लिए नहीं बल्कि एक अरब से अधिक भारतीयों की ओर से लिया है."

पीयूष पांडे

इसके अलावा भारत में देशभक्ति से प्रेरित वह विज्ञापन भी सबको याद ही होगा – मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा -

जी हां यह सब पीयूष की ही देन हैं.

पीयूष पांडे कहते हैं कि वह हमेशा विज्ञापन बनाने के दौरान आम भारतीय लोगों को दिमागं में रखकर काम करते हैं.

वह कहते हैं, “विज्ञापन बनाने के लिए मैं सबसे पहले भारतीय लोगों के बारे में सोचता हूं. उनके जीवन को देखता हूं, उनकी ख्वाहिशों को देखता हूं, क्या चीज़ उनके दिल को छू जाएगी सिर्फ़ वही देखता हूं. लॉजिक तो सबको आती है.”

उनके बहुत से विज्ञापन भारतीय मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर ही बनाए गए हैं.

पीयूष कहते हैं, “भारत के मध्यम वर्ग ने ही हमें विश्व अर्थव्यवस्था की मंदी में भी बचाए रखा. भारत का मध्यम वर्ग बड़ा खुश वर्ग है. वह अपनी परेशानियों को लेकर रोते नहीं है. मैंने भी जो सीखा वह मध्यम वर्ग से ही सीखा है. मैं भी मध्यम वर्ग परिवार से आता हूं. और उसी ने मुझे आज किसी काबिल बनाया है.”

'ओगिल्वी एंड मेथर' को भारत में पिछले 10 सालों से विज्ञापन बनाने वाली बेहतरीन कंपनी का खिताब मिल रहा है.

"पियूष में जो खूबियां हैं वह इस पुरस्कार की आत्मा हैं. वह न सिर्फ़ बेहतरीन क्रिएटिव नज़र रखते हैं बल्कि वह जोश से भरे एक महान संचालक भी हैं जो अपने आस-पास के लोगों को भी प्रोत्साहित करते हैं."

क्लियो अवार्ड के निदेशक कार्ल वॉंटज़

पीयूष पांडे को सम्मानित किए जाने पर क्लियो अवार्ड के निदेशक कार्ल वॉंटज़ कहते हैं, “पीयूष में जो खूबियां हैं वह इस पुरस्कार की आत्मा हैं. वह न सिर्फ़ बेहतरीन क्रिएटिव नज़र रखते हैं बल्कि वह जोश से भरे एक महान संचालक भी हैं जो अपने आस-पास के लोगों को भी प्रोत्साहित करते हैं.”

विज्ञापन की दुनिया के प्रतिष्ठित क्लियो अवार्ड के लिए हर वर्ष विश्व भर से हज़ारों कंपनियों के नामांकन शामिल किए जाते हैं. और इसमें विश्व भर से प्रोफ़ेशनल्स की एक ज्यूरी द्वारा प्रिंट, टीवी और रेडियो समेत कई माध्यमों के विज्ञापनों को परखा जाता है.

इस वर्ष कई भारतीय भी इस अवार्ड की ज्यूरी का हिस्सा थे.

इससे पहले क्लियो लाईफ़टाईम अवार्ड पाने वालों में ब्रिटेन के फ़िल्म निर्देशक टोनी केय और डेविड एबट, और 'ओगिल्वी एंड मेथर' के निर्देशक नील फ़्रेंच भी शामिल हैं.

पीयूष पांडे को इससे पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं.

पीयूष पांडे को सन 2010 में भारत में विज्ञापन एजेनसीज़ एसोसिएशन द्वारा लाईफ़टाईम अवार्ड से सम्मानित किया गया था.

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