कश्मीर: सैनिकों पर कार्रवाई के फैसले से 'निराशा'

 बुधवार, 2 मई, 2012 को 14:12 IST तक के समाचार
पथरीबल एन्काउंटर

एन्काउंटर में मारे गए लोगों के शवों की डीएनए जांच के लिए उन्हे कब्र से निकाला गया था.

भारत प्रशासित कश्मीर के पथरीबल में सैनिकों पर लगे फर्जी मठभेड़ के आरोप में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को वकील वृंदा ग्रोवर ने निराशाजनक बताया है.

साल 2000 में सेना की मुठभेड मे पाँच नागरिकों के मारे जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सेना आठ हफ्ते के भीतर तय करे कि सैनिकों का कोर्ट मार्शल होगा या फिर उनके खिलाफ नागरिक अदालत में मामला चलेगा.

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि मामला असैनिक अदालत में जाता है तो सैनिकों के खिलाफ मामला चलाने के लिए सरकार को तीन महीने के भीतर फैसला करना होगा.

'सेना को ही अधिकार देना है तो क्या फायदा?'

वकील वृंदा ग्रोवर का कहना है कि अगर सेना के अधिकारियों के खिलाफ मामला चलाने का अधिकार सेना को ही दे दिया गया तो न्याय की उम्मीद करना बेमानी है.

घटनाक्रम - पथरीबल एन्काउंटर

20 मार्च, 2000 तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत यात्रा से एक दिन पहले अज्ञात हमलावरों ने छि ट्टीसिंहपुरा गांव में 35 सिखों की हत्या कर दी.

25 मार्च, 2000 सेना ने नरसंहार में शामिल पांच लश्कर-ए-तैबा चरमपंथियों को पथरीबल में मार गिराने का दावा किया.

3 अप्रैल, 2000 पथरीबल में हुए एन्काउंटर का विरोध करने बर्कपुरा की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों पर सेना के जवानों ने गोलियां चलाई जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए थे.

31 अक्तूबर, 2000 जस्टिस पांडियन की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई जिसको पथरीबल और बर्कपुरा में हुए एन्काउंटर की जांच का जिम्मा सौंपा गया.

6 अप्रैल, 2002 डीएनए जांच से पता चला कि पथरीबल में मारे गए पांच लोग आम नागरिक थे.

साल 2006 में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि पथरीबल में मारे गए लोगों की सुनियोजित हत्या की गई थी.

साल 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में चल रहे मामले की सुनवाई अपने अगले आदेश तक रूकवा दी थी.

हुर्रियत कॉंफ्रेंस के नेता नईम खान ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा जताई.

बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर से बातचीत में उन्होंने कहा, "लोगों ने आस लगाई थी कि सुप्रीम कोर्ट उनके साथ न्याय करेगा, लेकिन इस फैसले से लोग एक बार फिर मायूस हुए. कोर्ट को चाहिए था कि वो मासूम लोगों के हत्यारों को सजा देता लेकिन कोर्ट ने तो उनसे ही पूछ लिया कि वो अपने खिलाफ किस तरह की कार्रवाई चाहते है."

पथरीबल एन्काउंटर मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाया था.

बीबीसी से बातचीत में वृंदा ग्रोवर ने कहा, “कश्मीर के लोगों को मानवाधिकार के हनन होने पर न्याय नहीं मिलता है. पथरीबल उसका सबसे प्रमुख उदाहरण है. इस मामले को अगर आप बारीकी से देखें तो पता चलेगा कि सेना के लोग अगर किसी का कत्ल भी कर दें तो वो अपने खिलाफ कार्रवाई को रोक सकते हैं.”

वृंदा ग्रोवर का कहना है कि इस फैसले से कश्मीर के लोगों को भारी निराशा होगी.

सेना ने अब तक अधिकारियों के खिलाफ नागरिक अदालत में मामला चलाए जाने का विरोध किया है और कहा है कि ऐसा करने के लिए उन्हें केंद्र सरकार की स्वीकृति चाहिए.

न्यायिक खींचतान

सेना के अधिकारियों पर पथरीबल गांव में पांच नागरिकों की हत्या करने का आरोप है.

इससे पहले सीबीआई ने अदालत को बताया था कि सेना के अधिकारी पांच नागरिकों की ‘सुनियोजित हत्या’ में शामिल थे.

सीबीआई के वकील अशोक भान ने अदालत में कहा, “हमारी जांच में पता चला है कि इन लोगों की सुनियोजित हत्या की गई थी. अगर न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बनाए रखना है तो अभियुक्त अफसरों के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.”

घटना साल 2000 की है जब भारत प्रशासित कश्मीर के चिट्टीसिंहपुरा गांव में हथियारबंद हमलावरों ने 35 सिखों की हत्या कर दी थी.

इसी के कुछ दिन बाद सेना ने पथरीबल में एक मुठभेड़ में पांच लश्कर-ए-तैबा के चरमपंथियों को मार देने का दावा किया था.

कई वर्षों की जांच के बाद सीबीआई ने पाया कि सेना की मुठभेड़ में मारे गए लोग आम नागरिक थे और उनकी हत्या ‘सुनियोजित’ थी.

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