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बीफ फेस्टिवल के दौरान भिड़े छात्र

 सोमवार, 16 अप्रैल, 2012 को 21:05 IST तक के समाचार
बीफ

पुलिस के लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने के बाद हिंसात्मक भीड़ तितर बितर हुई

हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय के परिसर में रविवार रात दलित और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(एबीवीपी) के समर्थक छात्रों के बीच कैम्पस में बीफ या बैल का मांस खाए जाने पर पर हिंसात्मक झड़प हो गई.

इस मुद्दे पर कई दिन पहले ही से कैम्पस में तनाव बढ़ने लगा था. रविवार को आंबेडकर जयंती के अवसर पर हुए इस बीफ फेस्टिवल के लिए पुलिस ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किये थे. फेस्टिवल में लगभग 1,500 लोगों ने भाग लिया जिनके सामने बीफ बिरयानी परोसी गई.

डेमोक्रेटिक कल्चरल फोरम के बैनर तले यह मेला प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक स्टुडेंट्स यूनियन, दलित स्टुडेंट्स यूनियन, आंबेडकर स्टुडेंट्स यूनियन, तेलंगाना स्टुडेंट्स यूनियन और स्टुडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने आयोजित किया था जिस में कई प्रोफेसरों, बुद्धिजीवियों और लेखकों ने भी हिस्सा लिया.

आयोजकों ने यह कहते हुए कैम्पस में "बीफ फेस्टिवल" का आयोजन किया था कि बड़े जानवर का गोश्त्त खाना उनका अधिकार और उनकी संस्कृति का हिस्सा है वहीं एबीवीपी ने इसका कड़ा विरोध करते हुए फेस्टिवल न होने देने की घोषणा की थी.

पहले आयोजकों की योजना कैम्पस में ही बिरयानी बनाने की थी लेकिन बाद में उन्होंने बाहर से ही तैयार बिरयानी मंगवाई.

लाठीचार्ज

जिस समय मेले में उपस्थित लोग खाना खा रहे थे कैम्पस के एक दूसरे भाग में एबीवीपी के लगभग 100 समर्थकों ने एक जुलूस निकला जो मेले के स्थान की और बढ़ने लगा.

जब पुलिस ने उन्हें रोका तो उन्होंने पथराव कर दिया और दो वाहनों को आग लगा दी जिसमें एक टीवी चैनल की गाड़ी भी शामिल थी.

पुलिस के लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने के बाद हिंसात्मक भीड़ तितर बितर हुई. जिस समय गड़बड़ चल रही थी, दलित संगठनों के समर्थकों ने भी लाठियों के साथ उनका मुकाबले करने की कोशिश की.

"हर एक को इस बात की आजादी होनी चाहिए कि वो अपना मन-पसंद खाना खाए. बीफ दलित खाने का एक हिस्सा है और उनकी पहचान का हिस्सा है."

बी सुदर्शन, आयोजक

हैदराबाद के संयुक्त पुलिस आयुक्त अमित गर्ग ने कहा की कैम्पस में अब स्थिति शांतिपूर्ण है और हालात नियंत्रण में हैं.

यह लगातार दूसरा वर्ष है जब कि केम्पस में इस तरह की घटना हुई है. गत वर्ष भी दलित संगठनों ने सीमित स्तर पर बीफ फेस्टिवल का आयोजन किया था लेकिन एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने उस जगह हमला कर के तोड़फोड़ की, लोगों की पिटाई की, खाना फेंक दिया और खाने के बर्तन में पेशाब कर दिया था.

इस बीफ फेस्टिवल ने इस सवाल पर बहस को तेज कर दिया है कि क्या किसी विश्वविद्यालय के होस्टलों में खाने के 'मेन्यू' पर किसी खास वर्ग का नियंत्रण होना चाहिए?

क्या है कानून?

फेस्टिवल के एक आयोजक बी सुदर्शन का कहना है कि यह लड़ाई 'खाने की आजादी' के लिए है.

उन्होंने कहा, "हर एक को इस बात की आजादी होनी चाहिए कि वो अपना मन-पसंद खाना खाए. बीफ दलित खाने का एक हिस्सा है और उनकी पहचान का हिस्सा है".

लेकिन एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य रामकृष्ण ने इस का कड़ा विरोध करते हुए कहा, "आज यह लोग बीफ की मांग कर रहे हैं कल यह शराब की मांग भी करेंगे".

यहाँ यह बात उल्लेखनीय है की दिल्ली और कुछ अन्य उत्तरी राज्यों में गाय और बैल दोनों के मांस के सेवन पर प्रतिबन्ध है लेकिन आंध्र प्रदेश में केवल गाय के काटने पर पाबंधी है और बैल काटा जा सकता है.

लेकिन कभी-कभी इस को लेकर भी विवाद उत्पन्न होता रहता है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े संगठन उस पर रोक लगाने की भी मांग करते हैं.

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