अंबेडकर और नेहरू के कार्टून पर लोकसभा में हंगामा

 शुक्रवार, 11 मई, 2012 को 23:49 IST तक के समाचार
भारतीय संसद

संसद में चिदंबरम के मुद्दे पर तो पहले ही गतिरोध था अंबेडकर के कार्टून के मामले पर भी हंगामा हुआ

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तक में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के एक कथित कार्टून को लेकर लोकसभा में काफ़ी हंगामा हुआ और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई तमिलनाडु की वीसीके पार्टी के तिरुमावलवन थोल अध्यक्ष की कुर्सी के पास आ गए. उन्होंने हाथ में तख्ती उठा रखी थी जिसमें लिखा था कि एनसीईआरटी की 11वीं कक्षा की पाठ्य पुस्तक में डॉक्टर अंबेडकर का कार्टून है जिससे उनका अपमान हुआ है.

इस कार्टून में जवाहर लाल नेहरू भी दिखाए गए हैं और कई दलों के सदस्यों ने तिरुमावलवन की बात का समर्थन किया.

तिरुमावलवन ने कहा कि जिस तरह का कार्टून बना है वो 'अंबेडकर, नेहरू और पूरे देश का अपमान है.'

सलाहकारों का इस्तीफ़ा

संसद में उठे विवाद के बाद एनसीईआरटी टेक्सट बुक कमेटी के दो सलाहकारों, योगेंद्र यादव और सुहास पालशिकर ने अपने पद से शुक्रवार शाम को इस्तीफा दे दिया.

प्रोफेसर सुहास पालशिकर ने दोनों के इस्तीफें की पुष्टि करते हुए एक निजी भारतीय समाचार चैनल को बताया कि शुक्रवार को संसद में जो भी हुआ उससे पता चलता है कि पाठयक्रम की पुस्तकें किस तरह लिखी जाएं इसको लेकर उनके और सासंदों के बीच मतभेद हैं.

शुक्रवार को लोकसभा में हंगामें के बाद सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने कहा कि पाठ्यपुस्तक में कार्टून छपना पूरी तरह गलत है और वह इस मामले में सदन की भावनाओं का सम्मान करते हैं.

उन्होंने ये भी विश्वास दिलाया कि वह सिब्बल को सदन में बयान देने के लिए कहेंगे. मगर उसके बावजूद हल्ला-गुल्ला होता रहा और लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

फिर कपिल सिब्बल ने दोपहर बाद आकर सदन में बयान दिया और कहा कि पाठ्य पुस्तकों के हर कार्टून की समीक्षा की जाएगी और अगले साल से इस तरह के कार्टून हटा लिए जाएँगे. उन्होंने बताया कि उस पुस्तक की बिक्री तुरंत प्रभाव से रोक दी गई है.

सिब्बल ने माना कि कार्टून आपत्तिजनक है और कहा कि पाठ्य पुस्तकों में इस तरह के कार्टून को देखकर हटाने के बारे में एक समिति का गठन कर दिया गया है.

कार्टून

कपिल सिब्बल

कपिल सिब्बल ने सदन में बयान देकर बताया कि ऐसी पाठ्य पुस्तकों की बिक्री तुरंत प्रभाव से रोक दी गई है

इस कार्टून को लेकर तमिलनाडु में हंगामा हो रहा है. ये कार्टून जाने-माने कार्टूनिस्ट शंकर ने बनाया है जिसमें नेहरू को हाथ में एक चाबुक लिए हुए दिखाया गया है और वह एक घोंघे पर बैठे अंबेडकर का पीछा कर रहे हैं.

इस कार्टून में नेहरू अंबेडकर से संविधान पर काम में तेजी लाने के लिए कह रहे हैं. उस कार्टून के नीचे लिखा है कि संविधान बनने में तीन साल लगे तो संविधान सभा को इसका मसौदा तैयार करने में इतना समय क्यों लगा?

सांसदों का कहना था कि रिकॉर्ड समय में तैयार हुए संविधान को लेकर इस तरह की बात करना गलत है और उसे तुरंत हटाया जाना चाहिए. ये कार्टून लगभग चार दशक पहले बना था.

चिदंबरम मामला

जब ये हंगामा हो रहा था कि उसी समय भारतीय जनता पार्टी के सदस्य यशवंत सिन्हा और शाहनवाज हुसैन के साथ ही कुछ अन्य सदस्यों ने खड़े होकर चिदंबरम का विरोध शुरू कर दिया. वे अपने बेटे को लेकर गुरुवार को दिए चिदंबरम के बयान का विरोध कर रहे थे.

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से जानना चाहा कि गृह मंत्री ने व्यक्तिगत स्पष्टीकरण के नाम पर बेटे का बयान क्यों पढ़ा.

स्वराज ने कहा, "व्यक्तिगत बयान देने के बजाए उन्होंने अपने बेटे की ओर से बयान पढ़ा और ईसा मसीह का नाम भी लिया. सभापति ने इसकी अनुमति क्यों दी."

इस पर संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि चिदंबरम के पास व्यक्तिगत बयान देने का अधिकार है क्योंकि भाजपा के सदस्य यशवंत सिन्हा ने गृह मंत्री तथा उनके बेटे के विरुद्ध 'गैर जिम्मेदाराना' बयान दिया था.

बंसल जब ये बयान दे रहे थे कि उसी बीच तिरुमावलवन तख्ती लहराते हुए सदस्यों को कथित कार्टून की प्रतियाँ बाँट रहे थे.

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