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भारतीय कश्मीर: चार महीने में 400 नवजात शिशुओं की मौत

 शनिवार, 19 मई, 2012 को 14:59 IST तक के समाचार
नवजात शिशु (फाइल फोटो)

बच्चों की मौत पर स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा है.

भारत प्रशासित कश्मीर में बच्चों के इलाज के लिए स्थापित इकलौते अस्पताल में जनवरी 2012 से अब तक यानी पिछले चार महीनों में 400 से ज्यादा नवजात बच्चों की मौत हो गई है.

शनिवार को एक और बच्चे की मौत हो गई जिसके बाद पूरे घाटी में तनाव फैल गया.

विपक्षी पार्टियों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है जबकि अलगाववादियों ने इसे कश्मीरियों का नरसंहार करार दिया है.

गौरतलब है कि भारत प्रशासित कश्मीर में नवजात बच्चों के इलाज के लिए केवल एक ही अस्पताल है जिसे वहां तैनात भारतीय सेना की पंद्रहवीं कोर और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से चला रहे हैं.

श्रीनगर में मौजूद बीबीसी संवाददाता रियाज मसरूर के अनुसार राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र सिंह ने इन मौतों की जांच के आदेश दे दिए हैं.

इससे नाराज लोगों का गुस्सा कम करने के लिए शुक्रवार को राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने अचानक अस्पताल का दौरा किया और लोगों को विश्वास दिलाया कि अस्पताल में तैनात अधिकारियों की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा लेकिन उनके दौरे के चंद घंटे बाद ही एक और बच्चे की मौत हो गई.

सुविधाओं की कमी

"प्रशासन सिर्फ अलगाववादी नेताओं को झुठलाने और उन्हें घरों में नजरबंद करने में व्यस्त है. जो वादे करके ये सरकार सत्ता में आई थी वो काम तो कर नही रही है."

अलगाववादी नेता

अस्पताल के कुछ अधिकारियों ने बताया कि भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासन के बीत मन-मुटाव के कारण अस्पताल में जरूरी सामान की कमी है, यहां तक की अत्यंत आवश्यक वेंटिलेटर्स तक मौजूद नहीं हैं.

अस्पताल के एक टेक्निशियन ने बीबीसी को बताया कि अमरीका, यूरोप या सऊदी अरब में रहने वाले कुछ कश्मीरी उद्योगपतियों और डॉक्टरों ने कुछ सामान दान किए थे लेकिन वे सारे सामान भी खराब हो गए हैं.

इस बीच अस्पताल के सुपरावाइजर डॉक्टर जावेद चौधरी को उनके पद से हटा दिया गया है लेकिन विपक्षी पार्टियां और सामाजिक कार्यकर्ता इस कार्रवाई को खानापूर्ति कह रहे हैं.

अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक ने बच्चों की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन सिर्फ अलगाववादी नेताओं को झुठलाने और उन्हें घरों में नजरबंद करने में व्यस्त है.

उनके मुताबिक जो वादे करके ये सरकार सत्ता में आई थी वो काम तो कर नही रही है.

केंद्रीय स्वास्थ मंत्री गुलाम नबी आजाद ने भी इसके लिए राज्य प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है.

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