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परमाणु आतंकवाद चिंता का विषय: मनमोहन

 रविवार, 25 मार्च, 2012 को 10:15 IST तक के समाचार
मनमोहन सिंह

मनमोहन सिंह ने परमाणु कार्यक्रमों के प्रति लोगों में भरोसा जगाने की बात कही है.

परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में हैं. सम्मेलन से पहले उन्होंने कहा है कि 'परमाणु आतंकवाद चिंता का विषय है.'

भारतीय प्रधानमंत्री ने ये बयान दक्षिण कोरिया के दौरे पर जाने से पहले दिल्ली में दिया. दो-दिनों का सम्मेलन औपचारिक तौर पर सोमवार से प्रारंभ होगा.

सम्मेलन के दौरान परमाणु सुरक्षा खासतौर पर परमाणु 'आतंकवाद' पर चर्चा की जाएगी. इसमें भाग लेने के लिए अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा सहित 53 मुल्कों के नेता इकट्ठा हो रहे हैं

सम्मेलन में परमाणु उपकरणों और सामग्री के चरमपंथी तत्वों के पास पहुंचने और उसके अवैध लेन-देन को रोकने के उपायों पर भी चर्चा होगी.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी भी इस बैठक में शामिल होंगे जिस दौरान उनकी मुलाकात बराक ओबामा से होनी है.

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि युसुफ रजा गिलानी सम्मेलन में पाकिस्तान के परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल को लेकर जारी मतभेदों को दूर करने की कोशिश करेंगे.

पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रमों की सुरक्षा को लेकर विश्व भर में खासतौर पर भारत में काफी चिंता रही है.

इस बीच सोल पहुँचने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का औपचारिक स्वागत किया गया. दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति से हुई बातचीत में दोनों देशों ने 2015 तक आपसी कारोबार 40 अरब डॉलर करने पर सहमति जताई. मनमोहन सिंह दक्षिण कोरिया से भारत में निवेश करने का भी आग्रह किया जबकि दक्षिण कोरिया ने उपग्रह लॉन्च करने के लिए भारत की मदद लेने की मंशा जताई है.

कड़ी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरफ से शनिवार को बयान जारी किया गया था. बयान में कहा गया है कि सोल परमाणु सुरक्षा सम्मेलन अप्रैल 2010 में राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा वाशिंगटन में आयोजित कार्यक्रम की अगली कड़ी है. वाशिंगटन में आयोजित सम्मेलन में "परमाणु क्षमता रखने वाले देशों का ध्यान उस खतरे की तरफ खींचा गया था जो परमाणु आतंकवाद से पैदा हो सकता है."

बयान में कहा गया है कि परमाणु आतंकवाद अभी भी चिंता का विषय है.

प्रेस विक्षप्ति के मुताबिक प्रधानमंत्री ने कहा कि वो उम्मीद करते हैं कि सम्मेलन में परमाणु सुरक्षा को बेहतर किए जाने के और उपाय सामने आएंगे.

भारत में बिजली की भारी कमी है और वो उन कुछ मुल्कों में से एक है जो परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है. हालांकि उसे इसमें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

कुडनकुलम

तमिलनाडू में तैयार हो रहे कुडनकुलम संयत्र को हालांकि राज्य सरकार के प्रारंभिक विरोध के बाद उसकी सहमति प्राप्त हो गई है लेकिन नागरिक समाज की ओर से विरोध अभी भी जारी है.

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक भारत का लक्ष्य है कि वो साल 2032 तक 63,000 मेगावॉट बिजली परमाणु संयंत्रो के माध्यम से पैदा कर सके. ये उसकी वर्तमान क्षमता में चौदह गुणा इजाफे के बराबर है.

मनमोहन सिंह ने कहा है, "आम लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए ये जरूरी है कि हम उन्हें सुरक्षा के मामले पर भरोसा दिला सकें. ये जापान के फुकुशिमा में पिछले साल हुई दुर्घटना के बाद और जरूरी हो गया है."

पाकिस्तान

प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी के कार्यालय से जारी बयान के मुताबकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की मुलाकात 27 मार्च को होगी.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि हालांकि मुलाकात की कार्य-सूची को लेकर कुछ साफ नहीं है लेकिन प्रवक्ता अकरम शहीदी का कहना है कि ये दोनों मुल्कों के लिए जरूरी विषयों के ईर्द-गिर्द होगा.

पिछले साल पाकिस्तान के ऐबटाबाद में अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के खिलाफ की गई अमरीकी कार्रवाई के बाद अमरीका और पाकिस्तान के रिश्तों में भारी तनाव रहा है. कुछ ही दिनों बाद अमरीकी विमान के एक हमले में 24 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने के बाद हालात बद से बदतर हो गए.

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