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ओडिशा में बंधकों की रिहाई अधर में

 बुधवार, 11 अप्रैल, 2012 को 09:11 IST तक के समाचार
झीना हिकाका

हिकाका भी माओवादियों के कब्जे में हैं

इतालवी पर्यटक बोसुस्को पाओलो और बीजू जनता दल विधायक झीना हिकाका की रिहाई के लिए माओवादियों की मांगें पूरी करने के लिए सरकार को दी गयी समयसीमा मंगलवार को समाप्त हो गई.

लेकिन दोनों बंधकों क़ी रिहाई अब भी अधर में लटकी हुई है.

पाओलो को बंधक बनानेवाले सीपीआई ओडिशा राज्य संगठन कमेटी के सचिव सब्यसाची पांडा ने मंगलवार की शाम एक और ऑडियो संदेश जारी किया.

लेकिन इसमें पाओलो की रिहाई या समयसीमा बढाने के बारे में कुछ नहीं कहा गया.

पांडा ने अपने संदेश में कहा, "मीडिया के जरिए इस बात का पता चलने पर कि सरकार और हमारी ओर से नियुक्त मध्यस्थों के बीच एक समझौते के मसौदे पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए हैं. हम समझौते की प्रति प्राप्त करने की कोशिश कर रहें हैं. हम देखना चाहते हैं कि उसमें हमारी 13 मांगों के बारे में क्या कहा गया है."

शंका

माओवादी नेता ने कहा, "अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि हमनें जिन सात लोगों की रिहाई क़ी मांग की थी, उनमें से किस किस को छोड़ने के लिए सरकार तैयार है. ऐसी स्थिति में इतालवी बंदी को छोड़ना संभव नहीं है."

इधर राज्य के गृह सचिव उपेंद्र नाथ बेहेरा ने कहा कि समझौते के प्रति पांडा को भेजी गई है और उम्मीद है कि उसे देखने के बाद उनकी शंकाएं दूर हो जाएँगी.

दारिंगबाड़ी के बीडीओ मनोज कुमार स्वाई ने भी कहा कि समझौते की प्रति स्थानीय लोगों के जरिए पांडा के पास भेजी गई है.

दूसरी ओर बीजद विधायक झीना हिकाका को बंधक बनाने वाले आंध्र ओडिशा बोर्डर कमेटी की ओर से उनकी मांगें पूरी करने के लिए सरकार को दी गई समयसीमा मंगलवार को समाप्त होने के बाद में विधायक की रिहाई के बारे में उनकी ओर से कोई सूचना नहीं आई है.

रविवार को अपने आखिरी संदेश में आंध्र ओडिशा बोर्डर कमेटी ने कहा था कि दोनों मध्यस्थ डॉ बीडी शर्मा, दंडपानी मोहंती और कोरापुट के वकील निहार पटनायक के साथ हिकाका की पत्नी मंगलवार को उन 30 कैदियों को लेकर बालीपेटा गाँव पहुंचें, जिनकी रिहाई की मांग की गई है, तो हिकाका को उनके परिवार वालों को सौंप दिया जाएगा.

इन 30 लोगों में उन 23 लोगों के अलावा जिनकी मुक्ति क़ी घोषणा सरकार पहले ही कर चुकी है, पांच और कैदी शामिल हैं. इन पांच लोगों में कुख्यात माओवादी छेड़ा भूषण उर्फ घासी भी शामिल हैं. उनकी रिहाई की मांग माओवादियों ने सरकार की घोषणा के बाद की थी.

मंगलवार क़ी शाम इन पांच कैदियों की संभावित रिहाई के बारे में पूछे जाने पर गृह सचिव यूएन बेहेरा ने कहा कि इन पाँचों के मामलों का अध्ययन किया जा रहा है. लेकिन अभी तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया.

"मीडिया के जरिए इस बात का पता चलने पर कि सरकार और हमारी ओर से नियुक्त मध्यस्थों के बीच एक समझौते के मसौदे पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए हैं. हम समझौते की प्रति प्राप्त करने की कोशिश कर रहें हैं. हम देखना चाहते हैं कि उसमें हमारी 13 मांगों के बारे में क्या कहा गया है"

सब्यसाची पांडा का ऑडियो संदेश

मंगलवार को रायगड़ा जिले के गुनुपुर की एक फास्ट ट्रैक अदालत ने माओवादी नेता सब्यसाची पांडा की पत्नी सुभश्री दास उर्फ मिली पांडा को 2003 के एक मामले में सबूत के अभाव में बरी कर दिया.

सुभश्री पर आरोप था कि वे 2003 में गुडारी थाने के कटिनगुडा गाँव में पुलिस के साथ मुठभेड़ में शामिल थीं.

रिहा होने के बाद सुभश्री ने कहा, "आखिरकार सत्य की जीत हुई. मैं शुरू से ही कहती आई हूँ कि मेरे खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाए गए हैं और आज अदालत ने उसे साबित कर दिया."

मिली पंडा ने कहा कि उनकी रिहाई में सरकार का रत्ती भर भी योगदान नहीं है.

उन्होंने कहा, "मुझे मान्यवर अदालत ने रिहा किया है. सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है. बल्कि सरकार तो मुझे दोबारा गिरफ्तार करने के लिए नयागढ़ के अदालत से वारंट निकालकर बैठी है. हो सकता है कि मुझे घर पहुँचने से पहले ही धर लिया जाए. नहीं तो फिर घर पहुँचने के बाद."

अपने पति को अपना 'फ्रेंड, फिलोसोफर गाइड' बताते हुए मिली ने कहा कि भले ही वे अपने पति से दूर हों, लेकिन उनके आदर्श उन्हें हमेशा प्रेरित करते हैं.

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