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मेंहदी हसन को इलाज के लिए भारत लाने की तैयारी

 शुक्रवार, 18 मई, 2012 को 16:00 IST तक के समाचार
मेंहदी हसन

मेंहदी हसन इन दिनों काफी बीमार हैं

शहंशाह-ए-गजल मेंहदी हसन की तबियत बहुत नासाज है. उनके परिवार ने मेहदी हसन को उपचार के लिए भारत लाने की इच्छा जाहिर की है.

राजस्थान के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत ने विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से हसन के परिजनों को और वीजा स्वीकृत करने का आग्रह किया है.

इससे पहले भारत ने हसन सहित चार लोगों के लिए तुरंत मेडिकल वीजा देना स्वीकार कर लिया. गहलोत ने दोबारा भारत में मेंहदी हसन के इलाज का पूरा खर्च उठाने की पेशकश की है.

इसकी वजह ये है कि मेंहदी हसन मूलत: राजस्थान के सपूत हैं. उनके पुश्तैनी गाँव झुंझुनू जिले के लुना में लोग इस गजल सम्राट की सेहत के लिए दुआ कर रहे हैं.

पुत्र ने गहलोत से गुहार लगाई

"उनकी हालत बहुत नाजुक है, उन्हें खून की उल्टियाँ हुईं हैं. हम अपने वालिद को तुरंत पाकिस्तान से भारत लाना चाहते हैं."

मोहम्मद आरिफ, मेंहदी हसन के बेटे

मेंहदी हसन अभी पाकिस्तान मे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं. उनके बेटे मोहम्मद आरिफ ने मुख्य मंत्री गहलोत से संपर्क किया और उन्हें अपने वालिद की गिरती सेहत के बारे में जानकारी दी.

आरिफ ने मुख्य मंत्री को बताया, "उनकी हालत बहुत नाजुक है, उन्हें खून की उल्टियाँ हुईं हैं. हम अपने वालिद को तुरंत पाकिस्तान से भारत लाना चाहते हैं."

उन्होंने अपने परिवार के कुछ और लोगों के लिए वीजा दिलाने में मुख्य मंत्री की मदद माँगी.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बारे में भारत के विदेश मंत्री को पत्र लिखा है. मुख्यमंत्री ने विदेश मंत्री कृष्णा से दो और लोगों के लिए वीजा स्वीकृत करने का अनुरोध किया है.

कोई चार माह पहले भी गजल गायक हसन गंभीर रूप से बीमार हो गए थे.

उन्हें पाकिस्तान के एक अस्पताल में जीवन रक्षक उपकरणों पर रखा गया था. तब भी गहलोत ने उनके परिवार से संपर्क किया और कहा कि राजस्थान सरकार उनके इलाज के लिए हर मुमकिन मदद को तैयार है.

पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग के अधिकारी मेंहदी हसन के परिजनों के सम्पर्क में हैं. भारत ने अभी मेंहदी हसन, उनके एक बेटे, पुत्र वधु और एक चिकित्सा सहायक के लिए वीजा स्वीकृत किया है.

पुश्तैनी गाँव में दुआ

इस दौरान हसन के पुश्तैनी गाँव लुना में लोग गजल गायक के स्वास्थ्य के लिए दुआ कर रहे हैं.

लुना के नारायण सिंह नब्बे साल के हो गए हैं. वे हसना के बाल सखा है. फोन पर बात हुई तो हसन को याद कर भावुक हो गए. कहने लगे हम तो उसकी आवाज के कायल है. "मुझे दिखता सुनता कम है. मैं अपने दोस्त को बहुत दिल से याद करता हूँ. भगवान से प्रार्थना है कि उसे स्वस्थ रखे."

"मुझे दिखता सुनता कम है. मैं अपने दोस्त को बहुत दिल से याद करता हूँ. भगवान से प्रार्थना है कि उसे स्वस्थ रखे."

नारायण सिंह, मेंहदी हसन के बचपन के मित्र

लुना के पूर्व सरपंच कुरडाराम एक बार मेंहदी हसन से मिले हैं और दो बार उनसे फोन पर बात हुई है. कहते हैं, "जब भी उनसे बात हुई, वे अपने बचपन के दोस्तों का नाम ले-ले कर पूछने लगे. कहा, अरे वो नारायण सिह कैसे है. वो अर्जुन क्या कर रहा है."

कुरडाराम कहते हैं कि जबसे उनकी बीमारी और गंभीर हालत के बारे में सुना है, पूरा गाँव उनके लिए दुआ कर रहा है. गाँव में उनके पुरखों की याद में कब्रिस्तान में बना एक स्मारक है, जहाँ कभी हसन ने दुआ की थी.

वे राजस्थान के शेखावाटी अंचल के लुना में पैदा हुए और फिर बँटवारे के दौरान पाकिस्तान चले गए.

एक और गायिका रेशमा भी इसी इलाके से हैं. धरती जब सरहदों में बँटी तो इंसानों की आवाजाही पर पहरे लगे. मगर फनकारों की आवाज किसी वीजा पाबंदियों से नहीं रूकती. उसे संगीनों के पहरे भी नहीं रोक सकते.

इसीलिए मेंहदी हसन की मखमली आवाज सरहद के दोनों ओर बहुत मनमानी से मुसाफिरी करती रही. मगर अब उस आवाज में बीमारी की दरारें पड़ गई हैं. लिहाजा डॉक्टर दवा तजवीज कर रहे हैं, तो उनके चाहने वाले हाथ उठा कर दुआ कर रहे है. इस पार भी, उस पार भी.

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