हैदराबाद पर फिर दंगों और कर्फ्यू के साये

 बुधवार, 11 अप्रैल, 2012 को 04:38 IST तक के समाचार
हैदराबाद

हैदराबाद में तीसरे दिन भी कर्फ्यू जारी है.

दो वर्ष में दूसरी बार हैदराबाद में कर्फ्यू लगाना पड़ा है. संवेदनशील पुराने शहर के दो पुलिस स्टेशनों मदन्नापेट और सईदाबाद में रविवार को हुए साम्प्रदायिक दंगों के बाद लगाया गया कर्फ्यू मंगलवार को तीसरे दिन भी जारी है.

हालाँकि कर्फ्यू लगाने के बाद से इन इलाकों में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है लेकिन ऐसा लगता है कि पूरा पुराना शहर खौफ के माहौल में जकड़ा हुआ है.

दुकानें और कारोबार बंद हैं और सड़कें वीरान. लोग घरों में बंद हैं और पुलिस का कड़ा पहरा है.

एक बार फिर शरारती तत्वों ने हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़काने के लिए घिसे पिटे तरीके अपनाएं हैं.

पहले रविवार को मदन्नापेट के एक मंदिर में किसी जानवर के शरीर के टुकड़े फेंके गए. जब उसकी खबर फैली तो वहां विश्व हिन्दू परिषद्, और बजरंगदल के नेता जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन ने हिंसात्मक रूप ले लिया.

जब राहगीरों और दूसरे समुदाय के लोगों के घरों पर हमले शुरू हुए तो दोनों के बीच झड़पें हुई और छुरेबाज़ी की घटनाएँ भी हुईं.

देखते ही देखते हिंसा कई इलाकों तक फैल गई. पुलिस के आने और कार्रवाई करने में काफी देर हुई तब तक बहुत नुकसान हो चुका था.

"दंगों के पीछे किसका षडयंत्र हैं इसका पता लगाने के लिए छान बीन हो रही है और 150 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है."

सविता रेड्डी, गृहमंत्री

रविवार की शाम और सोमवार को तीन मस्जिदों में सुअर का मॉस फेंका गया. हालाँकि पुलिस और मस्जिद की समितियों के सदस्यों ने उन्हें तुरंत साफ़ कर दिया लेकिन इसकी खबर फैलते ही कुछ नए इलाकों में तनाव फैल गया.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इससे स्पष्ट है कि कोई बड़े पैमाने पर दंगे कराने की कोशिश कर रहा है.

राज्य की गृहमंत्री सविता इन्द्र रेड्डी ने कहा कि इसके पीछे किसका षडयंत्र हैं इसका पता लगाने के लिए छान बीन हो रही है और 150 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है.

लेकिन यह बात भी किसी से छुपी नहीं है कि पुलिस और सरकार के निकम्मेपन से ही हालात इतने ख़राब हुए हैं क्योंकि कई लोगों का कहना है कि गत कई दिनों से इस बात के खुले संकेत मिल रहे थे कि नगर में साम्प्रदायिक गड़बड़ी हो सकती है.

सबसे पहले तो मेदक जिले के संगारेड्डी नगर में 29 मार्च को व्यापक पैमाने पर दंगे हुए जिस में 12 लोग घायल हुए और करोड़ों की संपत्ति बर्बाद कर दी गई.

बढ़ते धार्मिक जुलूस

स्थानीय लोगों के अनुसार उन दंगों में अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय का नुक्सान हुआ और सभी ने कांग्रेस के स्थानीय विधायक और पुलिस को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया. उसके बाद से ही हैदराबाद में भी तनाव बढ़ने लगा था.

हैदराबाद में 2010 में भी मुसलमानों के त्योहार मिलादुन्नबी यानी की इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्मदिन और हुनमान जयंती के जुलूसों के बीच होड़ के करण ही दंगे हुए थे और कर्फ्यू लगाना पड़ा था.

चारमीनार

हमेशा चहल-पहल रहने वाले चारमीनार के इलाके में भी चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है.

इस बार भी लगभग ऐसा ही हुआ.

मुस्लिम और हिन्दू संगठन दोनों ही त्योहार मनाने में एक दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में लगे हुए हैं.

अगर मिलादुन्नबी के अवसर पर मुसलमान नगर को हरे रंग में रंगने की कोशिश करते हैं और मोहल्लों और सड़कों को हरी झंडियों से सजाते हैं तो विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल हनुमान जयंती के अवसर पर नगर को भगवा रंग में रंगते हैं.

इस वर्ष हनुमान जयंती के जुलूस के अवसर पर आयोजकों ने विश्व हिन्दू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़या को आमंत्रित किया था.

अपने भड़काओ भाषणों के लिए मशहूर तोगड़या ने इस बार भी मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया और हिन्दू समुदाय से आह्वान किया कि वे मुसलमानों को दिए गए आरक्षण के विरुद्ध अपना अभियान तेज़ करें क्योंकि इससे हिन्दुओं का नुकसान हो रहा है.

इसके ठीक दो दिन बाद ही नगर में साम्प्रदायिक गड़बड़ी शुरू हो गई.

पुलिस अधिकारियों का कहना है की जहाँ मिलादुन्नबी के जुलूसों को मुस्लिम राजनीतिक दल मजलिस-इ-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का समर्थन और सरपरस्ती है वहीं हनुमान जयंती और दूसरे धार्मिक जुलूसों को भारतीय जनता पार्टी का समर्थन है.

पुलिस के अनुसार ये जुलूस राजनेताओं के लिए अपने प्रभाव और दबदबे के प्रदर्शन का माध्यम बन गए हैं.

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