BBC navigation

भूमाफिया ने बनाया कार्टून को हथियार!

 गुरुवार, 19 अप्रैल, 2012 को 05:25 IST तक के समाचार
गिरफ़्तारी के विरोध में प्रदर्शन

प्रोफ़ेसर अंबिकेश की गिरफ़्तारी के विरोध में कॉलोनी में लगभग हर रोज़ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं

क्या पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्टून ईमेल से भेजने के मामले में जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्र की गिरफ्तारी के पीछे भूमाफिया ने भी अहम भूमिका निभाई थ?

इस मामले में धीरे-धीरे सामने आ रही बातों से अब परदे के पीछे सक्रिय तृणमूल कांग्रेस के रियल एस्टेट के धंधे में शामिल नेताओं की भूमिका भी सामने आ रही है.

प्रोफेसर महापात्र और उनके पड़ोसी सुब्रत सेनगुप्ता अपनी आवासीय कॉलोनी की संचालन समिति के सहायक सचिव और सचिव थे लेकिन उनके रहते कॉलोनी के खाली पड़े प्लाटों पर कब्जा करने की कुछ लोगों की कोशिशों को कामयाबी नहीं मिल रही थी.

कॉलोनी में निर्माण कार्य के एवज में एक नेता की ओर से जमा किए गए फर्जी बिलों के भुगतान पर भी इन दोनों ने रोक लगा दी थी. उसी समय से यह दोनों उन लोगों की आंखों में खटक रहे थे. ममता के कार्टून ने उनको इन लोगों को सबक सिखाने का हथियार दे दिया.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की बैठक में साफ निर्देश दिया था कि पार्टी का कोई भी आदमी रियल एस्टेट के कारोबार में शामिल नहीं हो सकता. इसके बावजूद चोरी-छिपे पार्टी के सैकड़ों नेता इस धंधे में शामिल हैं.

महानगर और आस-पास के इलाकों में इसके लिए जगह-जगह सिंडीकेट बने हुए हैं.

कार्टून कांड

न्यू गड़िया कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी

प्रोफेसर महापात्र अपनी आवासीय कालोनी की संचालन समिति के सहायक सचिव थे

अंबिकेश की कॉलोनी में रहने वाले सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी भवेश सान्याल कहते हैं, "कुछ असरदार लोग कॉलोनी के खाली पड़े प्लाटों पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे. लेकिन अंबिकेश और सुब्रत के रहते उनके मंसूबे पूरे नहीं हो रहे थे. उनको सबक सिखाने के लिए ही कार्टून कांड का सहारा लिया गया."

वर्ष 1976 में 137 बीघे जमीन पर न्यू गड़िया कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी नामक कॉलोनी की स्थापना हुई थी. उसमें कुल 558 प्लाट हैं. उनमें से 108 प्लाट अब भी खाली हैं.

लगभग तीन साल पहले उस कॉलोनी से महज तीन सौ मीटर की दूरी पर ही मेट्रो रेल का कवि सुभाष नामक स्टेशन बनने की वजह से उन प्लाटों की कीमतें आसमान छूने लगीं.

कॉलोनी के एक निवासी सुमन घराई कहते हैं, "इस समय एक-एक प्लाट का बाजार भाव 45 से 50 लाख रुपए के बीच है." यानी वहां 50 करोड़ से ज्यादा की जमीन खाली पड़ी है.

कोआपरेटिव सोसायटी के नियमों के मुताबिक, ऐसी कालोनियों में प्लाटों की खरीद-बिक्री सदस्यों की संचालन समिति की अनुमति के बिना नहीं हो सकती.

मौजूदा समिति के रहते धंधेबाजों की दाल नहीं गल पा रही थी. अब अगले महीने की 20 तारीख को नई समिति का चुनाव होना था. अंबिकेश और सुब्रत को इस मामले में फंसाने के पीछे सिंडीकेट की मंशा थी कि वे दोनों चुनाव नहीं लड़ सकें.

विरोध प्रदर्शन

"आखिर एक कार्टून जो बहुत पहले से इंटरनेट पर घूम रहा था उसे फॉरवर्ड करने के आरोप में प्रोफेसर और सुब्रत को गिरफ्तार करने का क्या तुक था? दरअसल, इसके पीछे खेल दूसरा था"

विकास दत्त, कॉलोनी निवासी

इस मामले में तृणमूल के जिन चार लोगों को कुछ देर के लिए गिरफ्तार किया गया था, वे सब स्थानीय सिंडीकेट के सदस्य थे.

उन्होंने वर्ष 1999 से 2005 के बीच कॉलोनी में भवन निर्माण सामग्री की सप्लाई के एवज में 17 लाख का एक बिल दिया था लेकिन अंबिकेश और सुब्रत ने उस बिल का भुगतान रोक कर ऑडिट कराना शुरू किया था.

कॉलोनी के विकास दत्त सवाल करते हैं, "आखिर एक कार्टून जो बहुत पहले से इंटरनेट पर घूम रहा था उसे फॉरवर्ड करने के आरोप में प्रोफेसर और सुब्रत को गिरफ्तार करने का क्या तुक था? दरअसल, इसके पीछे खेल दूसरा था."

लेकिन इस सिंडीकेट के प्रमुख और तृणमूल कांग्रेस नेता अरुप मुखर्जी इन आरोपों से इनकार करते हैं. उक्त हाउसिंग कॉलोनी के सामने रहने वाले अरुप भवन निर्माण सामग्री के प्रमुख सप्लायर हैं.

वह कहते हैं, "मैंने महज कॉलोनी में होने वाले घपलों को लेकर आवाज उठाई थी. लेकिन सीपीएम के कुछ लोग कॉलोनी के लोगों से मिल कर मुझे बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं."

वैसे उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि जब कॉलोनी में उनका कोई प्लाट नहीं है तो वह उस मामले में इतने चिंतित क्यों हैं?

इधर प्रोफेसर की गिरफ्तारी के विरोध में वहां रोजाना विरोध जुलूस निकल रहा है. इसमें पूरी कॉलोनी के लोग हाथों में बैनर लेकर शामिल होते हैं. कोलकाता में भी इस मामले पर विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.