भारत चाहे तो वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट बनाने में मदद करूँ: खलील चिश्ती

 गुरुवार, 10 मई, 2012 को 17:05 IST तक के समाचार

एक युवक की हत्या के आरोप में खलील चिश्ती को सत्र न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई

मैं बहुत खुश हूँ कि 21 साल बाद मुझे एक खुशखबरी सुनने को मिली.

मैं सुप्रीम कोर्ट का बहुत शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझसे इनसानी हमदर्दी का बर्ताव करते हुए ये फैसला लिया है.

सबसे पहले मैं ये खुशी अपने घरवालों के साथ बांटूंगा. उर्दू में एक शेर है 'पहले ख़ेश पीछे दरवेश' - यानी मेरे जो ख़ेश यानि घरवाले हैं पहले मैं उन्हीं के साथ अपनी खुशी बांटूंगा.

मैं 21 साल से अजमेर में था. लेकिन वो 21 साल का ज्यादा अरसा....समझ लीजिए 20 साल मैंने अजमेर में अपने वालिद के घर में बिताया जो कि अजमेर से 12 किलोमीटर की दूरी पर है पर अजमेर में ही आता है. मुझे अजमेर से बाहर जाने की इजाजत नहीं थी.

अजमेर से नाता

वर्ष 1992 के पहले तकरीबन हर साल मैं अजमेर आता था.

ये रिकॉर्ड है कि मैंने कभी भी छुट्टियां किसी दूसरी जगह पर नहीं मनाई.

मैं अपनी छुट्टियों में हर साल अपने मां-बाप से मिलने के लिए यहां आया करता था, उसमें एक आध साल का गैप रह गया हो तो याद नहीं, लेकिन मेरी उम्र का ज्यादा हिस्सा पाकिस्तान में कम भारत में ज्यादा बीता है.

जरदारी साहब को भी अल्लाह ने मौका दिया कि वो यहां आकर ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की मजार की जियारत करें.

उसी जियारत के सिलसिले में ही उन्होंने मेरे मामले में भी कुछ मदद की होगी बल्कि उनके आने ने मेरी मदद की.

इंस्टीट्यूट

खलील चिश्ती को एक नवंबर 2012 को भारत वापस आना है.

जब मैं पाकिस्तान से लौट कर आऊंगा तो ये देखने वाली बात होगी कि राजस्थान की सरकार मेरे साथ पर्यटक की तरह बर्ताव करती है या मुझसे कुछ फायदा भी उठाती है.

अगर सरकार मुझसे कुछ फायदा उठाना चाहेगी तो मैं उसे एक वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट का तोहफा भी दे सकता हूँ.

भारत में केवल पुणे में वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट है. यहां तक कि राजस्थान, गुजरात और दिल्ली में भी वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट नहीं हैं.

अगर राजस्थान सरकार खर्च उठाने को तैयार है तो वो मुझसे इस सिलसिले में मदद ले सकते हैं.

मैं अरावली की पहाड़ी में एक वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट बनाने में सरकार की मदद कर सकता हूँ.

पाकिस्तान की जेल में एक भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह बंद हैं. अगर मौका मिला तो मैं उनसे मुलाकात करुँगा और बाद में हालात के हिसाब से उनकी मदद करने की जरूर कोशिश करूंगा.

(बीबीसी संवाददाता अमरेश द्विवेदी के साथ खास बातचीत में खलील चिश्ती ने ये बातें कहीं)

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