चरमपंथ खतरनाक या सड़क दुर्घटनाएँ?

 बुधवार, 21 मार्च, 2012 को 21:04 IST तक के समाचार
सड़क दुर्घटना (फाइल फोटो)

भारत में सड़क दुर्घटना में हर साल प्रति लाख क़रीब 17 लोगों की मौतें होती हैं

भारत के पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लै ने कहा है कि भारत में हर साल चरमपंथी हमलों से ज्यादा सड़क दुर्घटना में लोग मारे जाते हैं.

बुधवार को राजधानी दिल्ली में भारतीय व्यापार और उद्योग संगठन फिक्की की तरफ से 'नए दौर में सुरक्षा खतरा' के विषय पर आयोजित एक सेमिनार में जीके पिल्लै ने कहा कि चरमपंथी हमलों की तुलना में हर दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाएं देश की सुरक्षा के लिए ज्यादा बड़ा खतरा हैं.

पिल्लै का कहना था, ''भारत में हर साल सड़क दुर्घटना में एक लाख 38 हजार लोग मारे जाते हैं, जबकि चरमपंथी हमलों में हर साल लगभग दो हज़ार लोग मारे जाते हैं. ये सौ गुना ज़्यादा बड़ी समस्या है और केंद्रीय गृह मंत्रालय को सड़क दुर्घटना के बारे में चिंता करनी चाहिए.''

उनके अनुसार सरकार को हर साल इन दुर्घटनाओं से अरबों रूपयों का नुकसान होता है.

अरबों का नुकसान

पिल्लै के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में हर साल लगभग 30 लाख जख्मी होते हैं. उनमें से कई की नौकरी चली जाती है. फिर बीमा की रकम देनी पड़ती है. उनके अनुसार मानव संसाधन के नुकसान के अलावा देश की आर्थिक स्थिति पर भी इसका बुरा असर पड़ता है.

"भारत में हर साल सड़क दुर्घटना में एक लाख 38 हजार लोग मारे जाते हैं, जबकि चरमपंथी हमलों में हर साल लगभग दो हज़ार लोग मारे जाते हैं. ये सौ गुना ज़्यादा बड़ी समस्या है और केंद्रीय गृह मंत्रालय को सड़क दुर्घटना के बारे में चिंता करनी चाहिए."

जीके पिल्लै, भारत के पूर्व गृह सचिव

उन्होंने कहा कि एक आकलन के मुताबिक कुल मिलाकर इन दुर्घटनाओं से देश को सालाना 20 अरब डॉलर का नुकसान होता है.

पिल्लै के अनुसार अकेले दिल्ली में हर साल 38 हज़ार नई कारें सड़कों पर आती हैं, ऐसे में चाहे जितनी भी सड़कें या फ्लाईओवर बन जाएं यातायात की समस्या कम नहीं होगी.

उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए. उनके अनुसार इसके लिए बहुत जरूरी है कि यातायात पुलिस में भर्ती के समय काबिल लोगों का चयन किया जाए और फिर उन्हें सही प्रशिक्षण भी दिया जाए.

तुलना पर सवाल

लेकिन सवाल ये है कि एक पूर्व गृह सचिव के लिए सड़क दुर्घटना में मारे गए लोगों की तुलना चरमपंथी हमलों में मारे गए लोगों से करना कितना सही है?

उसी सेमिनार में मौजूद एक सज्जन ने ये बातें कहीं भी कि जी के पिल्लै को ऐसी तुलना नहीं करनी चाहिए.

लेकिन पिल्लै ने इसका जवाब देते हुए कहा कि पहले जब यातायात व्यवस्था उतनी जटिल नहीं हुई थी और भारत में ज्यादा गाड़ियां नहीं चलती थी तब तो ये बात ठीक थी.

उनके अनुसार सेमिनार का विषय 'नए दौर में सरक्षा खतरा' है और आज के वर्तमान भारत में सड़क दुर्घटना एक बड़ा मुद्दा है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें वैश्विक स्तर पर एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2008 में 178 देशों में सर्वेक्षण करके सड़क दुर्घटनाओं पर आंकड़े एकत्रित किए थे.

क्लिक करें किस देश में होती हैं कितनी सड़क दुर्घटनाएँ

उस सर्वेक्षण के अनुसार दुनिया भर में प्रति एक लाख जनसंख्या पर सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 16.6 थी.

बात अगर दक्षिण एशिया की जाए तो बांग्लादेश में सबसे कम लोग मारे जाते हैं और अफगानिस्तान में सबसे ज्यादा लोग सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं.

उस सर्वेक्षण के अनुसार बांग्लादेश में प्रति एक लाख की जनसंख्या पर 12.6 लोग सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं जबकि अफ़गानिस्तान में प्रति एक लाख की जनसंख्या पर 39 लोग मारे जाते हैं.

उसी सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में हर साल प्रति एक लाख जनसंख्या पर 16.8 लोग सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं, जबकि पाकिस्तान में 25.3 लोग मारे जाते हैं.

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