'पुलिस का काम चुनौती भरा'

 शनिवार, 14 अप्रैल, 2012 को 05:01 IST तक के समाचार

अलग-अलग पेशों से जुड़े पेचीदे सवालों का जवाब आप तक पहुंचाने के लिए हर शनिवार बीबीसी हिंदी सेवा आपकी मुलाकात ऐसे पेशेवर व्यक्तियों से करवाएगी, जिनका काम अपने ही आप में अनूठा हो.

इस कड़ी में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी डी रविशंकर से बात की बीबीसी संवाददाता सलमान रावी ने-

सबसे पहले आपकी शैक्षणिक योग्यता जानना चाहेंगे.

मैं एन आई टी वारंगल से मेकैनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हूँ.

पेशे से इंजीनियर, आपने पुलिस सेवा में आने का कैसे सोचा ?

मुझे हमेशा लगता था कि पुलिस की सेवा में आपको अलग-अलग तरह के लोगों से जूझने का मौका मिलता है. इसमें अच्छे और बुरे दोनों लोग होते हैं.

जब पढाई कर रहे थे तो वह अलग दुनिया थी. नौकरी में एक अलग तरह की दुनिया से दो चार होना पड़ा होगा. इस अचानक हुए बदलाव से किस तरह सामना किया ?

जब व्यक्ति पढ़ता है तो सपनों की दुनिया में होता है. मगर जब नौकरी में आता है तो हकीकत की दुनिया से रूबरू होता है. शैक्षणिक संस्थानों में जो कुछ पढाया जाता है वह ज्यादातर किताबी होता है. जब ज़िन्दगी की हकीकत सामने आती है तो उसका सही तरह से सामना करना उच्च मनोभाव को दर्शाता है. मुझे लगता है कि जिन्दगी की हकीकत से सामना करने में मेरी मदद मेरी इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि नें की.

पुलिस की नौकरी का फैसला क्या अचानक था या फिर पहले से सोचा था कि पुलिस के अधिकारी बनेंगे. वह भी राज्य की पुलिस सेवा के ?

मैं राज्य की प्रशासनिक सेवा में आना चाहता था. जब राज्य सेवा आयोग की परीक्षा होती है तो उसमे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देनी पढ़ती है. मुझे पुलिस की सेवा मिली.

राज्य पुलिस की सेवा में किस तरह का काम करना पढ़ता है. फिलहाल आप क्या करते हैं ?

मैं फिलहाल सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर कार्यरत हूँ और राजनीतिक गुप्तचर विभाग देख रहा हूँ. इस विभाग में काम करना भी काफी चुनौतीपूर्ण है. पुलिस सेवा में दो-दो चीजें करनी पढ़ती हैं. वह है सुपरविजन और फील्ड का काम. उस दृष्टि से देखा जाए तो मुझे पुलिस की सेवा पसंद है.

छत्तीसगढ़ में पुलिस की नौकरी करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है. नक्सल बहुल इस राज्य में पुलिस की नौकरी करना कैसा लगता है ?

अपनी नौकरी के शुरूआती पांच साल मैंने घोर नक्सल इलाकों में बिताए हैं जैसे बालाघाट, दंतेवाड़ा और बीजापुर. इन इलाकों में काम करना वाकई चुनौती भरा है क्योंकि जब आप एक नेतृत्वकर्ता के रूप में समाज को विघटित करने वाले तत्वों के खिलाफ करवाई करते हैं तो आपमें उच्च नेतृत्व क्षमता होनी चाहिए. आप 20, 50 या फिर 100 लोगों का नेतृत्व करते हैं. दल का नेतृत्व बेहतर योजना के तहत करना पड़ता है. इसलिए यह काफी चुनौती भरा है.

दूसरी नौकरियों में काम करने का निर्धारित समय होता है. क्या आपका भी कोई निर्धारित वक्त है ?

नहीं. हमें भी चौबीसों घंटे काम करना पड़ता है.

तब तो काफी तनाव हो जाता होगा ?

तनाव और थकावट हो जाती है क्योंकि प्रतिव्यक्ति जितनी क्षमता पुलिस बल की होनी चाहिए उतनी नहीं है. लोगों को पुलिस से ज्यादा ही उम्मीदें रहतीं हैं.

जब आपने राज्य लोक सेवा आयोग की प्रवेश परीक्षा लिखी तो आपका सबसे मजबूत पक्ष क्या था ?

गणित. चूँकि मैंने मेकेनिकल इंजीनियरिंग किया था तो मेरा सबसे मजबूर पक्ष गणित ही था. इसके अलावा मैंने दर्शन शास्त्र लिया था.

जो नौजवान अब राज्य लोक सेवा आयोग की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें किन बातों का ख़याल रखना चाहिए ?

एकाग्रता. यही सफलता की कुंजी है. इसके अलावा सामान्य ज्ञान से लेकर हर विषय पर ध्यान देना चाहिए. खास तौर पर अंग्रेजी जो अंतरराष्ट्रीय भाषा है. मैं छात्रों को कहना चाहूँगा कि वो घूमें, फिरें और मस्ती करें इसके अलावा दिमाग को मजबूत रखें ताकि कम समय में ज्यादा पढ़ पाएं.

वह एक चीज़ जिसके बिना प्रशानिक सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल नहीं की जा सकती ?

मेहनत और सिर्फ मेहनत.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.